कलम चलाता रहता है एक लेखक (कविता)

 

कलम चलाता रहता है एक लेखक

सोता रहता है विचारों में

कहता है, दुनिया में एक बड़ा बदलाव आएगा।

लिखते-लिखते बाल सफेद हो रहे हैं

विद्रोही प्रवृति दब रही है,

हर तरफ पत्नी की चिल्लाहट है।

लेखक अपने विचारों को ले कर

अखबारों के दफ्तर पर खड़े दरबानों से उलझता है,

संपादक से तू-तू, मैं-मैं करता है

अपने विचारों की पोटली को सुदामा की तरह ढो रहा है

फिर लिखता है, दुनिया में एक महान परिवर्तन आएगा।

कुछ दूर आगे चल कर उसके चप्पल टूट जाते हैं,

 हाथ में ले कर मोची की तलाश में भटकता है,

बस के इंतजार में खड़ा,

फिर चढ़ने के लिए धक्का खाता, घर पहुंचता है

गर्मी की तपिश से सुखा चेहरा लिए

  यह सुनने के लिए पत्नी के सामने है

- हां, बहुत थक गए हो,

इतनी कमाई कर के जो आ रहे हो

रात में वह फिर लिख रहा है, दुनिया में एक बड़ा बदलाव आएगा…… 

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4 Responses to कलम चलाता रहता है एक लेखक (कविता)

  1. radhey says:

    wah……………….. kya bat hai

  2. chotay says:

    मैं भी एक लेखक हूं और मैं भी लिखता ही रहता हूं।

  3. Anjali says:

    लेखक की बिल्कुल सही तस्वीर…

  4. vinay kumar says:

    Are you talking about P. B Shelly or his ilk?
    “If winter has come; can spring be far behind” like thing. The pen- warrior(poet) cannot live in the real material world if he has to build some thing new, something fresh. The calm of matrimonial home does not provide the manure ground for thinking. The turmoil and other perspective of his wife provide the nectar which gets the wordly avatar and become poem.
    The noble has always died for want of sublime.

    vinay

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