बाल अपराधियों का शिकारगाह बना जुहू चौपाटी

तेवरआनलाइन, मुंबई ब्यूरो

मुंबई के जुहू तट और उसके इर्दगिर्द के इलाके में बाल अपराधियों का एक खतरनाक गिरोह सुनियोजित तरीके से वहां आने वाले लोगों को अपना शिकार बना रहा है। इनके निशाने पर मुख्य रूप से विदेशी पर्यटक और महिलाएं हैं। इस गिरोह में 20-25 लड़के हैं, जो अलग-अलग टोलियों में बंटकर पहले शिकार को चिन्हित करते हैं, फिर मौका मिलते ही उनके कीमती सामानों पर हाथ साफ कर देते हैं। स्थानीय पुलिस भी इस गिरोह की उपस्थिति को सिद्दत से महसूस कर रही है, लेकिन गिरोह में सक्रिय लड़कों पर हाथ डालने से परहेज कर रही है। यदि स्थानीय दुकानदारों की माने तो पुलिस वालों को इन लड़कों को फ्री हैंड देने के एवज में एक बंधी बधाई रकम मिल जाती है। यही कारण है कि आमदनी के इस जरिये को ये नष्ट करना नहीं चाहते हैं।

जुहू का समुद्री तट दूर तक फैला है और यहां पर लोग दूर-दूर से समुद्री लहरों से अटखेलियां करने लिए आते हैं। शाम ढलते ही लैंप पोस्ट की पीली रोशनी समुद्र तट को अपने आगोश में समेट लेती है, और इठलाती लहरें लोगों को  रुमानियत अहसास कराती है। शातिर बाल अपराधियों का गिरोह शाम ढलने के पहले ही अपने शिकार की तलाश कर लेता है और उनके पीछ लग जाता है। अपने शिकार की तलाश के दौरान इस गिरोह के बच्चे इस बात का खास ध्यान रखते हैं कि शिकार के पास अधिक से अधिक कीमती सामान हो। इनकी नजरें कैमरे, घड़ी, पर्स, मोबाइल फोन आदि पर होती हैं। विदेशी पर्यटकों को ये बच्चे विशेष तरजीह देते हैं और उनको पटाने के लिए गांजा, अफीम और स्मैक आदि नशे का प्रलोभन भी देते हैं। इनकी पूरी कोशिश होती है कि विदेशी पर्यटक नशे की ये सामग्री इनसे खरीदे। नशे की सामग्री बेचने के बाद शातिर बाल अपराधियों की दूसरी टोली इनके पीछे पड़ जाती है। नशे के इस्तेमाल के बाद जब ये विदेशी पर्यटक तट पर मस्ती में झूम रहे होते हैं तभी मौका देखकर दूसरी टोली के बच्चे इनके कीमती सामानों को पेशेवर अंदाज में उड़ा लेते हैं। नशे की हालत में होने की वजह से ये विदेशी पर्यटक पुलिस में रिपोर्ट करने से परहेज करते हैं।

इन बच्चों की दूसरी पसंद यहां पर आने वाली महिलाएं होती हैं। तट पर भीड़भाड़ का फायदा उठाकर महिलाओं के कंधे पर लटक रहे उनके थैलों से मोबाइल फोन या अन्य कीमती सामान उड़ाने की कला में ये काफी निपुण है। कुछ बच्चे भीड़ में शामिल होकर महिला के साथ धक्का मुक्की करते हैं और इस बीच थैला से चैन या बटन खोल कर मोबाइल फोन उड़ाने में पारंगत बच्चा अपना कमाल दिखा देता है। चैन या बटन न खुलने की स्थिति में थैले को काटने के लिए ये बच्चे ब्लेड या धारदार उस्तरे का इस्तेमाल करते हैं। कभी-कभी पकड़े जाने की स्थिति में अपने आप को आप को छुड़ाने के लिए ये सामने वाले पर इसका इस्तेमाल करने से भी नहीं हिचकते हैं।   

स्कूली शिक्षा से इन बच्चों का दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं है। अगल बगल की मलीन बस्तियों में पलते बढ़ते हुये ये सहजता से अपराध के रास्ते पर अग्रसर हैं। इनके इर्दगिर्द का वातारण इन्हें सहज अपराधी बनाने में सहायक है। इन अपराधी बच्चों के कारनामों पर रोकथाम के विषय में जब एक पुलिस वाले से पूछा गया तो उसने कहा, ‘जब इनके मां-बाप ही चोरी चकारी करते हैं, तो क्या ये साधू बनेंगे ? एक बच्चे को पकड़ो तो इनका सारा कुनबा दौड़ते हुये चला आता है। और हम ज्यादा से ज्यादा चालान ही कर सकते हैं ना। जेल जाएंगे फिर छूट के आएंगे और फिर चोरी चकारी करेंगे।’

इस इलाके के दुकानदार दबी जुबान से कहते हैं कि इन अपराधी बच्चों को प्रश्रय इस इलाके में तैनात पुलिसवाले देते हैं। इन बच्चों के आकाओं और पुलिस वालों में सांठगांठ हैं। पुलिसवाले इन बच्चों के नाम और घर तक जानते हैं, लेकिन पैसों के लोभ में इनके खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं करते हैं।

जुहू के समुद्र तट पर पर्यटकों को लुटने के साथ-साथ वहां पर खड़ी कारों से म्युजिक सिस्टम उड़ाने की कला में भी बच्चों का यह गिरोह पारंगत है। हालांकि पुलिस वालों की यही कोशिश होती है कि ये बच्चे कारों की तरफ रुख नहीं करें, क्योंकि कार अक्सर स्थानीय लोगों का होता है और म्युजिक सिस्टम चोरी होने की स्थिति में वे लोग थाने में जाकर रिपोर्ट लिखाने से नहीं हिचकते हैं।      

इस संबंध में जांच पड़ताल के दौरान जब उस इलाके के एक पुराने अपराधी से बातचीत हुई तो उसने कहा, ‘अरे आप काहे को टेंशन लेते हो। ये सब तो यहां चलता रहता है। अभी से ही इन्हें कमाने की आदत पड़ रही है। धंधा सीख रहे हैं। कम से कम इस धंधे में आमदनी की गारंटी तो है। स्कूल जाके पढ़ाई लिखाई करके क्या करेंगे, अपन कभी स्कूल नहीं गया, लेकिन धंधा करना सीख गया। ये भी सीख रहे हैं। और मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि ये लड़के आप से ज्यादा कमाते हैं।’

अपराध की दुनिया में मजबूती से कदम बढ़ा रहे इन बच्चों का भविष्य क्या होगा, इस बात का अंदाजा सहजता से लगाया जा सकता है। फिलहाल तो ये जुहू के समुद्री तट पर अपने हुनर को निखार रहे हैं, और महज जेल भेज देने से इनके जीवन में कोई परिवर्तन होने  संभावना नहीं दिखती है। यदि जुहू की मलीन बस्तियां व समुद्री तट इनके लिए अपराध का स्कूल का काम कर रहा है तो जेल इनके लिए विश्वविद्यालय साबित होगा, जहां से निकल ये निसंदेह बच्चे अपराध की नई कहानी गढ़ेंगे।

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