बिहार में पोलिटिकल हत्याओं का दौर शुरु

बिहार में पोलिटिकल हत्याओं का दौर शुरु हो गया है। किसान नेता विनोद सिंह को चीरापुर गांव के पास उस समय गोली मार दी गई जब वह अपने गांव हथियाबाद लौट रहे थे। यह घटना भोजपुर जिले की है। इसी तरह बिहार के गया जिले में धर्मडीहा गांव निवासी और जद (यू) के स्थानीय कार्यालय प्रभारी सुमिरथ यादव को बर्बरता के साथ लाठी डंडो से पीट-पीट कर मारा डाला गया। बिहार की सुस्त पुलिस इन दोनों हत्याओं की जांच की बात तो कर रही है लेकिन पोलिटिकल कनेक्शन होने की वजह से सहमी हुई है। अब तक इन दोनों मामलों में किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है।
विनोद मुखिया किसानों के हितों को लेकर काफी सक्रिय थे। उनकी सक्रियता कुछ लोगों को रास नहीं आ रही थी। इसके पहले आरा में ब्रह्मेश्वर मुखिया की भी हत्या की कर दी गई थी, जिसे लेकर पटना में भी व्यापक तोड़फोड़ हुआ था। उन पर रणवीर सेना  का नेतृत्व करते हुये कई सामूहिक नरसंहारों का आरोप था। बाद  के दिनों में किसानों को लेकर वह कुछ लोक कल्याणकारी योजनाओं पर काम कर रहे थे। लेकिन जेल से छूटने के बाद उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया। उनकी हत्या का रहस्य अभी तक नहीं सुलझा है। कई अरोपी अभी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। कुछ लोग आज भी ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड में पोलिटिकल कनेक्शन होने की बात कर रहे हैं। अब मुखिया विनोद सिंह की हत्या से एक बार फिर आरा का माहौल गरमा गया है। इस हत्या की गूंज बिहार विधान सभा में भी सुनाई दी। राजद सदस्य दिनेश कुमार सिंह ने विनोद मुखिया की हत्या के मामले को विधानसभा में उठाने की कोशिश की लेकिन विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी। बाद में इस मसले को शून्यकाल के दौरान उठाया गया।
इस हत्या की प्रतिक्रिया में किसानों ने भोजपुर को बंद करने का आह्वान किया और बंद के दौरान उग्र किसानों ने आगजनी और तोड़फोड़ भी की। किसानों के उग्र रवैये को देखकर पुलिस के हाथ पांव फूले हुये हैं। जगदीशपुर के पुलिस उपाधीक्षक अंजनी कुमार अपराधियों को जल्द पकड़ने की बात तो कर रहे हैं लेकिन अभी तक पुलिस यह जानकारी भी हासिल नहीं कर पायी है कि उनकी हत्या किन लोगों ने की और उनका मकदस क्या था। स्पष्ट है कि अनुसंधान के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है।
गया जिले में जदयू के नेता सुमिरथ यादव की हत्या तो  पूरी तरह से बर्बर युग की याद दिलाती है। गया जिले में धर्मडीहा गांव निवासी और जद (यू) के स्थानीय कार्यालय प्रभारी सुमिरथ यादव थे। मंगलवार की रात को वह कार्यालय से अपने घर लौट रहे थे। उसी समय बेखौफ अधिकारियों ने उन्हें चारों तरफ घेर लिया और फिर लाठियों और डंडों की बौछार करने लगे। वे लोग सुमिरथ यादव को तब तक पीटते रहे जबतक उनकी जान नहीं निकल गई। इस हत्याकांड के लिए एक पूर्व विधायक और उनके परिजनों को जिम्मेदार ठहराया गया है और  प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। देखना यह होगा कि कितनी सजगता से इसकी जांच होती है?
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