विज्ञान की जानकारी के साथ पहुंचेगी साइंस एक्सप्रेस सोनपुर में

तेवरआनलाईन, हाजीपुर

विद्यार्थियों और युवाओं के बीच विज्ञान के प्रति उत्सुकता बढ़ाने और उनकी जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, विक्रम-ए. साराभाई सामुदायिक विज्ञान केंद्र, मैक्स प्लेंक सोसाईटी, जर्मनी और भारतीय रेल के संयुक्त प्रयास से चलायी जा रही साइंस एक्सप्रेस आगले वर्ष के फरवरी महीनें में पूर्व मध्य रेल के सोनपुर स्टेशन पर आएगी । यह प्रदर्शनी गाड़ी 04 फरवरी से 06 फरवरी, 2011 तक सोनपुर स्टेशन पर दर्शकों के लिए खड़ी रहेगी । इसका समय सुबह के 10 बजे से शाम के 5 बजे तक रखा गया है ।

साइंस एक्सप्रेस के पूरे देश में परिभ्रमण का यह चैथा चरण है । पहले चरण की शुरूआत 30 अक्टूबर, 2007 को भारत के प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह और जर्मनी की चांसलर डा. ऐंजला मरकेल द्वारा किया गया था । उसके बाद तीन चरणों में इस प्रदर्शनी गाड़ी ने पूरे भारत भर में 100 से अधिक शहरों का भ्रमण किया । इसे 35 लाख से भी अधिक लोगों जिसमें अधिकांश विद्यार्थी और युवा रहे, ने देखा और विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में हो रही प्रगति के बारे में जाना-समझा ।

साइंस एक्सप्रेस के चौथे चरण की शुरूआत 4 दिसम्बर, 2010 को गांधीनगर कैपिटल रेलवे स्टेशन से हुई । इस चरण में यह गाड़ी 56 शहरों में जाएगी । इन शहरों में आम जनता और विद्यार्थियों के लिए यह गाड़ी 3 से 5 दिन तक खड़ी रहेगी ।

इस विशेष प्रदर्शनी गाड़ी में पूर्णतया वातानुकूलित 16 डिब्बे हैं । बाहर से इसका रंग चमकीला सफेद है । इसमें 300 से ज्यादा बोर्ड और तस्वीरें लगाई गई हैं । जबकि मल्टीमीडिया के माध्यम से 150 से ज्यादा वीडियो क्लीप को दिखाने की व्यवस्था की गई है । जिससे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नए अनुसंधानों के बारे में जानकारी मिलती है । गाड़ी के 16 डिब्बों में से 13 डिब्बों में प्रदर्शनी की व्यवस्था की गयी है । अधिकांश डिब्बों की आंतरिक सज्जा मैक्स प्लेन सोसाईटी, जर्मनी द्वारा की गयी है । साइंस एक्सप्रेस के माध्यम से आम जनता और विद्यार्थियों को ब्रह्मांड का रहस्य और उसकी उत्पत्ति, अंतरिक्ष की झलक, ब्लैक होल का रहस्य, मंदाकिनी, बिग बैंग का सिद्धांत, ब्रह्मांड में हमारी पृथ्वी की अवस्थिति, पृथ्वी की संरचना, परमाणु शक्ति, जैव प्रौद्योगिकी, गुणसूत्र, मानव शरीर में जीन, जैव इंजीनियरिंग, ऊर्जा संरक्षण, आनुवांषिकी, कोशिका जीव विज्ञान, कम्प्यूटर आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है । जलवायु में हो रहे परिवर्तनों के कारण और प्रभाव पर एक पूरा डिब्बा है । इसी तरह ऊर्जा संरक्षण तथा खान-पान एवं पोषण पर जानकारी देने के लिए साइंस एक्सप्रेस के इस चरण में विशेष व्यवस्था की गई है । चतुर्थ चरण के साइंस एक्सप्रेस में पहली बार भारतीय वैज्ञानिकों और विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान पर विस्तारसे जानकारी दी गयी है ।

एक प्रदर्शनी कोच में विज्ञान के क्षेत्र में भारत के शानदार विरासत, भविष्य के कार्यक्रम, सूचना प्रौद्योगिकी में भारत की उपलब्धियाँ, भारत का अंतरिक्ष अभियान, नैनो टेक्नोलाजी, बायोटेक आदि के बारे में जानकारी दी गई है । विक्रम-ए. साराभाई सामुदायिक विज्ञान केंद्र द्वारा एक कोच में ज्वाय आफ साइंस लैब चलाया जा रहा है जिसमें विद्यार्थियों को भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान और गणित से जुड़े मामलों पर प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है । इस लैब में छात्रों को समूह में प्रवेश की अनुमति दी जाती है । यह मुख्यतः कक्षा 9 या उपर की कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए है । प्रदर्शनी को देखने के लिए किसी प्रकार का शुल्क देय नहीं है । लेकिन साइंस एक्सप्रेस में मोबाईल, कैमरा, बैग, माचिस, सिगरेट, बीड़ी, तम्बाकु, पानी के बोतल, पिन या चाकू के साथ प्रवेश की अनुमति नहीं होगी ।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
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