Category Archives: अंदाजे बयां

औरतों के अधिकार और संघर्ष की कहानी पर केंद्रित है हमारा शो’’अधिकार एक कसम एक तपस्या’’-सोमजी आर शास्त्री

राजू बोहरा नयी दिल्ली, समय को नापने, तरासने और उसे हमेशा नया-नया अर्थ देने का जो प्रयास आज तक होता रहा है उसकी कहानी किसी से छिपी नहीं है. लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि आज दुनिया जिस ऊंचाई … विस्तार से पढ़ें

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गुहा…भागवत और डीडी

संजय मिश्र उम्मीद नहीं थी कि इतिहासकार राम चन्द्र गुहा आरएसएस की खिलाफत के लिए इतना कमजोर दांव खेलेंगे…. उन्हें दूरदर्शन पर मोहन भागवत के भाषण दिखाने पर आपत्ति है… वो कहते कि आरएसएस कम्यूनल है… लगे हाथ मोहन भागवत … विस्तार से पढ़ें

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सपनों के व्याकरण को समझने की मेरी ललक

अचानक आपकी नींद टूट जाती है और चाह कर कर यह याद नहीं कर पाते हैं सपने में आप क्या देख रहे थे हालांकि इस बात का आपको अहसास होता है कि सपना सुखद था, और इस सपना को देखने … विस्तार से पढ़ें

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पटना की हवा और कुछ कमीने दोस्त

पटना की हवा मुझे हमेशा से अच्छी लगी है, सारे कमीने दोस्त मेरे यहीं रहते हैं, जिनके साथ अव्वल दर्जे की लुच्चई में मैं संलग्न रहा हूं। दुनिया में बेतल्लुफ दोस्त शुरूआती दौर में ही मिलते हैं, बाद में तो … विस्तार से पढ़ें

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केजरीवाल होने का मतलब, जो मुझे लगता है !

नवल शर्मा, प्रवक्ता , जनता दल युनाइटेड। आज से तक़रीबन दो साल पहले अरविन्द केजरीवाल के दिल्ली में कौशाम्बी स्थित उनके गिरनार अपार्टमेंट वाले फ्लैट में लगभग आधे घंटे की निजी मुलाकात हुई थी .एक मेरे छोटे भाई तुल्य मित्र … विस्तार से पढ़ें

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मैं ‘आप’ को पसंद क्यों करता हूँ: मटुकनाथ

< ![endif]–> बहुत दिनों के बाद फेसबुक पर बैठा, तो मित्रों ने प्रश्नों की झड़ी लगा दी कि आपने ‘आप’ में क्या देखा जो शामिल होने का मन बना लिया ? अलग अलग कितना जवाब दूँ। एक ही साथ सबके … विस्तार से पढ़ें

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Cartoon by Amrendra.

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वह आज भी जागता है. . . !

……………………………………..उस जुलाहे के शब्द अब भी समय को कात रहे हैं। उसकी आवाज़ में न जाने कितने  दिमागों को रोशन किया। वह ज्ञानी नहीं था,  शास्त्र नहीं पढ़े थे, लेकिन उससे बड़ा ज्ञानी कोई नहीं हुआ। वह अलमस्त फकीर था … विस्तार से पढ़ें

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ये जगह नहीं है मेरे काम की …….!

इंजीनियर, डॉक्टर, वैज्ञानिक, प्रबंधक, बैंकिंग या फिर शिक्षक बनना हमेशा से ही युवाओं का टशन रहा है। कोई समाजसेवक बन कर जहाँ समाज के हितों के लिए कुछ करना चाहता है तो साथ ही नाम कमाने की ललक भी उनमें … विस्तार से पढ़ें

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मॉल यानि आधुनिकता का नवीनतम लबादा पहना हुआ मेला

मनोज लिमये, पश्चिमी आँधी ऐसी चली कि गाँव में लगने वाले स्वदेशी हाट धीरे-धीरे मेलों में बदले और अब देखते ही देखते ये मेले मॉल में कनवर्ट हो रहे हैं। मेरे शहर में भी आजकल एक विशेष टाईप की गंध … विस्तार से पढ़ें

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