फौलादी इरादों वाली ‘लौह महिला’

ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर अपने फौलादी इरादों से न सिर्फ ब्रिटेन की राजनीति को एक नई दिशा देने में कामयाब रहीं बल्कि अंतरराष्टÑीय मंच पर भी अपनी दमदार मौजूदगी से अपने समय के अहम मसलों को प्रभावित किया। वह ब्रिटेन की पहली महिला प्रधानमंत्री थी। जिस तेवर के साथ उन्होंने सोवियत संघ की विस्तारवादी नीतियों का विरोध किया था, उसे देखते हुये उन्हें ‘लौह महिला’ पुकारा जाने लगा था। दूसरे आलमी युद्ध की समाप्ति के बाद पूरी दुुनिया मुख्य रूप से दो खेमों में बंटी हुई थी। एक खेमे का नेतृत्व अमेरिका के हाथ में था तो दूसरे खेमे का सोवियत संघ के। शीत युद्ध के इस दौर में मार्गरेट थैचर बड़ी कुशलता के साथ अपनी भूमिका निभा रही थीं, हालांकि इस मुकाम तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं था। इसके लिए उन्हे जिंदगी के कड़े आजमाइशों से होकर गुजरना पड़ा था।
मार्गरेट थैचर का जन्म 13 अक्टूबर, 1925 में लिंकनशायर के ग्रैंथेम में हुआ था। उनके पिता अलफर्ट राबर्ट्स एक साधारण किराना दुकानदार होने के बावजूद स्थानीय राजनीति में काफी सक्रिय थे, जिसका प्रभाव थैचर पर स्पष्ट रूप से पड़ा। चर्च में उनकी गहरी आस्था थी। मार्गरेट थैचर को शुरू से ही राजनीति में रुचि थी। छात्र जीनव में ही उन्हें आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय कंजरवेटिव का अध्यक्ष बनने का मौका मिला। और यहीं पर उन्हें फ्रेडरिक वान हायक की पुस्तक ‘दि रोड आफ टू सर्फ्ड’ पढ़ने और समझने का मौका मिला। इस पुस्तक का जबरदस्त प्रभाव थैचर के ऊपर पड़ा और वह पूरी तरह से आर्थिक विकास में सरकार द्वारा न्यूनतम हस्तक्षेप के सिद्धांतों की समर्थक हो गईं। उनका मानना था कि निजी संपत्ति का विकास जरूरी है और सरकार को इस मार्ग में आने वाली तमाम अड़चनों को दूर करना चाहिए। बाद के दिनों में ब्रिटेन का प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाये, जिसे लेकर इंग्लैंड में काफी हंगामा भी हुआ, लेकिन वह अपने इरादे से टस से मस नहीं हुई।
शुरुआती दौर में उन्हें असफलता का भी स्वाद चखना पड़ा, लेकिन इससे राजनीति में आगे कदम बढ़ाने के उनके इरादों पर कोई असर नहीं पड़ा। 1950-51 के आम चुनाव में वह कंजरवेटिव पार्टी की ओर से चुनाव लड़ने वाली इंग्लैंड की सबसे कम उम्र की महिला उम्मीदवार थीं, हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली। लेकिन इस चुनाव में उन्हें डेनिस थैचर के रूप में एक ऐसा जीनव साथी जरूर मिल गया, जो उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को समझ सकता था। डेनिस थैचर अधिक उम्र के एक तलाकशुदा व्यवसायी थी। दिसंबर 1951 में दोनों ने शादी कर ली। डेनिस थैचर की वजह से मार्गरेट थैचर की आर्थिक मुश्किलें हमेशा के लिए दूर हो गई और उन्होंने कानून की पढ़ाई शुरू कर दी। कानून में कर संबंधी मामलों में उन्होंने खास दिलचस्पी दिखाई और 1953 में उन्होंने विधिवत बैरिस्टर की डिग्री हासिल कर ली। इसी वर्ष उन्हें दो जुड़वां बच्चों की मां होने का गौरव भी प्राप्त हुआ।
अपने बच्चों की वजह से उन्हें 1955 के आम चुनाव में भाग लेने के मौका नहीं मिल सका, लेकिन पूरी मजबूती से वह खुद को राजनीति के लिए तैयार करती रही। इसी वर्ष आर्पिगंटन में उप चुनाव हुआ, जिसमें उन्होंने भाग लिया। लेकिन एक बार फिर किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और वह चुनाव हार गई। किसी ने सच ही कहा है कि यदि इरादे मजबूत हंों तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है। आखिरकार 1958 में मार्गरेट थैचर को पहली बार फिन्चले से सांसद बनने का मौका मिल ही गया। इसके बाद से उनका राजनीतक कैरियर जोर पकड़ने लगा। एक के बाद एक उन्हें लगातार सफलताएं मिलने लगीं। कई महत्वपूर्ण ओहदों से गुजरते हुये वह 1975 में विपक्ष की नेता बनने में कामयाब हो गई। विपक्ष की नेता के रूप में मौका मिलने पर उन्होंने सोवियत संघ पर जोरदार हमला करना शुरू कर दिया।
19 जनवरी, 1976 में केनेस्ंिगटन टाउन हाल में सार्वजनिक मंच से सोवियत संघ के पर आक्रमण करते हुये कहा कि रूसी दुनिया पर हुकूमत करने की मंशा रखते हैं। एक शक्तिशाली साम्राज्यवादी देश बनने लिए वे हर तरह से संसाधनों पर अधिकार करते जा रहे हैं। पोलित ब्यूरो के सदस्यों को जनमत से कोई लेना देना नहीं है। इस आक्रामक भाषण के बाद सोवियत रक्षा मंत्रालय के अखाबर ‘क्रास्राया जवेदा’ ने उन्हें ‘लौह महिला’ का नाम दिया और बाद में यह उनकी पहचान बन गई। उनकी लोकप्रियता अब ब्रिटेन की सीमा से बाहर निकल गई थी। ब्रिटेन का अगला चुनाव विशेष परिस्थितियों में 1969 में हुआ और इस चुनाव में मार्गरेट थैचर के नेतृत्व में कंजरवेटिव पार्टी को जोरदार सफलता मिली और इसके साथ ही उनके ब्रिटेन की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया।
4 मई, 1979 को उन्होंने प्रधानमंत्री का पद संभाल लिया और इसके साथ ही ब्रिटेन के इतिहास में एक नया अध्याय शुरू हो गया। उस वक्त ब्रिटेन में जातीय तनाव के साथ-साथ बेरोजगारी अपने चरम पर था। महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को अपने विश्वास में लेकर उन्होंने तमाम तरह के सुधारों को लागू करना शुरूकर दिया। हालांकि कई मसलों पर महारानी एलिजाबेथ के साथ भी उनके मतभेद को लेकर काफी कुछ कहा गया, लेकिन उन्होंने हमेशा इस बात से इन्कार किया कि महारानी के साथ उनके किसी प्रकार के मतभेद थे।  मार्गरेट थैचर प्रत्यक्ष कर की जगह पर अप्रत्यक्ष कर लगाने शुरू किये, जिसे लेकर विभिन्न हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं भी हुई, लेकिन तमाम विरोधों के बावजूद वह अपने इरादों पर कायम रहीं। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि लोगों को सरकारी फ्लैट खरीदने की सुविधा मुहैया करना था। जो लोग सरकारी फ्लैटों में रह रहे थे, उन्हें इस बात की छूट दी गई कि यदि वे चाहें तो ये फ्लैट खरीद सकते हैं।
लागतार 11 वर्ष तक ब्रिटेन की प्रधानमंत्री रहने वाली मार्गरेट थैचर ट्रेड यूनियनों को बिल्कुल पसंद नहीं करती थीं। मुक्त व्यापार की नीति की जबरदस्त समर्थक मार्गरेट थैचर ने देश में ट्रेड यूनियनों को नेस्तानाबूत करने के लिए हर संभव कदम उठाये और इसमें वह काफी हद तक सफल भी रही। कहा तो यहां तक जाता है कि ट्रेड यूनियन की शक्ति को उन्होंने पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया था। उनके कार्यकाल के दौरान 1984 में खदान मजदूरों की सबसे बड़ी हड़ताल हुई थी। उन्होंने मजदूर नेताओं से मिलने से भी इन्कार कर दिया था। उन्होंने घाटे मेंं चल रहे 25 खानों को तत्काल बंद करवा दिया था और यह प्रक्रिया आगे भी जारी रही। देश में हर चीज का निजीकरण करने पर वह उतारू रही। हालांकि बात जब रेलवे के निजीकरण की आई तो उन्होंने यह कहते हुये अपने पैर पीछे खींच लिए कि रेलवे का निजीकरण सरकार के लिए वाटर लू साबित होगा। इसकी दोबारा चर्चा नहीं होनी चाहिए।
मार्गरेट थैचर एक बार जो निर्णय ले लेती थी, उससे पीछे नहीं हटती थी। आयरलैंड के कैदियों को राजनीतिक कैदी का दर्जा देने से उन्होंने साफ तौर पर इन्कार करते हुये कहा था कि अपराध अपराध है। इसे राजनीति से कुछ लेना देना नहीं है। उत्तरी आयरलैंड के माजे जेल में कैदी उस वक्त भूख हड़ताल पर बैठे हुये थे। बाद में कुछ कैदियों की मौत भी हो गई थी, लेकिन मार्गरेट थैचर अपने इरादे से टस से मस नहीं हुईं। आयरलैंड वालों की नजर में वह सबसे बड़ी ख्रलनायिका थी। आयरलैंड के विद्रोहियों ने ब्रिघटान होटल में 12 अक्टूबर 1984 को उन पर जानलेवा हमला भी किया था, जिसमें वह बाल बाल बच गई, हालांकि इस हमले पांच लोग मारे गये थे, जिनमें कैबिनेट मंत्री जान वेकहम की पत्नी भी शामिल थी।
जरूरत पड़ने पर विदेशी महाज पर भी उनका रवैया काफी सख्त हो जाता था। 1982 में जब फाल्कलैंड द्वीप समूह पर अर्जेंटिना ने कब्जा करने की कोशिश की तो उन्होने तत्काल सैनिक कार्रवाई करके स्पष्ट कर दिया कि उनके नेतृत्व में ब्रिटेन अपने विदेशी हितों से कतई समझौता नहीं करेगा। अंतरराष्टÑीय स्तर पर ब्रिटेन के हितों को लेकर वह हमेशा सजग रहती थी। यूरोपीय एकीकरण को वह ब्रिटेन के हित के खिलाफ समझती थी। यही वजह था कि वह यूरोपीय एकीकरण के प्रयासों को हमेशा हतोत्साहित करती रही। सोवियत संघ में मिखाइल गोर्वाचोव के ‘पेरस्त्रोइका’ और ‘गलासनोस्त’ जैसे सुधारों का खुलकर समर्थन करने वाली वह पहली पाश्चात्य नेता थी। उन्हें यकीन था कि ये सुधार सोवियत संघ में लोकतंत्र की बयार को लाने की आधारशीला बनेंगीं। 1988 में रीगन और गोर्वाचोव की मुलाकात के बाद शीत युद्ध की समाप्ति की घोषणा करने वाली वह पहली नेता थी। उन्होंने जोर देते हुये कहा था कि ‘अब हमलोग शीत युद्ध के युग से आग निकल चुके हैं। यह संबंध शीत युद्ध से कहीं ज्यादा व्यापक है। ’
लार्ड सैलिसबरी और लार्ड लीवरपुल के बाद ब्रिटेन में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री के बाद पर बने रहने का रिकार्ड मार्गरेट थैचर के नाम ही है। 11 वर्ष 209 दिन के अपने कार्यकाल में उन्होंने अपने फौलादी इरादों से निंदेह ब्रिटेन को एक नई ऊंचाई प्रदान किया। उनके कट्टर आलोचक इस बात को स्वीकार करते हैं कि एक बार फैसला लेने के बाद वह पलटना नहीं जानती थी। मार्गरेट थैचर को 20 शती की सबसे शक्तिशाली राजनीतिज्ञ में शुमार किया जाता है। मारग्रेट थैचर 20वीं सदी की सबसे प्रभावशाली शख्सियतों में से एक थीं। थैचर की विरासत उनके बाद बने ब्रिटेन के प्रधानमंत्रियों की नीतियों में झलकती रही। भले ही उनका संबंध कंजर्वेटिव पार्टी से हो या फिर लेबर पार्टी से।
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