अमेरिकियों के किलिंग स्प्रीट से भारत कुछ सीखेगा?

अमेरिकियों के किलिंग स्प्रीट की दाद देने होगी, अपने दुश्मन को मौत के घाट तक उतारने के लिए किसी भी सीमा तक ये जा सकते हैं। पाकिस्तान के संप्रुभता की धज्जिया उड़ाते हुये एबोटाबाद में अमेरिकी सैनिकों ने आपरेशन कर के लादेन का सफाया कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा व्हाइ हाउस में अपनी टीम के साथ बैठकर इस आपरेशन का नेतृत्व करते रहे, और फिर लादेने के खात्मे के बाद तमाम अमेरिकियों को यह संदेश देने में भी देरी नहीं किया कि लादेन मारा गया। इसके बाद अमेरिका में उत्साह  और जश्न का माहौल बनता गया है और बड़ी संख्या में अमेरिकी सड़कों पर उतर कर “यूएसए, यूएसए” चिल्लाते रहे। दुश्मन को लंबे समय तक दौड़ाकर थकाते हुये मार गिराने की नीति कामयाब रही। क्या भारत के नीति निर्धारक अमेरिका से कुछ सीखेंगे?

भारत को न तो ठीक से दोस्ती निभानी आती है और न ही दुश्मनी। कुटनीतिक बयानबाजियां करने में ये जरूर आगे होते हैं। एक के बाद एक भारत पर लगातार आतंकी हमले होते रहे हैं। यहां तक कि सीमा पार से कारगिल चोटियों पर भी कब्जा करने की कोशिश की गई। इन चोटियों को बचाये रखने में बड़ी संख्या में भारतीय सैनिक शहीद भी हुये। फिर भी भारत आतंकवाद के खिलाफ कोई ठोस रणनीति आज तक नहीं बना। आज भी वह पाकिस्तान सरकार को उन आतंकियों की सूची देकर ही संतोष कर लेता है जो भारत में कई खतरनाक वारदातों को अंजाम दे चुके हैं। बदले में पाकिस्तान भी एक सूची थमा देता है।

लादेन मारा गया है इसका मतलब यह कतई नहीं है कि भारत को आतंकवाद से राहत मिल गया है। वैसे भी लादेन के एजेंडे में भारत पहले भी नहीं था। लेकिन ये भी सच है कि पाकिस्तान में स्थित कई आतंकवादी संगठन आज भी भारत के खिलाफ जेहाद छेड़े हुये हैं। आज भी पाकिस्तान स्थित ट्रैनिंग कैंपों में ऐसे जेहादी तैयार किये जा रहे हैं जिनका इस्तेमाल भारत में होना है। लादेन के मारे जाने से इन कैंपों में तैयार किये जा रहे जेहादियों पर कोई खास असर पड़ेगा कह पाना मुश्किल है। इसके इतर संभावना ये है कि आने वाले दिनों में भारत में और आतंकी हमले हो सकते हैं। लादेन के मारे जाने के बाद अपने वजूद को मजबूती से दिखाने के लिए ऐसा होना स्वाभाविक है। अमेरिका भी इस तरह के संभावित हमलों के प्रति सतर्क है।

अपने को सुरक्षित रखने का सबसे बेहतर तरीका है आक्रमण। ट्वीन टावर पर हमला के बाद अमेरिका ने जो मुहिम छेड़ा था वो लगभग पूरा हो चुका है। अफगानिस्तान में तालिबानियों को पूरी तरह से कुचल दिया गया है, साथ ही इराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को गिरफ्तारी के बाद डेमोक्रेटिक तरीके से दूसरी दुनिया में भेज दिया गया है, और अब लादेन को भी मारकर समुद्र में फेंक दिया गया। बदला लेना कोई अमेरिका से सीखे। बदला लेने के लिए सबसे बड़ी चीज होती नहीं भूलना। भारत एक के बाद एक तमाम आतंकी घटनाओं को भूलता चला गया। चाहे रुबिया का अपहरण हो, या फिर कंधार प्लेन हाइजेकिंग या फिर संसद पर हमला या मुंबई विस्फोट और मुंबई पर हमला, भारतीयों के जेहन में ये सारी घटनायें धुंधली पड़ गई है। भारत में किसी तरह के आतंकी घटना घटने के बाद यहां के लोगों के खून में थोड़ी देर के लिए उबाल तो आता है, लेकिन जल्द ही ठंडा भी हो जाता है। लादेन प्रकरण को ध्यान में रखते हुये भारतीयों को एक चीज सीखने की जरूरत है, और वो है बदला। दाउद इब्राहिम आज भी पाकिस्तान में मजे में रहा है। क्या भारत दाउद के खिलाफ अमेरिकियों जैसी कोई कार्रवाई करने की स्थिति में है ? इस प्रश्न का उत्तर न में ही मिलेगा। और यह उत्तर निसंदेह निराश करने वाला है।               

This entry was posted in पहला पन्ना. Bookmark the permalink.

3 Responses to अमेरिकियों के किलिंग स्प्रीट से भारत कुछ सीखेगा?

  1. आतंकवाद अमेरिका ने खुद शुरु किया था न कि लादेन ने। आखिर क्या वजह है कि मैं किसी का घर तोड़ूंगा? जाहिर है पहले आपने कुछ किया होगा। लादेन नहीं अमेरिका खलनायक है। लादेन को नष्ट करने की बात से अमेरिका अपने को साफ-सुथरा बनाने की चाल चल रहा है। वैसे भी नोबेल के शान्ति पुरस्कार से सम्मानित ओबामा और ओसामा में कोई फरक नहीं अगर दोनों ही दुश्मन को मारने से इतने खुश होते हैं।

    गांधी जी की बात और शान्ति और अहिंसा जैसी बात करने वाले ओबामा का यही असली चेहरा है। वैसे आप लादेन को खलनायक मत बनाइए क्योंकि वो आतंकवादी तो था ही लेकिन सबसे बड़ा आतंकवादी अमेरिका अभी भी आतंकवाद- आर्थिक आतंकवाद, राजनैतिक आतंकवाद, सामरिक आतंकवाद और सांस्कृतिक आतंकवाद फैला रहा है।

  2. Chikku says:

    What america did is totally correct. It’s a message ” TUM HAMARE GHAR ME GHUSOGE USKE BAD TUM JAHAN KAHIN BHI HO, HUM WAHAN GHUS KAR MARENGE” india must learn from this.

  3. ashim shekhar says:

    This is the reason why american are called international police.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>