खुशबू मुख्यमंत्री दरबार में क्यों रो रही थी ?” बच्चों की अदालत ने आनंद से पूछा

सुपर-30 के 30 छात्रों का नाम पता क्या है जिन्हें मुफ्त में शिक्षा-भोजन-आवास की सुविधा आप देते हैं ? कोचिंग स्कैम के विरुद्ध बच्चों ने एक जन अदालत लगाकर आईआईटी में सफलता पाने के नाम पर कोचिंगों के रूप में बच्चों से की जा रही धोखाधड़ी के खिलाफ आवाज उठाई है। पटना के चिल्ड्रेन पार्क में आयोजित इस जन अदालत में बच्चों ने आनंद से पूछा है कि खुश्बू मुख्यमंत्री दरबार में क्यों रो रही थी ? एक बच्चे से कुल कितने रूपये फीस ली जाती है।

कोचिंगो की लूट से अब बच्चों की आंखे खुल चुकी है, अभिभावक भी इस लूट को समझने लगे हैं। बाकी बच्चों और अभिभावकों की आंखे खोलने के लिए यहां पर स्टूडेंट्स आक्सीजन मूवमेंट चलाया जा रहा है। कोचिंग जगत को पारदर्शी बनाने की मांग करने लगे हैं बच्चे, ताकि तोल-मोल कर कदम बढ़ाये। कोचिंगों के चक्कर में उनके पैसे भी जाते हैं और साल भी बर्बाद होते हैं।

इस मौके पर आक्सीजन मूवमेंट के समन्यवयक मुकेश रंजन ने कहा कि अपने स्वार्थ के लिए बच्चों का दुरुपयोग करना बंद करें। धन कमाने और व्यवसाय के लिए बच्चों को ही हथकंडा क्यों बनाया जा रहा है ?

देवोप्रिया दत्ता ने कहा कि शिक्षा को माध्यम बनाकर अपने फायदे के लिए इसका बेजा इस्तेमाल करने वालों को समाज बेनकाब करे। नहीं तो हमारी शिक्षा व्यवस्था धराशाई हो जाएगी। सुवम अनुराग ने सवाल उठाया कि कोचिंग संस्थाएं बच्चों का पैसे की भरपाई तो कर सकती है पर क्या वे उनका बहुमूल्य समय लौटा सकती है? जुनैद हुसैन ने कहा कि भ्रष्टाचार कोचिंग संस्थानों में भी घर कर चुकी है और बच्चों को सब्जबाग दिखाकर उनका मानसिक और आर्थिक शोषण किया जा रहा है।

प्रवेश परीक्षाओं को रिजल्टों को खूब तान तान कर दिखाया जाता है, शहर के लगभग तमाम मेनस्ट्रीम के अखबार परिक्षाओं के रिजल्टों से भरे रहते हैं, इसके अलावा रुटीन विज्ञापन और रुटीन खबरें तो एक साथ घालमेल कर समाचार माध्यमों में बहते रहती हैं। रिजल्टों को युद्ध स्तर पर प्रसारित करने की होड़ पर सवाल उठाते हुये प्राची ने कहा कि प्रवेश परीक्षाओं में असफलता का प्रतिशत बहुत ही कम होता है, जिसे बढ़ाचढ़ाकर पेश किया जाता है। लिस्ट सार्वजनिक होने से सच्चाई  पर से पर्दा उठ सकेगा।

बिहार में शिक्षा को अहम मुद्दा बनाने की बात उठने लगी है। शिक्षा का आर्थिकीकरण पिछले दो दशक से भंयकर रुप से जारी है, अब तो महामारी का रूप ले लिया है। नीचले स्तर से लेकर ऊंचे स्तर की शिक्षा पर आर्धिक गिद्धों का कब्जा हो चुका है, और बिहार के बच्चों को नोच नोच कर खा रहे हैं, साथ में अभिभावकों को भी। ग्रामीण इलाकों के छात्र तो बहुत बड़ी संख्या में इनका शिकार बन रहे हैं, शहर की चमक दमक और आईआईटी में दाखिले का सपना उन्हें सहजता से आर्थिक गिद्दों का निवाला बना रहे हैं।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
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2 Responses to खुशबू मुख्यमंत्री दरबार में क्यों रो रही थी ?” बच्चों की अदालत ने आनंद से पूछा

  1. anand ko kisne sar par chadhaya…..jahir hai bihar ke patrakaron ne….yaad kariye patna ke us patrakar ko jo baadh raahat me loot macha rahaa thaa aur udhar time magazine uska foto apni cover par le rahaa thaa…..yahi haal anand aur super30 ka hai…..sharm se bheeng jaataa hoon jab patrakaar anand ko vidwaan kahte hain……agar anand jaise log hee scholar kahlaaenge bihar men to fir is raajya kaa iswar hee maalik……is pradesh men riyaayat de kar sarkari aur kai gair sarkaari sansthaen vanchiton ko koching dete hain lekin patna ke patrakaaron kaa ek khaas varg anand ko mahaan banane men juta hai…..anand ke saath saath un patrakaaron kee pol kholee jaanee chahiye…..

  2. correction——kripa kar upar dee gai pratikriya men doosre line men patrakaar kee jagah -dm goswami- padhen
    sanjay mishra

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