किसानों के बहाने रणवीर सेना के पुनर्गठन में लगे हैं इंदुभूषण !

इंदुभूषण

अरुण कुमार मयंक, पटना

बिहार में ब्रह्मेश्वर मुखिया रणवीर सेना के सुप्रीमो थे.पर उनके संगठन का नाम अखिल भारतीय राष्ट्रवादी किसान संगठन है.वे इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष थे.अब उनके संगठन की कमान छोटे पुत्र कुमार इंदुभूषण ने संभाल ली है.आरा के खोपीरा गाँव में उनकी तेरहवीं के मौके पर इंदुभूषण की ताजपोशी हुई. इंदुभूषण को किसान संगठन का कार्यकारी अध्यक्ष घोषित किया गया.अब वे किसानों की लामबंदी के लिए राज्यव्यापी दौरे पर हैं.इनके दौरे से बिहार में खासकर मगधांचल में राजनैतिक सरगर्मियां बढ़ गई हैं.

इंदुभूषण ने मगध का पांच दिवसीय सघन दौरा किया.यह दौरा जहानाबाद में ख़त्म हुआ. उन्होंने यहाँ अपने संगठन की कोर कमिटी की बैठक की.इसके पूर्व उन्होंने १० जुलाई से १४ जुलाई तक नवादा,नालंदा एवं जहानाबाद के दर्ज़नों गाँवों में किसानों की बैठकें एवं सभाएं की.इस दौरे में उनके साथ किसान संगठन के राष्ट्रीय सचिव राकेश कुमार (गया), राष्ट्रीय प्रवक्ता शैलेन्द्र वात्सायन, संस्थापक सदस्य प्रेम कुमार नीरज एवं आनंद कुमार (खोपीरा) चल रहे हैं.

इंदुभूषण ने इन बैठकों में भूधारी एवं भूमिहीन किसानों की एकता पर बल दिया.कृषि को उद्योग का दर्ज़ा देने की मांग की.उन्होंने कहा कि फैक्ट्री के उत्पादों की कीमत उनके मालिक तय करते हैं.पर कृषि उत्पादों का मूल्य व्यापारी तैय करते हैं.यह भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबना है.उन्होंने खेती के फसलों का दाम किसानों को ही तैय करने का अधिकार देने की मांग सरकार से की. इंदुभूषण ने यह भी कहा कि आज तक देश-प्रदेश की किसी भी सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा नहीं की है.ब्रह्मेश्वर मुखिया ने किसानों की हिफाज़त के लिए अपनी कुर्बानी दे दी.लेकिन हम किसानों  के अरमानों का गला इस प्रकार कदापि नहीं घुटने देंगे.हम ब्रह्मेश्वर मुखिया के अधूरे अरमानों को पूरा करने को प्रतिबद्ध हैं.उन्होंने नीतीश सरकार को कठघड़े में खड़ा करते हुए कहा कि मुखिया जी की हत्या हुए डेढ़ माह हो चुके हैं.पर अभी तक हत्यारों की सही-सही पहचान तक नहीं हो सकी है.यही नीतीश का सुशासन और कानून का राज है!

इन सभाओं में किसान संगठन के क्षेत्रीय संयोजक रमेश कुमार ने कहा कि सरकार खाद की कालाबाजारी रोकने में पूरी तरह अक्षम है. किसान महंगे दरों पर खाद-बीज खरीदते हैं. वे कड़ी मेहनत के बल पर फसल उपजाते हैं.और व्यापारी उन्हें कौड़ी के भाव खरीदते हैं. ऐसे में किसानों को मूल्य निर्धारण के अधिकार के लिए आगे आना ही होगा. उन्होंने साफ कहा कि ब्रह्मेश्वर मुखिया आज भी किसानों के ह्रदय में बसे हुए हैं.वे जन-जन की आवाज़ बन चुके हैं.किसानों की व्यापक गोलबंदी ही मुखिया जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

इस पांच दिवसीय दौरे के प्रथम दिन चंडी बाज़ार में इंदुभूषण का भव्य स्वागत किया गया. इंदुभूषण ने नवादा के कुलना,सौरे-राजापुर गाँव में मीटिंग की. दूसरे दिन उन्होंने नालंदा के दरवेशपुरा,घोसरावाँ,पावापुरी एवं मुरौरा आदि गांवों का दौरा किया.तीसरे दिन भी उन्होंने नालंदा के ही नई पोखर,सबलपुर,चंडीमौ,बिंडीडीह,कपसीमा,परवलपुर एवं अरामाँ गांवों का दौरा किया.इसके बाद वे चौथे दिन अरवल-जहानाबाद के कई गांवों में सभाएं की तथा सघन संपर्क अभियान चलाया. इन तीनों जिलों के उपर्युक्त सभी गाँव भूमिहारों के ही हैं. मगध का यह पूरा इलाका उनके पिता के जीवन काल में रणवीर सेना का कार्यक्षेत्र रहा है. उन्होंने अपने इस चार दिवसीय दौरे में अपनी ही जाति के लोगों की बैठकें की.किसानों के नाम पर भूमिहारों की बैठकों के बुलाने का औचित्य ढूढ़ा जा रहा है. मगध के गांवों में मुख्य तौर पर कुर्मी,यादव और भूमिहार जाति के किसान हैं. इस दौरान उन्होंने लगातार दो दिनों तक सर्वाधिक नालंदा के गांवों का ही दौरा किया. नालंदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह जिला है.यहाँ के गांवों में सब से ज्यादा कुर्मी जाति के किसान हैं. इंदुभूषण के किसी बैठक में कुर्मियों को फटकने तक नहीं दिया गया. इतना ही नहीं,इन बैठकों में अन्य किसी जाति के किसानों को बुलाया नहीं गया.अन्य जिलों की बैठकों में भी दूसरी जाति के किसानों को आमंत्रित नहीं किया गया. हालाँकि कुछ गांवों की मीटिंग में उत्सुकतावश अन्य जाति के लोग भी चले गए.

राजनैतिक दृष्टिकोण से इंदुभूषण के उक्त दौरे को बड़े ही अर्थपूर्ण निगाहों से देखा जा रहा है. यह सर्वविदित है क़ि ब्रह्मेश्वर मुखिया के दो बेटे हैं. बड़ा बेटा सत्येन्द्र कुमार सिंह बी.एस.एफ. की नौकरी में हैं. छोटा बेटा इंदुभूषण खोपीरा पंचायत का मुखिया है. ब्रह्मेश्वर मुखिया की ठीक तेरहवीं के दिन ही इंदुभूषण को किसान संगठन का कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया.राजनैतिक प्रेक्षकों का कहना है क़ि अखिल भारतीय राष्ट्रवादी किसान संगठन कुछ और नहीं,ब्रह्मेश्वर मुखिया की रणवीर सेना का ही दूसरा नाम है. अगर यह बात सही है तो इंदुभूषण मुखिया किसानों की बैठकों के बहाने भूमिहारों की गोलबंदी कर रहे हैं.और फिर से बची-खुची रणवीर सेना का पुनर्गठन कर रहे हैं.साथ ही वे भूमिहारों के बीच अपने पिता के बाद उपजे सहानुभूति को भी टटोलना चाहते हैं. निकटवर्ती रणनीतिकारों का यह भी तर्क है क़ि इंदुभूषण अपने पिता के हत्यारों से बदला लेने की तैयारी भी कर रहे हैं. यदि यह बात नहीं है, तो फिर वे किसानों के नाम पर अपनी ही जाति के लोगों को गोलबंद करने में क्यों जुटे हैं? उन्हें अपना मकसद स्पष्ट करना होगा. साथ ही वे अपनी जाति के लोगों में नीतीश सरकार की पैठ को भी भांपने की कोशिश में भी लगे हैं. संक्षेप में यह कहा जा सकता है क़ि किसानों के बहाने रणवीर सेना के पुनर्गठन में लगे हैं इंदुभूषण!

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
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One Response to किसानों के बहाने रणवीर सेना के पुनर्गठन में लगे हैं इंदुभूषण !

  1. sanjeev tyagi says:

    ज़मीन और घर की चिंता में, चिता का रह रहकर आता है ध्यान
    खेत में डालने की दवाई खाकर, दे देता है वो एक दिन अपनी जान

    कितना असहाय हो गया है यारों, सोचो इस देश का किसान
    हर आधे घंटे में जो दे रहा है, इसी ज़मीन पे अपनी जान

    इसी ज़मीन पे अपनी जान
    इसी ज़मीन पे अपनी जान

    शायद आप में से काफी कम लोगों को पता हो कि हमारे लिए दिन-रात मेहनत कर के अपना पसीना बहाने वाला भारत का किसान कितने अवसाद में है. ये वही किसान है है जो अपनी मेहनत से फसल उगाता है, पर जिसे खुद ही साल में कई दिनों तक भूखा ही सोना पड़ता है. यदि हम सरकारी डाटा पर विश्वास करे तो हर एक साल में औसतन १६,६३२ भारतीय किसान आत्महत्या कर रहे हैं. दुसरे शब्दों में कहे तो हर आधे घंटे में कही ना कही, कोई ना कोई किसान अपनी जान ले रहा है. सबसे बड़ी चिंता कि बात तो ये है कि आत्महत्या करने वाले किसानों में सबसे ज्यादा १५-२९ वर्ष कि आयु के युवा किसान है.

    आखिर क्यूँ हो रहा है ये सब? क्या गलत हो रहा है उनके साथ? ये एक बहुत बड़ा प्रश्न है, जो यहाँ अभी बयां करना संभव नहीं है. अगली बार जरुर चर्चा करुँ इस बारे में. उम्मीद है आपका भी करूणा से भरा दिल जरुर रो रहा होगा ये पढ़कर और आपको जरुर मजबूर कर रहा होगा कुछ सोचने पर. अपने विचार बताइयेगा जरुर, मुझे इंतजार रहेगा.
    संजीव त्यागी (कुतबपुर वाले )
    ३३,गाज़ावाली रूरकी रोड
    मुज़फ्फर नगर ,09457392445,09760637861

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