Category Archives: लिटरेचर लव

शहीदों का सम्मान (कविता)

वेंकटेश कुमार. … न करते वो वलिदान, तो आजादी एक सपना होता ! लालकिले पर फहराता झंडा, पर नहीं वो अपना होता !! गर अपनाते उनके आदर्शो को, संसार में  शर्मिंदा न होना होता ! भ्रष्टाचार, बेकारी, गरीबी और साम्प्रदायिकता … विस्तार से पढ़ें

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मात खाती जिंदगी (कविता)

मात खाती जिंदगी मुझसे सवाल करती है और मैं उसे यकीन दिलाता हूं उस विजय का जिसके लिए कई लोगों ने अपनी जिंदगियों को दांव पर लगाया है जब लोग भाग रहे थे पैसों के पीछे उस समय होती थी … विस्तार से पढ़ें

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क़स्बाई लड़कियाँ (नज्म)

खुलती हैं रफ़्ता-रफ़्ता मोहब्बत की खिड़कियाँ, कितनी हसीन होती हैं क़स्बाई लड़कियाँ। काजल भरी निगाह में शर्मो-हया के साथ, धीरे से आये सुर्ख़ लबों पर हरेक बात। रंगीन कुर्तियों पे दुपट्टा सम्हाल कर, चलती हैं सर झुकाये हुये हर सवाल … विस्तार से पढ़ें

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लिखे थे आप पे मैंने, वही क़लाम भेजा है (कविता)

उत्तम पाल मेरी नज़र ने आपको, मेरा सलाम भेजा है, क़ुबूल है इश्क आपका, यही पयाम भेजा है। जो ख़त लिखे थे आपने, उसे महफूज़ रक्खा है, हर एक हार्फ मेरी दौलत, यही पयाम भेजा है। न डर है मुझको, … विस्तार से पढ़ें

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फेसबुक पर चालीस साला औरतें —-(कविता)

अंजू शर्मा, इन अलसाई आँखों ने रात भर जाग कर खरीदे हैं कुछ बंजारा सपने सालों से पोस्टपोन की गयी उम्मीदें उफान पर हैं कि पूरे होने का यही वक़्त तय हुआ होगा शायद अभी नन्ही उँगलियों से जरा ढीली … विस्तार से पढ़ें

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बाइट्स प्लीज, (उपन्यास भाग-21)

44. महेश सिंह और विज्ञापन मैनेजर मंगल सिंह को लेकर पटना दफ्तर में यह अफवाह फैली हुई थी कि दोनों को इस्तीफा देकर जाने को कह दिया गया है। हालांकि दोनों के चेहरों पर किसी तरह का शिकन नहीं था। … विस्तार से पढ़ें

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ये प्यार तेरा मुझको पागल कर देगा(कविता)

अरविंन्द सिंह ‘मोनू’, हर लम्हा गुजरता है अरसा बन–बनकर हर दिन गुजरता है साल बन–बनकर इंतजार में जीना कितना मुश्किल होता है आँखों की गुस्ताखी भुगतना दिल को होता है इंतज़ार तेरा मुझको पागल कर देगा दिल से निकले जज्बात, … विस्तार से पढ़ें

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पापा ! क्यों तुमने ऐसा मेरे साथ किया…

विनायक विजेता, वरिष्ठ पत्रकार। परखनली से तुमने पापा, कभी मुझको जीवन दान दिया आत्मा मेरी पूछ रही, फिर क्यों ऐसा मेरे साथ किया पापा-मम्मी आप कभी जब भी उदास होते थे बेटी के बाद जब एक बेटे के ख्वाब में … विस्तार से पढ़ें

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बाइट, प्लीज (part 21)

44. महेश सिंह और विज्ञापन मैनेजर मंगल सिंह को लेकर पटना दफ्तर में यह अफवाह फैली हुई थी कि दोनों को इस्तीफा देकर जाने को कह दिया गया है। हालांकि दोनों के चेहरों पर किसी तरह का शिकन नहीं था। … विस्तार से पढ़ें

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निचली शक्तियों की अनदेखी साहित्य की सेहत के लिए ठीक नहीं : राजेंद्र यादव

दयानंद पांडेय, हंस के संपादक और कभी कहानीकार रहे राजेंद्र यादव हिंदी में एक दुर्लभ प्रजाति के जीव हैं। हद से अधिक प्रतिबद्ध होना, खूब पढा-लिखा होना और हद से भी अधिक लोकतांत्रिक होने का अदभुत कंट्रास्ट अगर देखना हो … विस्तार से पढ़ें

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