बिहार दिवस के बीच तार-तार होती नीतू की इज्जत

बलात्कार में असफल होने पर जिंदा जलाने की कोशिश

बिहार  दिवस के मौके पर बिहारी अस्मिता की बात धूम धड़ाके के साथ हो रही है। सारे सरकारी विभाग समारोहों में व्यस्त हैं। विधान परिषद व सचिवालय सहित लगभग सभी सरकारी बिल्डिंगों को दुल्हन की तरह सजाया गया है। पटना का गांधी मैदान मुख्य केंद्र बना हुआ है। बिहार से निकलने वाले तमाम अखबार सरकारी विज्ञापनों से पटे पड़े हैं। इन अखबारों को पढ़ कर यही लगता है कि बिहार जाग चुका है, प्रगति के पथ पर कदम बढ़ा चुका है, आगे जो कुछ भी बेहतर ही होगा। लेकिन क्या वाकई बिहार में सबकुछ बेहतर हो रहा है?

बेगूसराय के लोहिया नगर थाने की रहने वाली नीतू देवी के साथ जो कुछ हुआ उसे देखते हुये कहा जा सकता है कि बिहार में सबकुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है। नीतू देवी एक प्राईवेट स्कूल में शिक्षिका है। होली के दिन कुछ लोगों ने उसके साथ बलात्कर करने की कोशिश की। नीतू ने अपनी पूरी शक्ति के साथ इसका विरोध किया। उसके विरोध से बौखलाये बदशामों ने उसके शरीर पर किरासन तेल छिड़कर आग लगा दी। उसे जिंदा जलाकर मारने की कोशिश की गई। इधर बिहार के सारे राजनीतिज्ञ और अधिकारी बिहार दिवस मनाने में मशगूल हैं और उधर नीतू देवी एक नर्सिंग होम में मौत से जूझ रही है।

नीतीश सरकार महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के दावे बढ़चढ़ कर रही है, लेकिन हकीकत कुछ और है। बिहार में आज भी अपराध का  ग्राफ कम नहीं हुआ है। नीतीश कुमार और उनकी मंडली जोर शोर से सुशासन-सुशासन चिल्ला रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर चिथड़े उड़ रहे हैं। कम से कम नीतू देवी के साथ जो कुछ हुआ उसे देखते हुये यही कहा जा सकता है।

बिहार घोर बिजली संकट के दौर से गुजर रहा है। एक भी विधायक ऐसा नहीं है जिसके क्षेत्र के लोग बिजली की कमी से नहीं जूझ रहे हैं। ऐसे में बिहार के तमाम सरकारी बिल्डिंगों को बिजली-बत्ती से सजाने का तुक किसी को समझ में नहीं आ रहा है। नीतीश कुमार सुशासन को चमकाने के लिए बेवजह बिजली फूंक रहे हैं और लोगों में यह भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं कि इससे बिहार का विकास तेजी से होगा।

होली के एक दिन पहले बेगूसराय के गढ़हरा ओपी थाने के आशिफपुर मुहल्ले में एक 14 वर्षीय छात्रा के साथ एक व्यक्ति ने बलात्कार किया। इस बात को लेकर स्थानीय लोगों ने काफी हो हंगामा किया। बिहार में इस तरह की घटनाएं लगातार हो रही है, फर्क सिर्फ इतना है कि अब इन घटनाओं को अखबारों के पहले पन्ने पर स्थान नहीं मिलता है। मिले भी तो कैसे, अखबारों का पहला पन्ना तो सरकारी विज्ञापनों से भरा रहता है। यहां तक कि अब संपादक लोग भी पहले पन्ने पर नीतीश कुमार की जय-जयकारी करते हैं।

खैर नीतू देवी की इज्जत लुटती है तो लुट जाये, बिहार दिवस के अव सर पर बिल गेट्स जैसे लोग पटना आ रहे हैं। चमकते बिहार का गुणगान करने के लिए और भी कई लोग यहां आ रहे हैं। ऐसे में नीतू देवी की इज्ज्त कोई मायने नहीं रखती है। बिहार दिवस के मौके पर हम चमकते बिहार की बात करें, सुशासन की बात करें, शांति और समृद्धि की बात करें और गर्व से कहें हम बिहारी है। नीतीश कुमार चाहते हैं कि राज्य में कोई भूखा नहीं रहे। सत्ता के शिखर पर पहुंच कर नीतीश कुमार शायद भूल गये हैं कि बिहारियों के लिए रोटी से भी बड़ी उनकी मां बहनों की इज्जत है।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
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One Response to बिहार दिवस के बीच तार-तार होती नीतू की इज्जत

  1. चंदन says:

    नीतीश से चालबाज मुख्यमंत्री शायद अभी तक नहीं हुआ है। अपनी छवि बनाने के लिए जिसे किसी चीज का खयाल ही नहीं हो उसे मुख्यमंत्री तो क्या होटल में नौकर का भी काम नहीं मिलना चाहिए। अब अगर कोई कहे कि कि ये घटनाएं नीतीश को मालूम नहीं तो सोच लीजिए कि क्या कहा जाए।

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