गृहयुद्ध की आग में झुलसता मिस्र

मिस्र अब पूरी तरह से गृहयुद्ध की चपेट में आ गया है। सेना द्वारा राष्टÑपति मुर्सी के तख्तापलट के बाद से ही आशंका व्यक्त की जा रही थी कि मिस्र में हिंसा का एक नया दौर शुरू हो सकता है। अब मुर्सी समर्थक जिस तरह से सड़कों पर निकल कर मुर्सी की फिर से बहाली की मांग कर रहे हैं और फौज द्वारा इसका जवाब गोलियों से दिया जा रहा है, उससे साफ हो गया है कि मिस्र में जारी हिंसा का यह दौर लंबा खिंचने वाला है। ताजा हिंसा में तकरीबन सात सौ लोग हलाक हो चुके हैं और हजारों घायल हुये हैं। मुर्सी विरोधी धड़ा पूरी तरह से फौज के पीछे खड़ा है और फौज हुक्मरान हर कीमत पर मुर्सी समर्थकों के होश ठिकाने लगाने पर तुले हुये हैं। सत्ता में आने के बाद मुर्सी मिस्र का इस्लामीकरण करने की कोशिश कर रहे थे, जिसे लेकर मिस्र में प्रदर्शनों का तांता लग गया था। जब मुर्सी ने लोगों के खिलाफ सख्ती बरतने की कोशिश की तो फौज ने जनहित और डेमोक्रेसी के नाम पर उनका तख्ता पलट दिया। अब फौज को मुर्सी समर्थकों के गुस्से का शिकार होना पड़ रहा है। मुर्सी समर्थकों का कहना है कि फौज ने मिस्र में एक चुनी हुई सरकार का तख्तापलट कर डेमोक्रेसी को कुचलने की कोशिश की है और इस नापाक कोशिश को कभी कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। बहरहाल मिस्र हिंसा की आग में जल रहा है और इसकी तपिश पूरी दुनिया महसूस कर रही है।
ब्रदरहुड की भूमिका
मुर्सी समर्थकों की कमान इस्लामिक संगठन ब्रदरहुड के हाथ में है। ब्रदरहुड के रहनुमा इस बात को लेकर अड़े हुये हैं कि किसी भी कीमत पर मुर्सी को फिर से सत्ता में लाना है। अब तक मिस्र में मुर्सी के समर्थन में जितने भी प्रदर्शन हुये हैं, उसके पीछे ब्रदरहुड का ही हाथ है। फौज द्वारा मुर्सी के तख्तापलट को वे लोग पूरी तरह से अवैध ठहरा रहे हैं। ब्रदरहुड ने फौजी कार्रवाई के खिलाफ पूरे मिस्र में एक सप्ताह तक विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया था। इसके बाद मिस्र में जगह-जगह उग्र प्रदर्शन होने लगे थे। ब्रदरहुड के नेतृत्व में मुर्सी समर्थक बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर कर हिंसा करने लगे थे। जब फौज ने इन्हें रोकने की कोशिश की तो इन्होंने फौज को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया। फौज के साथ व्यापक झड़प में 173 लोग हलाक हो गये। मरने वालों में दस फौजी भी शामिल थे। इसके बाद फौज की ओर से दमनकारी कार्रवाई और तेज कर दी गई। फौजी कार्रवाई से घबड़ाकर मुर्सी समर्थकों को मध्य काहिरा के रामसेस चौराहे के पास स्थित अल फतेह मस्जिद में शरण लेनी पड़ी। मस्जिद की घेराबंदी करने के बाद फौज ने तकरीबन एक हजार मुर्सी समर्थकों को हिरासत में ले लिया है। इन लोगों में ब्रदरहुड के कई बड़े नेता भी शामिल हैं। गृह मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर ब्रदरहुड से जुड़े 1004 लोगों की गिरफ्तारी की तस्दीक की है। इसके बावजूद ब्रदरहुड के नेतृत्व में मुर्सी समर्थकों का विरोध मिस्र के मुखतलफ हिस्सों में जारी है।
चर्च पर हमले
मिस्र में जारी गृहयुद्ध में चर्च को भी निशाना बनाया जा रहा है। अब तक मिस्र में करीब दो दर्जन चर्चों पर हमले हो चुके हैं। जिस तरह से मुर्सी समर्थक चर्चों पर हमला कर रहे हैं, उससे ईसाई समुदाय के लोग खौफजदा हैं और मुस्तकबिल में इस तरह के किसी भी हमले से निपटने के लिए वे गोलबंद हो रहे हैं। मुर्सी समर्थक इस बात से खफा हैं कि मिस्र का ईसाई समुदाय मुर्सी के तख्तापलट के खिलाफ फौज की हिमायत कर रहा है। हालांकि ब्रदरहुड के नेता इस बात से इंकार कर रहे हैं कि उनके लोग चर्च को निशाना बना रहे हैं। साथ ही वे यह भी कह रहे हैं कि जिस तरह से ईसाई समुदाय तीन जुलाई के तख्तापलट का समर्थन कर रहे हैं, उससे मिस्र में एक बड़े तबके के बीच रोष है। ब्रदरहुड के प्रवक्ता मुराद अली ने जोर देते हुये कहा है कि हमें पता है कि वे लोग इस्लामिक सिद्धांतों के खिलाफ काम कर रहे हैं। फौज के साथ खड़े हैं। लेकिन इस आधार पर उनके ऊपर हो रहे हमलों को जायज नहीं ठहराया जा सकता है। हम इस तरह के हमलों की कड़ी निंदा करते हैं।
आतंकी प्लॉट के खिलाफ चेतावनी
इस नाजुक स्थिति में मिस्र की फौज समर्थित सरकार ने भी मुर्सी समर्थकों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। फौज को आगे करके सरकार में शामिल तमाम लोग आरपार की लड़ाई के मूड में हैं। उन्हें पता है कि यदि इस मौके पर चूक करने का अर्थ अपने डेथ वारंट पर साइन करने वाला साबित होगा। यही वजह है कि फौज द्वारा स्थापित वहां की सरकार लोगों को तथाकथित आतंकवादी संगठनों से आगाह कर रही है। सरकार द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि आतंकवादी संगठन मुल्क की सुरक्षा को गंभीर चुनौती दे रहे हैं। किसी भी तरह की आंतकी साजिशों के खिलाफ एकजुट होकर प्रतिकार करने की जरूरत है। अंतरिम कैबिनेट पुलिस को सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश दे चुकी है। किसी भी तरह की आतंकी कार्रवाई या साजिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही सरकारी टेलीविजन पर हथियार से लैस ब्रदरहुड के समर्थकों को हिंसा करते हुये भी दिखाया जा रहा है। ब्रदरहुड की राजनीतिक शाखा फ्रीडम एंड जस्टिस पार्टी अंतरिम सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुये यह ऐलान कर रही है कि मुर्सी को फिर से तख्तानशीन करने का संघर्ष जारी रहेगा।
अमेरिका का रवैया
नई विश्व व्यवस्था में खुद को डेमोक्रेसी का चैंपियन कहने वाला अमेरिका मिस्र में जारी कत्लोगारत को लेकर अप्रत्यक्ष रूप से वहां की फौज समर्थित अंतरिम सरकार के साथ ही खड़ा है। अमेरिका इस बात की साफ तौर पर अनदेखी कर रहा है कि मिस्र में जबरन एक चुनी हुई सरकार को फौजी ताकत का इस्तेमाल करते हुये हटाया गया है। आलोचकों का कहना है कि अमेरिका द्वारा मिस्र सरकार को सलाना 1.3 मिलियन की जो मदद दी जा रही है, उसे बंद कर देना चाहिए, क्योंकि मिस्र में तख्तापलट हो चुका है। ऐसे में फौज समर्थित अंतरिम सरकार को आर्थिक मदद मुहैया करने का कोई तुक नहीं बनता है। मिस्र में जो कुछ हो रहा है, उसे लेकर अमेरिका के डेमोक्रेटिक नजरिये पर भी नये सिरे से बहस छिड़ गई है। आलोचकों का कहना है कि एक ओर अमेरिका डेमोक्रेसी की रक्षा के नाम पर इराक में घुसकर फौजी तानाशाह राष्टÑपति सद्दाम हुसैन को सत्ता से बेदखल करता है तो दूसरी ओर मिस्र में एक चुनी हुई सरकार का फौज द्वारा तख्तापलट का समर्थन करता है। यह डेमोक्रेसी को लेकर अमेरिका के दोहरे चरित्र को ही दर्शाता है। सही मायने में अमेरिका इस्लाम की मुखालफत करने की नीति पर चल रहा है। वैसे आलोचकों का यह भी कहना है कि अभी मिस्र में जो कुछ हो रहा है उसके लिए मुस्लिम ब्रदहुड और पूर्व राष्टÑपति मुर्सी भी जिम्मेदार हैं। उन्हें जनमत मुल्क पर बेहतर तरीके से हुकूमत करने के लिए मिला था न कि मिस्र का इस्लामीकरण करने के लिए। मुर्सी अपनी सीमा का अतिक्रमण करके मिस्र को कट्टरवादी इस्लामिक मुल्क बनाने की दिशा में बढ़ रहे थे, जिससे अमेरिका समेत तमाम मगरीब मुल्कों में बेचैनी थी।
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