सहमति से ‘जिस्मानी संबंध’ की उम्र सीमा

आखिर इस बात का निर्धारण कैसे होगा कि महिलाओं के लिए ‘जिस्मानी संबंध’ की उम्र सीमा क्या हो? महिलाओं के लिए सहमति से जिस्मानी संबंध की उम्र सीमा को लेकर मतभेदों की वजह से प्रस्तावित दुष्कर्म रोधी कानून पर विचार-विमर्श करने के लिए इसे मंत्रियों के समूह के हवाले कर दिया गया है। इसके साथ ही इस मसले को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस भी तेज हो गई है। प्रस्तावित दुष्कर्म रोधी कानून में कहा गया है कि महिलाओं के लिए सहमित से  ‘जिस्मानी संबंध’ की उम्र सीमा 16 साल होनी चाहिए। तो क्या 16 साल की उम्र तक आते- आते महिलाएं शारीरिक और जेहनी तौर पर खुद के संबंध में किसी भी तरह का निर्णय लेने के योग्य हो जाती हैं? ‘जिस्मानी संबंधों’ को लेकर भारतीय समाज शुरू से ही बंद रहा है। इस मसले पर खुलकर चर्चा करने की रवायत यहां नहीं है, हालांकि ओशो ने सेक्स और महिलाओं की स्वतंत्रता को लेकर बहुत कुछ कहा है, जिसकी वजह से उन्हें लंबे समय तक विरोध का सामना करना पड़ा था। सेक्स को लेकर भारतीय समाज के अंदर बहुत सारी मनोग्रंथियां हैं। विवाह पूर्व जिस्मानी संबंधों को स्वीकार करने के लिए आज भी भारतीय समाज तैयार नहीं है। समाज का एक बहुत बड़ा तबका तो इस विषय पर कुछ भी बोलने और सुनने से भी परहेज करता है।

भारतीय धर्मग्रंथों में आठ तरह के विवाहों का जिक्र है, जिसमें एक है ‘गन्धर्व विवाह’। इसमें महिला अपनी इच्छानुसार किसी पुरुष का वरण करती थी, फिर दोनों गुप्त रूप से ईश्वर को साक्षी मानकर एक दूसरे को पति-पत्नी के रूप में स्वीकार कर लेते थे। सहज जिस्मानी आकर्षण ही इस शादी का आधार था। गन्धर्व विवाह करने वाली कन्याएं अमूमन वयस्क होती थीं और अपने इस कदम के लिए वह पूरी तरह से खुद ही जिम्मेवार होती थीं। भविष्य में इस विवाह से पुरुष के मुकरने की स्थिति में महिलाएं पूरी तरह से खुद को बेबस महसूस करती थी, जैसा राजा दुष्यंत और शकुंतला के संदर्भ में हुआ था। यानि इस संबंध की बागडोर भी पूरी तरह से पुरुषों के हाथ में थी। संस्कृत साहित्य में शकुंतला के रंग, रूप और नैन-नक्श का तो कलात्मक वर्णन किया गया है लेकिन उसकी उम्र का जिक्र नहीं है। आज के दौर में यदि शकुंतला होती तथा उसकी उम्र 16  वर्ष से कम होती और यदि महिलाओं के लिए ‘जिस्मानी संबंध’ की उम्र सीमा से संबंधित यह कानून पारित हो जाता तो निस्संदेह राजा दुष्यंत एक दुष्कर्मी के रूप में आरोपित हो सकते थे।

सहमति से जिस्मानी संबंध मूल रूप से परिस्थितियों पर निर्भर करता है। परिस्थितिवश राजा दुष्यंत और शकुंतला एक दूसरे के करीब आये थे। आज के आधुनिक जीवन शैली में महिलाओं और पुरुषों को एक दूसरे से राब्ता बनाने के मौके सहजता से उपलब्ध हैं। ऊपर से संचार के तमाम आधुनिक संसाधन कम उम्र में महिलाओं और पुरषों को सेक्सुअली एक्टिवेट कर रहे हैं। ऐसे में स्कूली लड़कियां सहजता से किसी लड़के से जिस्मानी संबंध बनाने के लिए तैयार हो जाती हैं। इस संबंध के बारे में उनमें जेहनी तौर पर दूर तक सोचने की क्षमता कम से कम 16 साल की उम्र में तो नहीं ही होती है। यूरोपीय मुल्कों में स्कूली लड़कियों के गर्भवती होने के मामले बहुत ज्यादा हो रहे हैं। असुरक्षित यौन संबंधों की वजह से वहां स्कूली लड़कियों में गर्भपात की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। उनके अनुभवों को देखते हुये कहा जा सकता है कि  लड़कियां 16 साल तक जेहनी तौर पर खुद के विषय में सही निर्णय ले पाने के योग्य नहीं है। लेकिन इसके लिए कम उम्र के उन लड़कों को भी दोषी नहीं ठहराया जा सकता है, जो परिस्थितिवश लड़कियों के साथ संसर्ग करते हैं। यदि भारत में सहमति से महिलाओं के लिए ‘जिस्मानी संबंध’ की उम्र सीमा का कानून पारित होता है, तो इस बात का भी ध्यान रखना जरूरी होगा कि किसी कम उम्र लड़की के साथ संबंध स्थापित करने वाले शख्स की उम्र क्या है। जिस्मानी संबंध के मामले में एक किशोर भी सही तरीके से नहीं सोच सकता है। ऐसे में यदि परिस्थतिवश वह किसी कम उम्र लड़की के साथ उसकी सहमति से जिस्मानी संबंध स्थापित करता है, तो उस पर दुष्कर्म का मामला चलाया जाना कहां तक उचित है? इस लिहाज से कहा जा सकता है कि महिलाओं के लिए सहमति से जिस्मानी संबंध की उम्र सीमा 16 साल करना न सिर्फ किशोरियों के लिए बल्कि किशोरों के लिए भी घातक साबित हो सकता है।

प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक सिग्मंड फ्रायड सेक्स को जीवन की धुरी मानता है और कहता है कि व्यक्ति के दिमाग के नब्बे प्रतिशत भाग में सिर्फ और सिर्फ सेक्स होता है। उसका हर कार्य सेक्स से ही प्रभावित होता है। यदि फ्रायड की मानें तो आदमी बचपन से लेकर वृद्धावस्था तक सेक्स से संचालित होता है। नैतिकता एक आवरण मात्र है। यदि फ्रायड की बात मान ली जाये तो व्यक्ति कभी सेक्स से दूर नहीं होता है और ऐसे में किसी महिला या पुरुष के लिए सेक्स करने की उम्र तय करना बेमानी है। कानून का भय मनोग्रंथियों को ही जन्म देगा और मौका मिलते ही व्यक्ति की कामुकता पाशविकता से साथ अपना मुजाहिरा करेगी। ऐसी स्थिति से बचने के लिए व्यक्ति को अपनी इच्छाओं की संतुष्टि के लिए अधिक से अधिक स्वतंत्रता देनी चाहिए। विगत कुछ दशक से तो यूरोपीय मुल्कों में महिलाओं द्वारा विधिवत ‘आर्गेनिज्म मूवमेंट’ चलाया जा रहा है, जो सिर्फ परस्पर सेक्स के दायर से आगे निकल कर महिलाओं के लिए ‘पूर्ण संतुष्टि’ की गारंटी की वकालत करता है। भारत अभी इस लहर से कोसों दूर है, हालांकि एक छोटे से तबके में इसकी सुगबुगाहट जरूर है। भारत में महिलाओं के लिए सहमति से जिस्मानी संबंध की उम्र सीमा तय करने से भले ही उनकी सुरक्षा सुनिश्च हो या न हो लेकिन इस आंदोलन बल जरूर मिलेगा। रूमानियत के लिए मशहूर ‘स्वीट सिक्सटीन’ सेक्स के प्रतीक का रूप ले सकता है।

महिलाओं के हक में मार्क्सवादी विचारधारा में भी उन्मुक्त सेक्स को तरजीह दी गई है। फ्रेडरिक एंगल्स अपनी पुस्तक ‘परविार, राज्य और निजी संपति ’ में एक ऐसे युग की कल्पना करता हैं, जिसमें महिलाओं की उनकी इच्छा के विरुद्ध कोई और शक्ति किसी पुरुष के समक्ष समर्पण करने के लिए बाध्य न करे। हालांकि महिलाओं के लिए आपसी सहमति से जिस्मानी संबंध के लिए उम्र सीमा तय करने जैसे प्रश्नों से वह नहीं जूझते हैं। कहा जा सकता है कि महिलाओं के प्रति तेजी से हिंसक हो रहे समाज को देखते हुये यह प्रश्न आज के दौर का है, और इसका उत्तर भी इसी दौर को देना है। खासकर भारत के लिए तो यह निहायत ही जरूरी है, जहां, बुजुर्ग रिश्तेदार ही अबोध बच्चियों को हवश का शिकार बनाने से बाज नहीं आ रहे हैं। भारत में सहमति से जिस्मानी संबंध की उम्र सीमा क्या हो, इस पर व्यवस्थित चिंतन की जरूरत है। दिल्ली गैंग रेप की घटना के बाद जिस तरह से दिल्ली समेत देश के मुख्तलफ शहरों में विरोध प्रदर्शनों का दौर चला था, उससे केंद्र सरकार पूरी तरह से दबाव में आ गई है। पहले आनन-फानन में अध्यादेश लाया गया और अब दुष्कर्म रोधी कानून बनाने की तैयारी में है। कहा जाता है कि सौ कानून से अच्छा वह एक कानून है, जिसके पालन की पुख्ता व्यवस्था हो। यहां तो स्थिति यह है कि राजधानी दिल्ली में जब तक लोग थाने का घेराव नहीं करते हैं तब तक पुलिस केस नहीं बनाती है, देश के दूसरे हिस्सों का अनुमान सहजता से लगाया जा सकता है। भविष्य में सहमति से जिस्मानी संबंध की उम्र सीमा का निर्धारण की कवायद क्या गुल खिलाएगी, कह पाना मुश्किल है।

This entry was posted in नारी नमस्ते. Bookmark the permalink.

3 Responses to सहमति से ‘जिस्मानी संबंध’ की उम्र सीमा

  1. vijai mathur says:

    गंभीर एवं चिंतनीय आलेख।

  2. Pramod Pandey says:

    काश, सत्ता के शिखर पर बैठे लोग इसपर सोचते?

  3. rajesh verma says:

    buddhi bhrast ho gai hai

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>