जागरण के प्रसार विभाग में बड़े घोटाले की जांच शुरू

राकेश शर्मा, हरियाणा

दोस्तों जागरण में फर्जीवाड़े से शेयर धारकों के हिस्से को गोलमाल करने में यदि प्रबंधन बोर्ड के सदस्य पीछे नहीं हैं तो अधिकारी और कर्मचारी भी कोई मौका नहीं चूकना चाहते हैं। जाहिर है कि इस तरह से सीधे-सीधे कंपनी की बैलेंसशीट में लाभ दर्ज होने की बजाए यह मुनाफा प्रबंधन बोर्ड, अधिकारियों और कर्मचारियों की जेबों में जा रहा है। गोलमाल के इस खेल में कंपनी के खर्च कई गलत तरीके से दिखाए जाते हैं, जो शेयर धारकों को मिलने वाले लाभ से दिए जाते हैं। जबकि हेराफेरी से मिलने वाला लाभ चंद व्यक्तियों के निजी जेब में जा रहा है।

 इस बार जागरण के प्रसार विभाग में लाइंग टैक्सियों की आड़ में किया जा रहा बड़ा घोटाला सामने आया है। फिलहाल इसकी जांच नोएडा तक ही सीमित है, लेकिन सूत्रों से पता चला है कि यह खेल नोएडा से जम्मू तक कई सालों से चल रहा था। जिसकी जानकारी कानपुर तक जा पहुंची है और वहां से भी हलचल शूरू हो गई है। इस घटनाक्रम के मद्देनजर आने वाले समय में कोई बड़ा फेरबदल भी दैनिक जागरण में देखने को मिल सकता है। 

टैक्सी और तेल के खेल का एक मामला पिछले पखवाड़े ही नोएडा के मुख्य कार्यालय में सामने आया था। जिसमें कंपनी के एक छोटे से कर्मचारी को बलि का बकरा बना दिया गया। सूत्रों के अनुसार इस कर्मचारी पर तेल के लाखों रुपये के खेल के आरोप लगाकर उसे आनन- फानन में ही विदा कर दिया गया। जाहिर है कि यदि उसे कंपनी में रखकर जांच की जाती तो पूरे घोटाले के सूत्रधार की गर्दन पकड़ में आ जाती। इसलिए सूत्रधार ने तुरंत ही इस कर्मचारी को बाहर का रास्ता दिखाकर चतुराई से अपनी गर्दन बचा ली। इसके बावजूद प्रसार विभाग में उजागर हुए घोटाले ने इस सूत्रधार के हाथों के तोते उड़ा दिए हैं।     

विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिली है कि दैनिक जागरण के प्रसार विभाग में नोएडा से चलने वाली टैक्सियों के हिसाब में कई सालों से लगातार हेराफेरी की जा रही थी। यह सारा खेल फिलहाल तो लाखों रुपये का दिख रहा है, लेकिन यदि सही ढंग से जांच हुई तो हिसाब करोड़ों रुपये में भी पहुंच सकता है। यह सारी हेराफेरी लाइंग टैक्सियों की आड़ में चल रही थी।

 जानकारी मिली है कि यह पूरा खेल विभाग के अधिकारी संस्थान के एक बढ़े रुतबे वाले शख्स के इशारों और उन-की शह पर करने को मजबूर थे। मजबूरी की बात का अंदाजा यहीं से लगाया जा सकता है कि जो व्यक्ति फंदा लेकर गर्दन की तलाश में जुटा है यह सब खेल सालों से उसकी ही नाक के नीचे चल रहा था। जाहिर है कि आप सारा मतलब समझ ही गए होंगे। लाखों रुपये का वेतन पाने वाले यह शख्स यदि सालों से इस बारे में खुद को अनजान साबित कर रहे हैं तो भी बड़े अफसोस की बात है। इससे तो साफ होता है कि कंपनी किसी नाकाबिल व्यक्ति को मुफ्त में ही मोटा माल खिला रही है, जिसके पीछे क्या मजबूरी है यह भी विचार  करने वाली बात है। इस शख्स के परिवार के एक व्यक्ति को हाल ही में एक बड़े संस्थान में दाखिला दिलाने के लिए नकली दस्तावेज तैयार करवाने की भी चर्चा सुनी जा रही है। इस मामले का खुलासा भी शीघ्र ही सार्वजनिक होने की उम्मीद है। प्रसार विभाग के घोटाले के मामले में फिलहाल प्रसार विभाग की जिम्मेदारी एक ऐसे अधिकारी को सौंप दी गई है जो खुद भी सूत्रधार के निकट माने जाते हैं। यह अधिकारी महोदय एक मातहत के साथ सेंटर विजिट भी करना शुरू कर चुके हैं।

 बहरहाल इस मामले की जांच शुरू होने के बाद नोएडा में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। माना जा रहा है कि इस मामले में कई जनों के नप जाने की स्थिति भी आ सकती है। दूसरी ओर इस पूरे मामले में यह जानकारी भी मिल रही है कि यदि किस गलत गर्दन का चुनाव हो गया तो फंदा लेकर घूम रहे शख्स भी मुसीबत में आ सकते हैं। दोस्तों ऐसा ही मामला हरियाणा की एक यूनिट में भी लंबे समय से चल रहा है। इसके लिए सिर्फ रूट पर चलने वाली टैक्सियों के नंबर और उनके रूट का विवरण जांचने से ही पूरा मामला खुल जाएगा। 

 जागरण में इस तरह के कई खेल सालों से चल रहे हैं।  एक जानकारी प्रबंधकों को मैं भी दे देता हूं कि वे जिला कार्यालयों में आने वाले अखबारों की रद्दी कहां जाती है? इसकी भी एक बार जांच कर लें। दोस्तों लाखों रुपये की हेराफेरी तो इसी रद्दी में हो जाती है। इसकी जांच के लिए सीधा सा फार्मूला भी दे देता हूं कि सभी जिला कार्यालयों में पिछले कुछ सालों के दौरान आने वाले अखबारों की एवज में दी गई राशि का विवरण निकलवा लीजिए और रद्दी बेचने से मिलने वाली धनराशि का लेखा-जोखा निकलवा लीजिए। हरियाणा में संस्थान की बन रही एक नई बिल्डिंग को आजकल पूरे जी-जान से निखारने का प्रयास चल रहा है। यहां पर की जा रही अतिरिक्त मेहनत पर भी यदि गौर किया जाए तो शेयर धारकों को बड़ा चूना लगने से बच सकता है। बहरहाल इस सब घटनाक्रम का परिणाम चाहे जो भी सामने आए तय है कि हर हाल में नुकसान तो शेयर धारकों को ही सहना पड़ेगा। अब इसमें चाहे जागरण का प्रबंधन बोर्ड चोरी करे या फिर कर्मचारी और अधिकारी।    

 राकेश शर्मा

पूर्व मुख्य संवाददाता

दैनिक जागरण

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
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2 Responses to जागरण के प्रसार विभाग में बड़े घोटाले की जांच शुरू

  1. sanjay bhati editor Supreme News GRUP says:

    Rakesh je apne phale he kaha tha ki jagran me chori me bhi chori hai .ab to mamla choro ke ghar me chori ka hai .duniya ko akal dene walo ka ye hal dekh kar lagta hai ki sab gol mal hai .ye sab ghotale kisi aur ke hote to jagran wale badi badi khabre lagete. thank Rakes jee jo appne tamam badi jankri sab ko di .Alok Nandan je /tewar online ko bhi Supreme News pariwar ki or se achche aur bade kam me sath dene ke liye badhai .app desh ke janta ke samne sach la rahe hai.

  2. editor editor says:

    जागरण के संबंध में जिस तरह की खबरें आ रही हैं उसे देखते कहा जा सकता है कि जागरण राष्ट्रदोह जैसा काम कर रहा है….मोंटेस्क्यू के शक्ति पृथककरण के सिद्धांत पर सत्ता को तीन भागों में बांटा गया है…न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका…..जागरण ने अपने कुकर्मों से विधायिका को प्रभावित करने की कोशिश की है…..अंदर खाते पैसे लेकर देश की जनता को गुमराह करने की कोशिश की है…वो भी खबरों के माध्यम से…..इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिये…..यह राष्ट्र की संप्रभुता के साथ खेलने का प्रयास है…..विधायिका का काम है कानून बनाना….ऐसे में जागरण विधायिका के लिए चूने जाने वाले सदस्यों से अंदर खाते पैसे लेकर उनकी पक्ष में लोगों को करने की कोशिश की है…..पता नहीं एडिटर्स गिल्ड व अन्य तरह की संस्थाएं इस मामले में क्या करती है….करती भी है या नहीं…..लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि यह पूरा मामला राष्ट्रद्रोह जैसा है…..राकेश जी परतदर चीजों को सामने ला रहे हैं…..उन सारे पैसों का हिसाब दे रहे हैं जो गलत तरीके से वसूला गया…साथ ही उन अधिकारियों के नाम भी बता रहे हैं जो इन कार्यों में लगे हुये थे…..सभी से पूछताछ होनी चाहिये……चूंकि जागरण में शेयरधारकों का भी पैसा लगा हुआ है, इस लिहाज से भी यह मामला गंभीर बन जाता है……

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