मुल्क पर रेप की छाया

पिछले कुछ दिनों से राष्टÑीय पटल पर रेप की घटनाएं छायी हुई हैं। मुंबई में एक महिला फोटोग्राफर के साथ सामूहिक दुष्कर्म  की घटना और आसाराम बाबू पर एक नाबालिग लड़की के साथ जबरदस्ती करने के आरोप से पूरे मुल्क में गुस्से की लहर दौड़ रही है। इसके अलावा झारखंड में एक महिला पुलिसकर्मी के साथ भी सामूहिक दुष्कर्म की घटना हो चुकी है। चलती ट्रेन में एक बच्ची के साथ भी दुष्कर्म की वारदात सामने आयी है। बिहार, यूपी, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, आन्ध्रप्रदेश और केरल से भी महिलाओं के साथ लगातार दुष्कर्म की खबरें आ रही हैं। इससे पहले पिछले वर्ष दिल्ली में एक चलती बस पर पैरा मेडिकल की एक छात्रा के साथ जिस दरिंदगी से दुष्कर्मी पेश आये थे, उससे पूरा मुल्क हिल गया था। दिल्ली समेत देश के मुखतलफ हिस्सों मेंं इसे लेकर कई दिनों तक जोरदार प्रदर्शन होते रहे। दिल्ली में तो इस घटना को लेकर प्रदर्शनकारी हिंसक भी हो गये थे। इस सबके बावजूद मुल्क में महिलाओं के साथ छेड़-छाड़ और दुष्कर्म की घटनाओं पर कारगर तरीके से रोक लगा पाने में मुल्क का कानून अक्षम साबित हो रहा है। मुंबई की हालिया घटना से एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा का मामला सतह पर आ गया है। खासकर मेट्रोपोलिटन सिटी में कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अब तक ईजाद की गई तमाम व्यवस्थाओं को लेकर नये सिरे से बहस छिड़ गई है। इसके साथ ही संतई की आड़ में महिलाओं के शारीरिक और मानसिक शोषण के खिलाफ लोगों में उबाल है।
महिलाओं में खौफ
मुंबई को महिलाओं के लिए ‘सेफ जोन’ माना जाता रहा है। लेकिन जिस तरह से एक महिला फोटोग्राफर को ‘आॅन ड्यूटी’ हवस का शिकार बनाया गया है, उससे एक बार फिर मुंबई में महिलाओं की सुरक्षा पर सवालिया निशान लग गया है। मुंबई में इस घटना को लेकर जोरदार प्रतिक्रियाएं हो रही हैं। लोग हाथों में बैनर लेकर सड़कों पर उतर कर इस घटना के खिलाफ जमकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका गुस्सा स्वाभाविक है। मुंबई शहर मेंं कामकाजी महिलाओं की भरमार है। देश के मुखतलफ हिस्सों से इस शहर में अपने सपनों को उड़ान देने की महत्वाकांक्षा के साथ आने वाली महिलाओं की संख्या अधिक है। इस घटना से मुंबई की महिलाएं खौफजदा हैं। वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। पुलिस की तमाम चौकसी के बावजूद  मुंबई में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं खूब होती हैं। एक हद तक महिलाएं इसकी अभ्यस्त भी हो चुकी हैं। लेकिन जिस तरह से महिला फोटोग्राफर के साथ जबरदस्ती की गई, उससे अब महिलाओं को घर के बाहर निकलने में भी डर महसूस हो रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर महिलाओं के प्रति समाज इतना क्रूर क्यों होता जा रहा है? अकेले में पाकर लोग महिलाओं के प्रति क्यों वहशी रूप अख्तियार कर लेते हैं? और इस कदर महिलाओं को भयभीत करके हमें क्या हासिल होगा?
सुरक्षा मापदंडों की अवहेलना
महिलाओं के लिए समाज में बराबरी का लाख तर्क दिया जाये, लेकिन इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता कि उन्हें रोजमर्रा के जीवन या कामकाज के दौरान कुछ सुरक्षा मापदंडों को ध्यान में रखकर चलना चाहिए। दिल्ली में चलती बस पर जिस लड़की के साथ गैंग रेप हुआ था, उसने भी जाने-अनजाने सुरक्षा मापदंडों की अवहेलना की थी। अपने पुरुष मित्र के साथ खाली बस में सवार होने का कोई तुक नहीं बनता था। महिलाओं को यह कतई नहीं भूलना चाहिए कि पुलिस की एक सीमा है। अपनी सुरक्षा को लेकर उन्हें खुद सतर्क रहना पड़ेगा। मुंबई की महिला फोटोग्राफर ने भी कमोबेश वही गलती की, जो दिल्ली की पैरा मेडिकल की छात्रा ने की थी। अपने सहयोगी के साथ महालक्ष्मी मिल जैसे सुनसान स्थान पर उसे कतई नहीं जाना चाहिए था। उस महिला फोटोग्राफर को ऐसी खतरनाक जगह भेजने वाले वरिष्ठ पत्रकार की भी गलती है। महिला सुरक्षा से संबंधित व्यावहारिक पहलुओं की उसने भी अनदेखी की। पूरी मुंबई को मालूम है कि वह स्थान नशेड़ियों और जुआरियों का अड्डा बना हुआ है और एक महिला के लिए वह किसी भी नजरिये से सुरक्षित नहीं है। पत्रकारिता अपनी जगह है और सुरक्षा के मापदंड अपनी जगह। महिलाओं के लिए सुरक्षा मापदंडों की अवहेलना करने का सीधा सा अर्थ है मुसीबत को दावत देना। महिला स्वतंत्रता के हक में हम चाहे कितना भी नारा क्यों न बुलंद कर लें, भारत जैसे देश में व्यावहारिक तौर पर अब भी महिला स्वतंत्रता का अस्तित्व जमीन से कोसों दूर है। और वैसे स्थान पर जाकर जहां नशेड़ियों और गंजेड़ियों की भरमार है, महिला स्वतंत्रता के कौन से तरन्नुम लिखे जा सकते हैं? बहरहाल इस घटना में सभी पांचों आरोपियों को हिरासत में लेकर मुंबई पुलिस ने अपना काम बखूबी किया है। वैसे यह कह पाना मुश्किल है कि मेट्रोपोलिटन समेत देश के अन्य हिस्सों में रेप की घटनाएं रुकेगी, लेकिन महिलाएं सुरक्षा मापदंडों को अपनाकर खुद को शिकार होने से बचा सकती हैं।
रेप पर राजनीति
मुंबई में महिला फोटोग्राफर के साथ गैंग रेप की घटना के बाद सियासत में भी उबाल आ गया है। मनसे प्रमुख राज ठाकरे इस घटाने के बहाने एक बार फिर मुंबई में गैर मराठियों पर निशाना साधते हुये विषवमन करने में जुट गये हैं। उनका यह कहना कि मुंबई में अपराध की वारदातों में इजाफा बाहरी लोगों की वजह से हुई है, उनकी ओछी मानसिकता को ही दर्शाता है। मुंबई में दुष्कर्म से संबंधित अब तक के आंकड़ों से पता चलता है कि इस तरह की वारदातों में स्थानीय लोगों की संलिप्तता ज्यादा रही है। राज ठाकरे मुंबई अपराध पर नियंत्रण करने के ठोस उपाय सुझाने के बजाय राजनीतिक लाभ हासिल करने में लगे हुये हैं। भाजपा और शिवसेना भी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कुछ ठोस उपाय करने के मूड में नहीं हैं। ये दोनों पार्टियां महाराष्ट्र के गृहमंत्री आर.आर. पाटिल का इस्तीफा मांगने तक ही खुद को सीमित रखे हुये है।
संतई के नाम पर शोषण
मुल्क में संतई के नाम पर भी महिलाओं को शिकार बनाने का पुराना चलन है। धार्मिक प्रवृति की होने की वजह से महिलाएं सहजता से फरेबी संतों की बातों में आ जाती हैं। और यही फरेबी संत कब उनके साथ जबरदस्ती कर बैठें, उन्हें भी पता नहीं होता है। हाल ही में एक लड़की ने जिस तरह से संत आसाराम बाबू पर अपनी इज्जत पर दाग लगाने का अरोप लगाया है, उसे लेकर बहुत कुछ कहा-सुना जा रहा है। आसाराम बापू लड़की को पागल बता रहे हैं और खुद को पाक-साफ। अब वे कितने पाक-साफ हैं, इस बात का पता तो जांच के बाद ही चलेगा। फिलहाल इस बात की तस्दीक हो चुकी है कि लड़की के साथ दुष्कर्म हुआ है और कोई भी नाबालिग लड़की अपनी इच्छा से तो खुद को किसी अधेड़ पुरुष को नहीं सौंपेगी। बहरहाल इस मामले में सच्चाई चाहे जो हो, मुल्क के एक बहुत बड़े तबके में आसाराम बाबू के खिलाफ गुस्सा है। अपनी हरकतों से आसाराम बापू लगातार विवादों में बने रहे हैं। अब इस नये आरोप का सामाना वो कैसे करेंगे, यह तो वक्त ही बताएगा, फिलहाल पुलिस महकमे में उनकी गिरफ्तारी की तैयारियां चल रही हैं। यदि वे जल्द ही सलाखों के पीछे नजर आये तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
तंत्रमंत्र और कालाजादू का प्रकोप
मुल्क में रेप की बहुत सारी घटनाओं को तंत्रमंत्र और काला जादू के नाम पर अंजाम दिया जाता है और इस तरह की घटनाएं यदाकदा ही प्रकाश में आ पाती हैं। शारीरिक शोषण होने के बाद पीड़िता लोक लाज के भय से पुलिस के पास जाने से कतराती हैं और ढोंगी तांत्रिकों का काला कारनामा बदस्तूर जारी रहता है। तरह-तरह के छोटे बड़े तांत्रिकों के जाल पूरे मुल्क में फैले हुये हैं। महिलाएं इन तांत्रिकों की सहजता से शिकार बनती हैं। मुल्क में महिला स्वतंत्रता के तमाम नारे इन तांत्रिकों की मायाजाल में दम तोड़ देते हैं और ये तांत्रिक पूरी तरह से कानून को ठेंगा दिखाते रहते हैं। समाज के इस अंधेरे पक्ष पर भी रोशनी डालने की जरूरत है ताकि महिलाओं की सुरक्षा को हर स्तर पर सुनिश्चित किया जा सके।
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