Category Archives: ब्लागरी

“लोग भूल गये ,हिन्दी चित्रपट में चित्रगुप्त का संगीत “

–रविराज पटेल, तड़पाओगे तड़पा लो हम तड़प तड़प कर भी तुम्हारे गीत गायेंगे… (बरखा- १९५९ ) ऐसे गीतों को मर्म संगीत से चित्रगुप्त ही सजा सकते थे। चित्रगुप्त को गुजरे बहुत दिन नहीं हुए। एक वक्त मुम्बई सिने जगत में … विस्तार से पढ़ें

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रेखा : शोख हसीना के विरह गीत

पहले शोख फिर सेक्स बम से अभिनय की बढ़त बनाने वाली रेखा की शोहरत एक संजीदा अभिनेत्री के सफ़र में बदल जाएगी यह भला किसे मालूम था? सावन भादो से शुरुआत करने वाली रेखा ने जब चार दशक पहले सेल्यूलाइड … विस्तार से पढ़ें

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का हो अखिलेश, कुछ बदली उत्तर प्रदेश !

प्रिय अखिलेश जी,  आप जानते ही हैं कि हमारे देश के लोग और खास कर उत्तर प्रदेश के लोग साक्षरता से ले कर रोजगार तक में फिसड्डी हैं। विकास की बात करना तो खैर जले पर नमक छिड़कना ही हो जाता … विस्तार से पढ़ें

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राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एन.एस.डी.) में बिहार के प्रथम छात्र प्यारे मोहन सहाय

- रविराज पटेल, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एन.एस.डी.) दिल्ली की स्थापना सन 1959 ई. में संस्कृति मंत्रालय ,भारत सरकार के स्वायत्त संस्थान संगीत नाटक अकादमी द्वारा की गई .इसी वर्ष पटना के चर्चित युवा रंगकर्मी एवं डाक-तार विभाग के कर्मचारी प्यारे … विस्तार से पढ़ें

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अब तो ‘राइट’ हो जाओ लेफ्ट

नवीन पाण्डेय, नई दिल्ली यह तो अब सभी जान गए हैं कि बंगाल में बदलाव की बयार चली और ममता बनर्जी की आंधी में लेफ्ट का लाल किला भरभरा कर ढह गया। लेकिन इसके बाद सवाल उठता है कि क्या … विस्तार से पढ़ें

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सारंगी की तान छेड़ते ये गुदड़िया बाबा

दिमाग पर थोडा जोर दें तो आपको बचपन के वे दिन याद आ जायेंगे जब गुणा बाबा या गुदरिया बाबा को देखते ही आप मचल उठते थे । उससे भी पहले छुटपन में जब आप सोने में आना-कानी करते थे … विस्तार से पढ़ें

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इन गलियों में भी बसती है कला…

उत्तमा दिक्षित यह गलियां जनजातियों की बसावट वाली है। गंदी और सामान्य जन सुविधाओं के अभाव से त्रस्त इन गलियों की कला अलग पहचान है। कला और इन जनजातियों के बीच सनातन सम्बन्ध है। पुरातन कला की जब भी बात … विस्तार से पढ़ें

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रिसेशन के बाद आर्ट मार्केट में बूम

उत्तमा दीक्षित आर्ट वर्ल्ड में एक बार फिर बूम है। रिसेशन के बाद आर्ट मार्केट ने उबरने में बेशक समय लिया, लेकिन सिचुएशन ज्यादा अच्छी हो गई। गैलरीज़ में भीड़ जुट रही है और इसीलिये, रिसेशन में कदम पीछे खींचने … विस्तार से पढ़ें

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मजदूरों को चूसता हिंडाल्को व दुम हिलाते पत्रकार

शिवदास एशिया की सबसे बड़ी एल्युमीनियम उत्पादक कंपनी हिंडाल्को का कहर संविदा श्रमिकों पर निरंतर जारी है। कंपनी के जुर्म से आजीज आकर रेणकूट इकाई के हजारों मजदूर आए दिन धरना प्रदर्शन करते रहते हैं। बीती चार अक्टूबर को कंपनी … विस्तार से पढ़ें

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पत्थर की खादानों में लाश बिछाते नौकरशाही, सफेदपोश व खनन माफिया

शिव दास   गरीबी, बेरोजगारी, जिम्मेदारी और लाचारी से बेहाल विंध्य क्षेत्र के आदिवासियों की संस्कृति का अस्तित्व खतरे में है । लाल किले पर अपनी अनोखी लोकनृत्य कला “करमा”, “झूमर” आदि का लोहा मनवा चुके आदिवासियों की संस्कृति, मौत का … विस्तार से पढ़ें

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