जितना लूटना है लूटो, लेकिन शांति से

आखिर भ्रष्टाचार क्या है? भ्रष्टाचारी कौन है? आखिर भारत भ्रष्ट कैसे हो गया? अब तक भ्रष्टाचार पर राजनीति क्यों नहीं हुई? देश में किस किस तरीके का भ्रष्टाचार है? भ्रष्टाचार की पीड़ा वास्तव में कौन लोग झेल रहे हैं? भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चे का नेतृत्व कर रहे लोगों की मंसा क्या है? किस तरीके का नेता ये हैं? ये समाज सेवा है या योग सेवा? लोकपाल की खिचड़ी पका कर जनता को क्या मिलना है और देश पर कुंडली मार कर बैठे नेताओं के वर्ग का क्या होगा? कितने सवाल हैं, कितने संशय हैं लेकिन देश चल रहा है।
निठारी पर राजनीति हुई, मुलायम की सरकार उखर गई। माया का साम्राज्य छा गया। शिंगुर पर राजनीति हुई, ममतामई हो गया पश्चिम बंगाल। लेकिन इस बदलाव के लिए एक शर्त यह है कि राजनीति करनी आनी चाहिए। माया और ममता को राजनीतिक रास्तों की समझ थी, परिवर्तन संभव हो पाया। रामदेव बाबा और अन्ना हजारे किस रास्ते पर हिल-डुल रहे हैं यह किसी को पता ही नहीं चल रहा। अरबों- खरबों की संपत्ति रख कर बाबा काला धन पर आंदोलन कर रहे हैं। अन्ना लोकपाल पर समाज सेवा कर रहे हैं, राजनीतिज्ञों के दर पर दस्तक दे रहे हैं। खुद इनको नहीं पता कि लोकपाल का स्वरुप क्या होगा. बस अपनी भी गाड़ी चल रही है कहीं न कहीं तो पहुंचेगी ही।
भ्रष्टाचार का सबसे विभत्स रुप तो परिवारवाद में छुपा हुआ है जिसे कोई देखने को तैयार नहीं है। वकालत , राजनीति , फिल्म-उधोग सब परिवार की विरासत बनी हुई हैं। जनता तो बस टुक टुक निहार रही है। नेता को क्या पड़ा है, बस वोट का जुगाड़ होना चाहिए चाहे जैसे हो। इस परिस्थिति में कांगेस और भाजपा दोनो रात में गले मिल रहे हैं। इनकी चांदी कट रही है। भाजपा को न बाबा से मतलब है, न अन्ना से। कुछ भी हो उसका राजनीतिक फायदा तो मिलेगा ही। बाबा के समर्थक रामलीला मैदान में पुलिस बर्बरता के शिकार बनाए जा रहे थे और अगले दिन सुषमा स्वराज और भाजपा के अन्य बड़े नेता गांधीजी की समाधी पर नाच रहे थे। लोगो को पीटा जा रहा है और आप कहते हो कि राष्ट्रभक्ति के गाने पर हम नाच रहे हैं। वास्तव में ये मुनाफे के राजनीतिक समीकरण पर नाच रहे थे।
कांग्रेस को पता है कि देश में कुछ भी उथल-पुथल हो जाए एक ही बात कहनी है कि सब के पीछे आर एस एस है, उसका वोट बैंक बचा रहेगा। एक जमाने में इसी घमंड से लालू चूड़ थे। कुछ लोग कहते मिलेंगे कि कांग्रेस को पता है कि सत्ता कैसे चलाई जाती है। अन्ना कहते हैं कि कांग्रेस ने उनको ठगा है, उधर बाबा के उपवास को कांग्रेस ने प्रायोजित करार दे दिया और सब कुछ तय तरीके से चलते हुए खत्म भी हो गया लेकिन कांगेस ने जैसे ही इस चीज को जारी किया बाबा बिदक गए और बाकी तमाशा तो देश की जनता देखती ही रह गई। इन चीजों को देख कर तो यह लगता है कि कांग्रेस शासन करना जानती है।
एक महान संदेश कांग्रेस दे रही है कि बाबा बनना है और पैसा कमाना है तो कमाते रहो। अगर कांग्रेस से पंगा लिया तो सीबीआई से ले कर इनकम टैक्स के घेरे मजबूत हो जाएंगे। इसका सीधा मतलब है कि जितना लूटना है लूटो, लेकिन शांति से। कौन सी व्यवस्था है देश की जिसमें बाबा की कमाई का पहले जांच-पड़ताल नहीं होता और आपके विरुध जैसे ही आवाज उठी कि जांच शुरु। वाह रे देश का कानून और व्यवस्था। दग्विजय सिंह कहते हैं कि अगर हम बाबा से डरते तो उनको जेल में नहीं डाल देते। अंधेर नगरी चौपट राजा , टके ,सेर भाजी टके सेर खाजा।
आम जनता का सीधा संपर्क नीचले स्तर के भ्रष्टाचार से हो रहा है। सरकारी दफ्तर के कलर्क और किरानी पैसे मांग रहे हैं। जमीन रजिस्ट्री के दफ्तर में पैसे की गंगा बह रही है। मैरेज रजिस्ट्रेशन के दफ्तर में पैसा चल रहा है। अदालती प्रकीया में पैसा बोलता है। पुलिस थानों में पैसे की भाषा चलती है। आम जनता भ्रष्टाचार के इसी रुप से सीधा सामना कर रही है जिसे उपरी वर्ग का व्यक्ति और नेता देखने को तैयार नहीं है। इसके लिए कोर्ट में विशेष आदालत बना दिया गया है, बाकी काम उसी दस्तुर से जारी है। लोग समझ ही नहीं पा रहे हैं कि लोकपाल बड़े-बड़े घोटालों और घपलों को रोकेगा या लोगों को आम जीवन के भ्रष्टाचार से मुक्ति देगा। कोई स्पष्ट जबाव कहीं से मिल ही नहीं रहा सिर्फ बड़ी – बड़ी बातें की जा रही हैं।
किसी दल का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम चलाने वाले क्या कह रहे हैं यह उन्हीं को पता है। इसलिए दिग्विजय सिंह कहते हैं कि ये क्या मांग कर रहे हैं, यह इनको नहीं मालूम। तभी तो कांग्रेस आराम से इनको बहला फुसला रही है और समय- समय पर ठोक –बजा भी दे रही है।
अभी भ्रष्टाचार के स्वरुप को स्पष्ट तरीके से चित्रित करने की जरुरत है और जनता को यह बताने की जरुरत है कि भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से क्या-क्या सहज बदलाव आएंगे और क्यों एक मजबूत लोकपाल की लड़ाई जन स्तर पर लड़ी जानी चाहिए।

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3 Responses to जितना लूटना है लूटो, लेकिन शांति से

  1. भ्रष्टाचार का मुद्दा अब खत्म हो गया है। सब नौटंकी कर रहे हैं। किसी दे कोई उम्मीद नहीं की जा सकती। बाबा, अन्ना, भाजपा, कांग्रेस, संघ, लालू, नीतीश, ममता सब के सब लोगों को भ्रमित कर रहे हैं।

  2. Radhey says:

    Good analysis

  3. Anjali says:

    जनता तो बेबस है करे भी तो क्या शिवाय देखने के ।

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