Category Archives: ब्लागरी

दुराचार का समाधान कैब कंपनी पर बैन नहीं हो सकता

(इष्टदेव सांस्कृतायन के फेसबुक वाल से) यह सही है कि लड़कियों के साथ आए दिन हो रही दुराचार की घटनाओं का स्थायी समाधान कैब कंपनी पर बैन नहीं हो सकता. लेकिन,  जिस कैब कंपनी में 4000 ड्राइवर काम कर रहे … विस्तार से पढ़ें

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यह तुम्हारे नयन हैं, या नयनाभिराम कोई भवन (कविता)

[ कोई बतीस कि पैतीस बरस से भी अधिक समय हो गए कविता लिखना छोड़े हुए। लगता था कि अब जीवन में कभी कविता लिखना नहीं हो पाएगा । पर आज कविता लिखना फिर से हो गया है । लगता … विस्तार से पढ़ें

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कैसे दे हंस झील के अनंत फेरे, पग-पग पर लहरें जब बांध रही छांह हों !

हिंदी गीतों का इतना बड़ा मछेरा आज के दिन तो कोई और नहीं मिलेगा ! हिंदी गीतों का ऐसा राजकुमार, ऐसा हंस दुर्लभ है बुद्धिनाथ मिश्र से मेरी पहली मुलाक़ात फैज़ाबाद के एक कवि सम्मेलन में हुई थी । तब … विस्तार से पढ़ें

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हम पत्ता, तुम ओस

दयानंद पांडेय. वो हैं पास और याद आने लगे हैं मुहब्बत के होश अब ठिकाने लगे हैं । अपने विवाह की बत्तीसवीं सालगिरह पर आज 28 जून, 2014 को खुमार बाराबंकवी के इस शेर का मर्म समझ में आने लगा … विस्तार से पढ़ें

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नेहरू…नरेन्द्र मोदी….और राहुल

संजय मिश्र ————— नरेन्द्र मोदी भव्य भारत बनाने का सपना देख और दिखा रहे हैं। उनकी तमन्ना है कि ये देश इतना ऐश्वर्यशाली बने कि वो विकसित देशों की कतार में हो और उसे नेतृत्व दे सके। देश के कोने-कोने … विस्तार से पढ़ें

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चल मां के दरबार में (कविता)

राजेश वर्मा, चल रे साथी..हाथ जोड़ ले मां के दर्शन कर ले धुल जाएंगे पाप तेरे क्यूं मोह-माया में भटके चल रे साथी…ओ साथी…… जय जगदम्बे… जय मां जय जगदम्बे… जीवन उसका तर जाता है जो कोई शरण में आया … विस्तार से पढ़ें

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1857 के महासमर के प्रथम राष्ट्रगीत के रचनाकार – अजीमुल्लाह खान

1857 के महासमर के महान राजनीतिक प्रतिनिधि और प्रथम राष्ट्रगीत के रचनाकार  उनका जीवन ब्रिटिश राज के विरुद्ध संघर्ष में बीता और उनका उद्देश्य  निसंदेह राष्ट्रीय था।  इसका सबूत अजीमुल्लाह द्वारा रचित देश के प्रथम राष्ट्र गीत में भी उपलब्ध … विस्तार से पढ़ें

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अदम गोंडवी की पांच गजलें

काजू भूनी प्लेट में, व्हिस्की गिलास में/ राम राज्य आया है विधायक निवास में, जैसे शेर लिखने वाले अदम गोंडवी वास्तव में दुष्यंत कुमार की गजल परंपरा को आगे बढ़ाने वाले शायर हैं। हांलाकि दुष्यंत की मुलायमियत अदम के यहां … विस्तार से पढ़ें

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क्या समाज में अमीरी — गरीबी दैवीय प्रतिफल है ?

आधुनिक समाज में  अमीरी की सीढियों पर लोगो को चढ़ते देखकर कोई भी समझ सकता है की यह न तो किसी दैवीय शक्ति का प्रतिफल है , न ही किसी धनाढ्य बने व्यक्ति के स्वंय के मेहनत — मशक्कत का … विस्तार से पढ़ें

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बेनी की बेलगाम बयानबाज़ी के मायने और बहाने

जैसे हिंदी फ़िल्मों से अब कहानी गुम है, वैसे ही अब राजनीति से विचार गुम हैं। सामाजिक न्याय की राजनीति ने इस विचारहीन राजनीति को और पंख दिए हैं । विचार की जगह जाति की राजनीति ने देश भर में … विस्तार से पढ़ें

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