Category Archives: अंदाजे बयां

‘अगले जनम मुझे बाबू ही कीजो‘

मनोज लिमये, वर्तमान समय में बाबुओं के घर से हड़प्पा-मोहन जोदडो की तर्ज पर लगातार मिल रही चल-अचल संपत्ति मेरे लघु मस्तिष्क पर हावी होती जा रही है। बाबू प्रजाति में ऐसे फिलासॉफिकल डायमेंशन मुझे पहले कभी नजर नहीं आए … विस्तार से पढ़ें

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पारंपरिक गीतों से दूर हो रही होली…!

“धन्य-धन्य भाग तोहर हउ रे नउनियां….मड़वा में राम जी के छू अले चरणियां…” ढोल मंजीरे की थाप पर होली गीतों के गायन की शुरूआत में गाया जाने वाला यह गीत अब गांव की चौपालों से भी सुनने को नहीं मिलता। … विस्तार से पढ़ें

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सूरज प्रकाश: अपनी बात (पार्ट – 1)

बहुत  सारे बिम्ब हैं। स्मृतियां हैं। दंश हैं। बहुत सारी खुशियां हैं।  बहुत कुछ ऐसा है जो अब तक किसी से बांटा नहीं है। न आमने सामने और न लेखन के ज़रिये ही। मुझे नहीं पता कि सब लिखने पढ़ने … विस्तार से पढ़ें

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बलात्कार क्यों… कौन… और किसलिए ?

अरविन्द कुमार पप्पू // यूं तो मेरा इस विषय पर विचार, शोध और जानकारी निश्चित रूप से विवादित, हास्यास्पद एवं मूर्खतापूर्ण ही लगेगा और यह मैं मान कर ही चल रहा हूँ और मूर्ख और पप्पू पप्पू ही रह गया का … विस्तार से पढ़ें

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अनमोल होते हैं भाई-बहन के रिश्ते

वीरेन्द्र कुमार// कुछ रिश्ते विरासत में मिलते हैं जो जन्म से निर्रधारित होते हैं, कुछ रिश्ते बनाये जाते हैं पर अटूट हो जाते हैं, भाई -बहन के रिश्ते जो कभी जन्म से बनते हैं उन पर भी भारी पड़ जाते … विस्तार से पढ़ें

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कनवा के बिना रहा ना जाये – कनवा का देखे मूढ़ पिराये

:भरत तिवारी “शजर”// और यही हाल है फेसबुक का | एक समय था कि लोग रोज कसम खाते थे, कि कल से शराब बंद, आज रोज कसम ये कि कल से फेसबुक बंद | ना उनकी शराब बंद होने वाली … विस्तार से पढ़ें

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क्या विज्ञान और तकनीक ने हमें स्वतंत्र कर दिया ?

सुनील दत्ता // पिछले कुल 100 वर्षो में हुए आविष्कारों ने हमारे जीवनशैलियों को पूरी तरह रूपांतरित कर दिया।  वर्षो की यात्राए घंटो में बदल गई। कई – कई दिनों में पूरे होने वाले कार्य मशीनें क्षणों में करने लगी। … विस्तार से पढ़ें

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परिवर्तन के लिए सपने देखना है जरूरी : विभूति नारायण राय

अमित विश्‍वास// कवि सम्‍मेलन ने लोगों का मन मोहा सहरसा, 08 नवम्‍बर, 2012; कला, संस्‍कृति तथा साहित्‍य संस्‍थान, बटोही द्वारा कला ग्राम, सहरसा में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्‍ट्रीय साहित्‍योत्‍सव में अकादमिक सत्र की अध्‍यक्षता करते हुए महात्‍मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा के कुलपति विभूति नारायण राय … विस्तार से पढ़ें

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नये साल पर ‘बेवफा सनम’ हुआ मौसम !

  नव वर्ष 2012 के पहले ही दिन तापमान में भारी गिरावट और हल्की बूंदा-बांदी के बीच मौसम ने लोगों के जश्न के उत्साह को कम कर दिया। राजधानी पटना में पिछले एक सप्ताह से निकली गुनगुनी धूप ने सभी … विस्तार से पढ़ें

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जिय रजा कासी !

काशीनाथ सिंह का उपन्यास अपना मोर्चा जब पढा था तब पढता था और उस का ज्वान उन दिनों रह रह आ कर सामने खडा हो जाता था। उन का कहानी संग्रह आदमीनामा भी उन्हीं दिनों पढा। माननीय होम मिनिस्टर के … विस्तार से पढ़ें

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