सीरिया में शर्मसार हुई मानवता

विश्व समुदाय द्वारा सीरिया में रासायनिक हथियारों के भंडार पर लंबे समय से चिंता जताई जा रही है। सीरिया के विद्रोह प्रभावित इलाकों में जिस तरह से रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल की खबरें आ रही हैं, उससे अमेरिका समेत तमाम मगरबी देशों की बेचैनी बढ़ गई है। रासायनिक हथियारों की चपेट में आने से हजारों लोगों के मरने की खबर है। अब जिस तरह से अमेरिका सीरिया की घेराबंदी कर रहा है, उससे देखते हुये कहा जा रहा है कि अमेरिका सीरिया पर हमला करने की नीति पर चल रहा है। अमेरिका ने सीरिया को ताकीद की थी कि चाहे कुछ भी हो जाये, किसी भी गुट के खिलाफ रासायनिक हमला कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ओबामा प्रशासन के तमाम आला अधिकारी इस बात को मान रहे हैं कि सीरिया में विद्रोहियों के खिलाफ राष्टÑपति राष्ट्रपति बशर अल असद ने रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया है और इसकी सजा उन्हें जरूर मिलनी चाहिए। इस मसले को लेकर इंग्लैंड के राजनीतिक हलकों में भी गहरी चिंता जताई गई है और सीरिया के खिलाफ सैनिक कार्रवाई करने की मांग की जा रही है। हालांकि  राष्टÑपति बशर अल असद इस बात से साफ तौर पर इन्कार कर रहे हैं कि उन्होंने सीरिया में विद्रोहियों के खिलाफ रासायनिक हथियार का इस्तेमाल किया है। इसके साथ ही वह यह भी कहने से नहीं चूक रहे हैं कि सीरिया के एक खास इलाके में रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल विद्रोही गुटों द्वारा किया गया है। मतलब साफ है कि सीरिया में रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल हुआ है और मानवता शर्मसार हुई है।
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हमले को तैयार अमेरिका
सीरिया पर संभावित हमले को लेकर अमेरिकी सेना पूरी तरह से तैयार है। अमेरिकी रक्षामंत्री चक हेगल ने अपनी मंशा का इजहार करते हुये यहां तक कहा है कि हम बस राष्टÑपति बराक ओबामा के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। सीरिया पर हमले के लिए हम तैयार हैं। चीन और रूस अमेरिका द्वारा सीरिया के खिलाफ किसी भी तरह की सैनिक कार्रवाई की मुखालफत कर रहे हैं। इन दोनों मुल्कों का मानना है कि सीरिया में सैनिक हस्तक्षेप करने पर इस क्षेत्र की स्थिति और बिगड़ सकती है। ईरान भी नहीं चाहता कि अमेरिकी फौज सीरिया में दाखिल हो या फिर उस पर गोलाबारी करे। अमेरिका ईरान पर भी रासायनिक और आणविक हथियारों को हासिल करने की दिशा में लगातार सक्रिय रहने के आरोप लगाता रहा है। ईरान को डर है कि रासायनिक हमले का बहाना बना कर सीरिया पर आक्रमण करने के बाद अमेरिका ईरान का भी रुख कर सकता है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्बास अराकची ने कहा है कि हमारा क्षेत्र बहुत संवेदनशील है और यहां शांति अन्य किसी भी चीज से अधिक जरूरी है। इसलिए समस्या के राजनीतिक हल की जरूरत है। इतना ही नहीं, ईरान सीरिया के राष्टÑपति बशल अल असद का बचाव करते यह कहने से भी नहीं हिचक रहा है कि सीरिया में रासायनिक हमला सशस्त्र विद्रोहियों ने किया है।
रासायनिक हमले की हकीकत
इस हमले की जानकारी सबसे पहले सीरिया के विद्रोही गुटों ने ही दी थी। उनके द्वारा जारी तस्वीरों में दिखाया गया कि कैसे सैकड़ों लोग रासायनिक हमले के बाद सांस नहीं ले पा रहे थे  और देखते ही देखते कैसे लाशों का अंबार लग गया। उन चिकित्सा केंद्रों की तस्वीरें भी जारी की गईं, जहां पर हमले से प्रभावित लोगों को इलाज के लिए ले जाया गया था और डाक्टरों की टीम उन्हें बचाने के लिए पागलों की तरह काम कर रही थी। जल्द ही डाक्टरों के सामने यह समस्या खड़ी हो गई कि लाशों को कहां रखा जाये। यह हमला दमिश्क के करीब उन इलाकों में किया गया है, जहां पर विद्रोहियों का बोलबाला है और जो राष्टÑपति बसर को गंभीर चुनौती दे रहे हैं। इस हमले में अब तक कितने लोग मारे गये हैं, इसकी सही जानकारी किसी के पास नहीं है। लोग अपने रिश्तेदारों की तलाश कर रहे हैं। मरने वाले सभी लोगों की तस्वीरे खींचकर उन्हें सामूहिक रूप से कब्र में दफनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। घटना के दिन उस इलाके में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उन्होंने धमाके की आवाज सुनी थी। ऐसा लगा था जैसे पानी की कोई टंकी फटी हो या फिर किसी ने एक झटके से पेप्सी का बोतल खोला हो। इसके बाद प्याज या क्लोरीन जैसी महक आनी शुरू हुई। फिर लोगों की आंखों और गले में जलन होने लगी। यह हमला विगत बुधवार को अहले सुबह किया गया था, उस वक्त लोग अपने घरों में सो रहे थे। बहुत सारे लोग तो नींद में ही चल बसे। इस हमले से सबसे अधिक प्रभावित होने वाला क्षेत्र दमिश्क के उत्तरपूर्व में स्थित पूर्वी घोउटा इलाका है।
हताश करने की रणनीति
सीरिया में जारी संघर्ष पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि यह रासायनिक हमला विद्रोहियों को लक्ष्य करके नहीं किया गया है। इसका उदेश्य विद्रोहियों के परिवार वालों को भयभीत करना है, जो उनका समर्थन करते हैं। राष्टÑपति असद के रणनीतिकार इस बात को अच्छी तरह से समझते हैं कि यदि विद्रोहियों पर काबू पाना है तो पहले पीछे से उनको मिल रहे समर्थन को तोड़ना जरूरी है। यदि वे विद्रोहियों के परिवार वालों को मारेंगे तो विद्रोही स्वाभाविक रूप से मोर्चा छोड़ कर अपने घरों की ओर लौटने लगेंगे। ऐसे में उनको नियंत्रण में लेना आसान होगा। कुछ सैनिक विशेषज्ञों का कहना है कि रासायनिक हमला राष्टÑपति असद के  फौज की व्यापक रणनीति का एक हिस्सा है। सीरिया की राजधानी के इर्द-गिर्द विद्रोहियों को सबक सिखाने के लिए वे टैंक, पारंपरिक रॉकेट और हवाई हमलों का इस्तेमाल करते रहे हैं। रासायनिक हमला करके वे लोग विद्रोहियों को पूरी तरह से हताश करना चाह रहे हैं।
सुरक्षा परिषद में मतभेद
सीरिया के मुद्दे पर संयुक्त राष्टÑ सुरक्षा परिषद में जोरदार खींचतान चल रही है। रूस और चीन इस बात पर अड़े हुये हैं कि सीरिया के खिलाफ सैनिक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, जबकि ब्रिटेन और फ्रांस मानवीय पहलुओं का हवाला देते हुये संयुक्त राष्टÑ की अनदेखी करने तक की बात कर रहे हैं। फिलहाल सीरिया की सरकार दमिश्क में हुए कथित रासायनिक हमले की जांच संयुक्त राष्ट्र की रासायनिक हथियार निरीक्षक टीम से करवाने को सहमत हो गई है। सीरिया की सरकार पहले से यह कहती आ रही है कि रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल विद्रोही गुटों ने किया है। ऐसे में यदि संयुक्त राष्टÑ संघ की टीम इस बात की तस्दीक करती है कि सीरिया में रासायनिक हमला हुआ है तो भी वह यह सिद्ध नहीं कर पाएगी कि यह हमला वाकई में सीरिया की सरकार ने की थी। जांच टीम के नतीजों से एक नया हंगामा जरूर खड़ा होगा, इसमें कोई शक नहीं है। पश्चिमी मुल्क जहां सीरिया को धमका रहे हैं कि वो जांच के नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश न करे, वहीं रूस पश्चिमी देशों के कूटनयिकों को ताकीद कर रहा है कि अपने नतीजों को वे संयुक्त राष्टÑ संघ के विशेषज्ञों पर थोपने की कोशिश न करें। अब यह देखना रोचक होगा कि संयुक्त राष्ट्र की टीम सीरिया में क्या कुछ खोज पाती है। बहरहाल इतना तो स्पष्ट हो गया है कि जिन हथियारों को हासिल करने के लिए इंसान एड़ी-चोटी का जोर लगाये हुये था, वही हथियार अब उसके अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा हो गये हैं। और मजे की बात है कि इन हथियारों पर नियंत्रण करने के लिए हथियारों का ही सहारा लिया जा रहा है। अमेरिका द्वारा सीरिया की सैनिक घेराबंदी इसका सबसे बेहतर उदाहरण है।
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