अश्लीलता परोसने का माध्यम बन रहा फेसबुक

फेसबुक के निर्माता मार्क जुकर बर्ग ने शायद देश – दुनिया के लोगों को फेस (चेहरा) और बुक (जानकारी) के आधार पर एक दूसरे से परिचित कराने के विषय में सोचकर इसका निर्माण किया होगा। पर आज फेसबुक धड़ल्ले से अश्लीलता और अपराध बढ़ाने का माध्यम बनता जा रहा है। शुरुआत में बहुत ही शालीनता से लोगों ने इसका इस्तेमाल शुरू किया पर समय के साथ जब तक समझा जाता , इस पर किसी प्रकार  से लगाम न होने की बात लोगों की समझ में आ गयी। और बेलगाम चीजों का जो हश्र होता है वही फेसबुक के साथ भी शुरू हो गया। विभिन्न फर्जी अकाउंट्स के साथ तमाम फर्जी जानकारियां एवं चित्रों और भद्दे संदेशों को अपलोड करने का सिलसिला शुरू । क्या पुरूष क्या महिलायें सभी के फेक अकाउंट भद्दे चित्रों और अश्लील संदेशों से पटने लगे। आम इंसान जो बड़े शौक से फेसबुक पर आने वाले फ्रेंड रिक्वेस्ट को अपनी उपलब्धि समझता और खुश होता बढ़ते मित्रों की संख्या पर उसे अचानक झटके लगने शुरू हो गये। जाहिर है कारण था फेसबुक पर आने वाले गलत संदेश और चित्र । अमूमन हर वह सख्स जो फेसबुक को लेकर अच्छे दृष्टिकोण रखता, ने अपने वाल के माध्यम से अपील जारी कर इस पर फैलने वाली अश्लीलता को कम करने की कोशिश की। पर नतीजा ढाक के तीन पात ।

आज फेसबुक के यूजर्स की संख्या करोड़ो पार कर चुकी है तो जाहिर है इसकी लोकप्रियता को समझना मुश्किल नहीं। पर यदि याद किया जाये तो अपने समय में ऑरकुट भी कुछ इसी तरह के मुकाम पर था , पर उसके भी पतन का कारण बना उसका अश्लील होना। इस तरह किसी भी सोशल नेटवर्किंग साइट को अर्श से फर्श पर आने में ज्यादा समय नहीं लगता।

फेसबुक निर्माता के ही बातों पर यकीन करें, तो मिडिया के माध्यम से आया उनका एक बयान काफी रोचक और सच को उजागर करने वाला था,  “कई वर्षों तक आपने फेसबुक पर अपना वक्‍त बर्बाद किया है। अब आपके पास अपनी कमाई लुटाने का मौका है”। हालांकि यह बयान शेयर होल्डर के संदर्भ में था पर वक्त की बर्बादी तो हर फेसबुक यूजर आज स्वीकार रहा है।

फेसबुक यूजर्स की संख्‍या आज सबसे अधिक है और ऑनलाइन वेबसाइटों पर सबसे अधिक समय भी इसी साइट पर लोग बिता रहे हैं। राजनेताओं से लेकर संत्री और मंत्री तक का प्रवेश आज फेसबुक पर है। सदि के महानायक भी आज फेसबुक की थाती बने हुये हैं। आज लोग   इस पर फैल रही अश्लीलता को ही सबसे घातक मान रहे हैं और अपने स्तर से इसका निराकरण भी कर रहे। मसलन फेक आई डी यूजर्स को अपने दोस्तों की लिस्ट से बाहर का रास्ता दिखाना या उन्हें ब्लॉक करना, अपने वाल को पूरी तरह अपने कमांड में करना। हालांकि तमाम सुविधाओं के बाद भी सोशल साइट का यह सबसे मशहूर साधन आज   लोगों के लिये परेशानी का सबब बनता जा रहा है। सबसे ज्यादा इस बात को लेकर संशय बना रहता है कि यदि कोई उपयोगकर्ता इस पर से अपने अकाउंट बंद कर निकलना चाहे तो इसका कोई आसान उपाय नहीं है। बहुत से लिंक यह दावा भले करते हैं कि इसे आसानी से बंद किया जा सकता, पर जानकारों की माने तो जितनी आसानी से लोग गंदे और भद्दे चित्रों के साथ इस पर अपना खाता खोल लेते हैं उतना सरल नहीं है इसे क्लोज करना। हालांकि फेसबुक को काफी सुविधाजनक बनाने का प्रयास भी समय समय पर होता रहा है और इस पर किसी तरह की आपत्तिजनक हरकत ना हो इसके लिये भी समय समय पर चेतावनियां और संदेश आते रहते हैं।

फेसबुक के नियम और शर्तों के मुताबिक यूजर्स को न सिर्फ इस साइट पर कुछ जरूरी सूचनाएं रखनी हैं बल्कि इन्‍हें सही और अपडेट भी करते रहना है, नहीं तो अकाउंट खत्‍म करने जैसे कदम उठाये जाते हैं। पर इससे उन लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता जिन्हें फेसबुक को फेकबुक   में तब्दील करने में ही खुशी मिलती है।

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16 Responses to अश्लीलता परोसने का माध्यम बन रहा फेसबुक

  1. पूरे आलेख से सहमत लेकिन इस बात से असहमत कि फेसबुक एकाउंट बंद करना आसान नहीं है। वास्तव यह बहुत ही सरल प्रक्रिया है और आप 5 मिनट से भी कम समय मे अपना फेसबुक खाता बंद कर सकते हैं।
    आपको सिर्फ Security Settings मे जाकर deactivate your account पर क्लिक करना है और कुछ सामान्य से प्रश्नों का उत्तर दे कर खाता अस्थायी या स्थायी रूप से बंद किया जा सकता है।

  2. Nayyar Imam says:

    Anita jee maine aapke is Story ko kaafi carefully pdha but ismei koi shak nahi ki Facebook aaj Ashlilita Prosne ka sadhan ban gya hai. mai aapke baton se puri tarah se sahmat hun. Ashlilta ke sath sath agar hum dekhe to samaj ko torne ka bhi kaam kar rha hai. Users mei Katarta bhra ja raha hai. Log aaj apni Tradition ko kho rahen hain. Aaj Facebook pe Sahi aur galat par comments nahi karte. Unka commment bhi jaati, Dharam aur Chhetravaad adharit hota hai.

  3. Nitin says:

    अनिता जी, आपने सही कहा की फेस बुक पर अश्लीलता है | लेकिन क्या आप मुझे कोइ भी एक माध्यम (मीडियम) बता सकती हैं जो अश्लीलता से दूर है ? साहित्य, टी वि, सिनेमा, अखबार ? कुछ भी | ये दिक्कत फेसबुक या माध्यम की नहीं है ये समाज की दिक्कत है | मानसिकता इस अश्लीलता का कारण है | मुझे याद है जब मैं दिल्ली में था तो AIIMS के पास अश्लील साहित्य बिकता था और धड़ल्ले से लोग खरीदते थे | ब्लू फिल्में, गंदे गाने, आज कल तो हिंदी सिनेमा में खुलकर अश्लीलता परोसी जा रही है | लेकिन अगर फेसबुक की अच्छाइयां देखें तो न जाने कितनी छोटी बड़ी क्रान्तियों को को सहारा मिला है इससे, फेसबुक ने अपनी बात रखने का मौक़ा दिया है और ये सोसल मीडीया के नए आयामों का परिक्षण करने में मदद भे एकर रहा है | अब इस पर हम लड़कियों की नंगी तस्वीरे लगाते हैं या समाज के किसी ज्वलंत मुद्दे पर बात करते हैं, ये हमारी मानसिकता है | किसी भी माध्यम की छवि उसके इस्तेमाल करने वालो पर निर्भर करता है | ये तो कलम है, अब आप क्या लिखते हैं ये तो आपके ऊपर है | तलवार रक्षा के लिए भी उठाती है और अत्याचार के लिए भी | समाज को सोचना होगा | माध्यम तो बेचारा निश्छल और श्वेत है |

  4. vijai mathur says:

    जैसे डाक्टर के हाथ मे चाकू आपरेशन द्वारा उपचार करता है और डाकू के हाथ मे जाकर कत्ल। उसी प्रकार प्रयोगकरता की मानसिकता और उसका सामाजिक-पारिवारिक परिवेश दुरुपयोग के लिए उत्तरदाई है। सर्वाधिक दायित्व परिवार का है जहां कर्तव्य हीनता की परिकाष्ठा है। लोग अपनी संतानों को व्यवहार नहीं धन कमाना सीखा रहे हैं। माता जब बेटी को बदतमीजी से बात करने के लिए प्रेरित करे और समाज मे उस माता का गुण गाँ हो तब आप अंदाज़ लगा लीजिये कि क्या हो सकता है?
    अतः दोषी फेसबुक नहीं वह खास यूजर ही है।

  5. Manoj Upadhyay says:

    आपके इस आलेख से सौ प्रतिशत सहमत हूँ अनिता जी. इस पर क्या तर्क कि आज यह महान सोशल साइट बहुतेरे गलत हाथों से अपवित्र हो रहा है. यह नहीं रुका तो इस साइट क़ा हश्र भी एक दिन आरकुट वाला हो जाएगा.

  6. Very good article and eye opener for the users of FB.

  7. SUBHASHKUMAR says:

    ABHIVYAKTI KI AAJADI HAI ,HAME JUDJE BANNE KE BAJAY APNE SUDHTA PAR DHYAN DENA CHAHIYE BAKI KHUD THIK HO JAYEGA

  8. फेसबुक पर आप जो भी चित्र आदि पोस्ट करते हैं वे फेसबुक सर्वर पर हमेशा के लिये सेव हो जाते हैं …. आप अकाउंट बंद करें या नहीं

  9. दोषी फ़ेसबुक नही , उसके यूजर्स हैं । मैं विजय माथुर जी की इस बात से सहमत हूं। थोडी सावधानी जरुरी है, फ़्रेंडलिस्ट बडा रखने का क्या अर्थ हुआ ? फ़्रेंडलिस्ट अच्छे लोगो का हो, रिक्वेस्ट स्विकार करने के पहले यह देख लें कि रिक्वेस्ट भेजने वाला कोई रहस्मय व्यक्तित्व तो नही है ? उसने बारे मे अपनी जानकारी साझा की है या नही ? उसके फ़्रेंडलिस्ट मे उसके अपने परिवार के लोग हैं या नही ? बस ईतना ध्यान रखे, मजा आ जायेगा।

  10. chetan sahu says:

    priya anita ji,
    har cheez ke do pehlu hote hain. vigyan me kisi cheez ka aviskar yeh sochkar nahin kiya jaata ki uska durupyog ho. magar sadupyog ke saath-saath aaj kai cheezon ka durupyog bhi ho raha hai. iske liye yeh sochna uchit naa hoga ki kash iss cheez ka avishkar naa hua hota. facebook madhyam hai apne vicharon ko samaj aur desh ke logon ke saamne rakhna aur sambhavit upay sujhakar samasyayon ke nirakaran mein sahyog karna. kuchh vikrit mansikta wale logon ki vazah se facebook ko dosh dena kahan tak uchit hai ?
    hum vaise logon se dosti hi kyon karen jo kisi bhi prakar se aise logon se juden hon. humen dosti karne se pehle unke profile, posts,friend circle aur photos check kar lene chahiye. humen puri tarah santust hone par hi kisi ki dosti sweekar karni chahiye. friend request accept karne ke baad yadi koi galat ya ashlil post s daalen toh unhen “block” kar dena chahiye.

  11. SUNIL KUMAR says:

    अच्छे लोग ज्यादा से ज्यादा यूज़ करें ,सभी अच्छे होसकते हैं ,प्रयास कीजिये

  12. VIRENDRA K.GUPTA. says:

    फेसबुक एक खुली किताब व कॉपी है,जैसे लिखना-पढ़ना पढ़-लिख सकते है,लेकिन नजरिया अच्छा होना चाहिए.जैसे सदा कॉपी है वैसे ही फेसबुक है पर सबो की सोच अलग-अलग होते है,लेकिन पढने व लिखने का नजरिया अच्छा होना चाहिए.

  13. naryankupawa says:

    Anitaji aapki baat sahi hai lakin film,adutaisment , khuli kitabain charo tarf hai
    jiske asran galt hai vo aslil & gandi bhasa he likhega

  14. Mahendra Das says:

    फेसबुक एक बहाना है अश्लीलता तो घर के रहन सहन पर भी निर्भर करता है लोग हाई प्रोफाईल के पिछे भाग रहे हैं जहाँ सभी अश्लील प्रर्दशन सामान्य है उसे अश्लीळ नही मानते सिर्फ फैसन मानते है यह आने बाले भविष्य मे इस पर कोई टिप्पणी करने कै वजाय लोग प्रोत्साहित करेगे इसलिए यह कहना कि फेसबुक अश्ळीळता परोसने का साधन है मै नही मानता ॥

  15. rajesh verma says:

    right

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