सुशासन बाबू से गरीबन की गुहार

बिहार में दूसरी पारी खेल रहे सुशासन बाबू के राज्य में में कुशासन का दौर जारी है। समस्तीपुर जिले के रहने वाले गरीबन दास ने 2009 में ही सुशासन बाबू के जनता दरबार में इंदिरा अवास योजनाओं में जारी धांधली की जांच करने की गुहार लगाई थी। सुशासन बाबू ने जांच का आदेश तो दे दिया था लेकिन संबंधित अधिकारियों ने मामला को लंबे समय तक दबाये रखा। इतना ही नहीं यह खबर मुखिया तक भी पहुंचा दी। मुखिया ने गरीबन दास की पिटाई भी करवा दी और लगातार यह धमकी देता रहा कि उसका कुछ नहीं हो सकता है। यहां तक अधिकारी लोग भी बार-बार गरीबन दास को धमकाते रहे। गरीबन दास आज भी हारा नहीं है। न्याय के लिए वह आज भी लड़ रहा है। इसी संदर्भ में उसने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक पत्र भी लिखा है, जो नीचे पेश है।      

 सेवा में,

माननीय मुख्यमंत्री महोदय

बिहार सरकार, पटना

विषय- प्रक्षेत्रीय पुलिस अधीक्षक निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, मुजफ्फरपुर कार्यालय के जांच में लापरवाही के संबंध में

महाशय,

मैं गरीबन दास पुत्र स्वर्गीय जनक दास, ग्राम खुनआ, पोस्ट –वाजिदपुर, जिला समस्तीपुर का रहने वाला हूं। मैं आपके जनता दरबार में 20.11.2009 को पहली बार इंदिरा आवास जांच के संबंध में आवेदन दिया था, और इस आवेदन को आपके द्वारा अन्वेषण ब्यूरो निगरानी विभाग, पटना के बिनोद बाबू को जांच के लिए दिया गया। एक महीने बाद जब मैंने बिनोद बाबू से पूछा कि जांच की कार्रवाई का क्या हुआ, तो उन्होंने कहा कि आपका फाईल गायब हो गया है। आप साक्ष्य के लिए फिर से हमे जनता दरबार से मिला हुआ पेपर दें। हमने साक्ष्य के लिए बिनोद बाबू को सारे पेपर दे दिया और उन्होंने जांच करने के बजाय वे सारे पेपर मुखिया प्रेम शंकर की चहेते बिजेंद्र पासवान को दे दिया। इंदिरा आवास का पैसा लेने के बावजूद बिजेन्द्र पासवान ने अपना घर नहीं बनवाया है। पेपर मिलने के बाद उन्होंने मेरे साथ मारपीट की और यह कहा कि तुने मेरे खिलाफ मुख्यमंत्री के यहां आवेदन क्यों किया है। तुम इसी तरह मार खाते रहोगे। इसके बाद मैं विद्यापतिनगर थाना में मामला दर्ज कराने गया, लेकिन मुखिया प्रेम शंकर के कहने पर थानेदार ने मामला दर्ज नहीं किया।

इसके बाद पटना से जांच हेतु मुजफ्फरपुर अन्वेषण ब्यूरो को आदेश दिया गया। मुजफ्फरपुर से मेरे यहां आवेदन भेजा गया, जिसमें फिर साक्ष्य के लिए पेपर मांगे गये। जब मैं सारे पेपर मुजफ्फरपुर गया तो सुशील कुमार जी ने कहा –आप बीडीओ का मोबाईल नंबर दिजीये, पंचायत सचिव और मुखिया का मोबाईल नंबर दिजीये उसके बाद मैं जांच का काम शुरु करुंगा। उन्होंने यहां तक कहा कि आप इस तरह मुख्यमंत्री को आवेदन क्यों देते हैं। इससे आपको क्या लेना देना है। आपको अपना काम करना चाहिये। इससे यह स्पष्ट होता है कि बिहार को आपने विकसित राज्य बनाने का जो सपना संजोया है उसे ये भ्रष्टाचारी पूरा नहीं होने देंगे।

अत:श्रीमान से नम्र निवेदन है कि आप अपने स्तर से एक जांच कमेटी का गठन कर हमें न्याय दिलाने की कृपा करें। इसके लिए मैं श्रीमान का सदा आभारी रहूंगा

आपका विश्वासी

गरीबन दास

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
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One Response to सुशासन बाबू से गरीबन की गुहार

  1. shivanshu shivesh says:

    Just publishing this letter and your small article on the same will not work at all. people are very less bothered to have a concern for such issues. being the editor you should use this platform in a better way, so that it can put some bigger impact on concerned officials and common people.

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