तम्बाकू सेवनः मौत को गले लगाती जिन्दगी

प्रत्येक वर्ष पूरे विश्व में लगभग 35 लाख लोग  तम्बाकू सेवन से मरते हैं। तम्बाकू से प्रतिदिन होने वाली मौतें भी लगभग 10,000 हैं। ऐसा मानना है कि विकासशील देशों में तम्बाकू से सर्वाधिक मौतें (पूरे विश्व का लगभग 20%) होती हैं। व्यक्ति तम्बाकू से होने वाली खतरनाक बीमारियों से भली भांति परिचित होते हुये भी किसी न किसी रुप में इसका शिकार होता है। आज तम्बाकू का सेवन विभिन्न रुपों में होता है। धुंआ रहित तम्बाकू मसलन सुंघनी और खाने वाले तम्बाकू का सेवन मुंह के कैंसर और ह्रदय रोग का प्रमुख कारण बनता है।

धुम्रपान जो उच्च तबके के लोगों की प्रमुख पहचान मानी जाती है। इसमें धुम्रपान करने वाला धुएं के साथ कैंसरजन और विषाक्त तत्वों को अपने शरीर में भीतर ले जाता है। इस प्रक्रिया से खांसी जुकाम और सांस लेने की नली में गंभीर संक्रमण पैदा हो जाता है। गर्भवती स्त्रियों को तो धुम्रपान से अत्यधिक परहेज की आवश्यकता है। धुम्रपान करने वाली महिलाओं में धुएं की वजह से गर्भस्थ शिशु की मृत्यु की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है।

आज तम्बाकू सेवन में हमारा भारत भी पीछे नहीं है। तम्बाकू से प्रत्येक वर्ष अकेले भारत में आठ लाख लोग असमय मौत के मुंह में जा रहे हैं। अनेक सर्वे रिपोर्टों के आधार पर विशेषज्ञों का यह मानना है कि विश्व में सबसे अधिक मुंह के कैंसर के मामले भारत में होते हैं। आज देश में हर छोटे बड़े कस्बे में , नुक्कड़-चौराहों पर एक गुमटी (तम्बाकू , सिगरेट , गुटखे इत्यादि की दुकान ) मिल जाती है जहां धड़ल्ले से इन सारे सामानों का प्रचार-प्रसार तथा क्रय-विक्रय किया जाता है। इन जानलेवा प्रसाधनों की चपेट में आये छोटे-छोटे बच्चों (10 से 12 वर्ष) को विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर आसानी से देखा जा सकता है।

        यदि तम्बाकू से होने वाली बीमारियों से लोगों को सूक्षमता पूर्वक परिचित कराया जाये , धुम्रपान छोड़ने से होने वाले फायदे गिनवाये जाये  मसलन-

*धुम्रपान छोड़ने से हृदय रोग का खतरा 50% तक कम हो जाता है।

*फेफड़े के कैंसर , पुराने अवरोधक और हृदयाघात का खतरा अपेक्षाकृत घट जाता है।

*धुम्रपान छोड़ने से स्वास्थ को लाभ होता है, चाहे इसे किसी भी उम्र में इसे छोड़ा जाये।

 तो शायद प्रत्येक तम्बाकू सेवन करने वाला अपने और समाज के लिये कुछ सोचने एवं करने के लिये विवश हो जाये ।

आज तम्बाकू से होने वाली तमाम घातक बीमारियों की जानकारी के वावजूद विभिन्न सिगरेट कम्पनियां आकर्षक पैकेटों में अपने उत्पाद लोगों तक पहुचाती हैं, तथा लोग धड़ल्ले से इनका इस्तेमाल करते हैं। विभिन्न चेतावनियों का कितना असर लोगों पर होता है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि आज विश्व भर में लगभग 1 अरब से भी उपर धुम्रपानकर्ता हैं। तम्बाकू निषेध के विभिन्न तरीकों के वावजूद 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की लगभग एक तिहाई जनसंख्या धुम्रपान करती है जिनमें 47% पुरुष और 12% महिलायें हैं।

   सर्वेक्षकों का मानना है कि 2020 तक एच.आई.वी, तपेदिक, प्रसव के दौरान, वाहन दुर्घटना, आत्महत्या अथवा हत्या के कारण होने वाली  मृत्यु की तुलना में तम्बाकू से सर्वाधिक मौतें होंगी। एक ऐसे समाज के निर्माण की जरुरत है जहां धुम्रपान न करना सामान्य सामाजिक आचरण माना जाये तथा ऐसी व्यवस्था हो जिसमें लोग स्वयं आगे बढ़कर इस भयंकर त्रासदी से बाहर निकलने का मार्ग बतायें। आत्मविश्वास, दृढ़ निश्चय और सही दिशा ही लोगों का हथियार बन सकती है।

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2 Responses to तम्बाकू सेवनः मौत को गले लगाती जिन्दगी

  1. Anand kumar jha says:

    nice comment on smoker and to-bacco users……..this message must go the younger people

  2. M A HUSSAIN says:

    anita jee namaste
    aap ne jo baat aaj tobacco day par logoon ke saamne rakhi woh jan hitaaye men kafi kaam ki hain main aap ke is vishesh din par aap ke is vishesh lekh ki sarahna karta hun aaur ummid karta hun ki lag aap ki baaton ko samajhne ki koshish karen
    dhanyawad

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