दिल्ली में थियेटर फेस्टिवल, सामाजिक मुद्दों आधारित नाटकों की धूम रही

राजू बोहरा, नई दिल्ली

नयी दिल्ली, देश की राजधानी वासियों के लिए पिछला सप्ताह कुछ खास था,खास तौर से थिऐटर प्रेमियों  के लिए,क्योकि गत सप्ताह १६ अगस्त से १९ अगस्त तक  ” स्पर्श नाट्य रंग ” ग्रुप द्वारा शानदार थिऐटर फेस्टिवल का आयोजित किया गया जिसका उद्घाटन मशहूर वरिष्ठ फिल्म,टीवी व थिऐटर अभिनेत्री सुषमा सेठ ने किया,दिल्ली के मण्डी हाउस के एल.टी.जी ऑडिटोरियम में लगातार चार दिनों तक चले ” स्पर्श नाट्य रंग ” ग्रुप के इस  थिऐटर फेस्टिवल में ” स्पर्श नाट्य रंग ”ग्रुप के अलावा दिल्ली ,मुंबई और कोलकता के अलग-अलग जानेमने थिऐटर ग्रुप द्वारा चार दिलचस्प,सामाजिक नाटकों का मंचन किया गया.जिन्हें थिऐटर प्रेमियों ने खूब सराहा।

फेस्टिवल की शुरुआत ” स्पर्श नाट्य रंग ”ग्रुप के लोकप्रिय हिंदी नाटक ”सांच को ना आंच ” के मंचन से हुई। सोशल विषय पर आधारित इस नाटक का निर्देशन अजीत चौधरी ने किया, फेस्टिवल में दूसरे नाटक” दि प्रोपोजल ”का मंचन हुआ जिसका निर्देशन एन के पंत ने किया,इस फेस्टिवल में तीसरे दिन मशहूर बंगला नाटक ” नोटी बिनोदिनी ”का मंचन किया गया जिसका निर्देशन अभिजीत बैनर्जी ने किया,यह भी एक सोशल सब्जेक्ट पर बेस्ड नाटक था,
फेस्टिवल में आयोजित अंतिम नाटक था मशहूर फिल्म,टीवी और थिऐटर अभिनेता बदरुल इस्लाम के चर्चित नाटक ”एन एक्टर वर्क ” जिसमे दर्शकों ने  अभिनेता बदरुल इस्लाम के अभिनय को खूब सराहा।दोहरी जिन्दगी जीने वाले कलाकारों की असल जिन्दगी को दर्शाने वाले इस नाटक ने निर्देशन भी स्वयं बदरुल इस्लाम ने ही किया था। कुल मिलकर ” स्पर्श नाट्य रंग ” ग्रुप द्वारा आयोजित इस थिऐटर फेस्टिवल को दिल्ली के थिऐटर प्रेमियों ने खूब इन्जाय किया। इस थिऐटर फेस्टिवल के बारे में ” स्पर्श नाट्य रंग ”ग्रुप अजीत चौधरी ने बताया क़ि” स्पर्श नाट्य रंग” पिछले करीब दस वर्षो से दिल्ली सहित देश के अलग-अलग शहरों में अलग-अलग  सोशल और मनोरंजक  विषयों वाले नाटको का मंचन करता आ रहा है, यह ” स्पर्श नाट्य रंग ”ग्रुप आयोजित पहला थिऐटर फेस्टिवल है और  पहले ही फेस्टिवल को दर्शकों का अच्छा रिस्पांस मिला है और हम अब हर साल फेस्टिवल आयोजित करने क़ि योजना बना रहे है। गौरतलब है क़ि अजीत चौधरी लबे अर्से से बतौर अभिनेता फिल्मो, टीवी धारावाहिकों, एड फिल्मो और रंगमंच से जुड़े है।इसके अलावा उनकी पहचान एक अच्छे म्यूजिसन के रूप मैं भी होती है।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
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