भाजपा जनता से किये वादे निभाए: विजय कुमार चौधरी

तेवरऑनलाईन, पटना

भाजपा को महाराष्ट्र और हरियाणा के नतीजों के बाद से बिहार में चुनाव में
जीत मिलने की खुशफहमी नहीं पालनी चाहिए।  यह बात सही है कि महाराष्ट्र
में भाजपा की सीट बढ़ी है तथा हरियाणा में भाजपा को बहुमत हासिल हुआ है।
परन्तु यह बात ध्यान योग्य है कि महाराष्ट्र में जिस प्रकार कॉर्पोरेट
घरानों और मीडिया के तरफ से हवा बनायीं गयी वह असफल रहा।  चौतरफा मुकाबले में भी भाजपा को महाराष्ट्र में बहुमत नहीं मिल सका।  इस से यह तो स्पष्ट
है कि महाराष्ट्र की जनता भाजपा को पसंद नहीं करती है। इसमें यह भी ध्यान रखना चाहिए की महाराष्ट्र में बसी बिहार और उत्तर
प्रदेश की जनता का भी समर्थन भाजपा को नहीं मिल पाया।  महाराष्ट्र में
बसी उत्तर प्रदेश और बिहार की जनता का समर्थन नहीं मिलने की वजह से ही
उन्हें पूर्ण बहुमत नहीं प्राप्त हो सका। दूसरा पहलू यह भी है कि महाराष्ट्र और हरियाणा के नतीजों से बिहार के चुनावों का आकलन करना एक अर्थहीन प्रयास है।  यह भ्रम में जीने का प्रयास
है।  बिहार के मतदाता भाजपा के चालों को समझ चुके हैं और वो भाजपा के
फैलाये भ्रमजाल से निकल चुके है।  यह बात बीते विधानसभा उपचुनाव में
साबित हो चुकी है। बिहार के लोग यह समझने लगे है कि भाजपा ने झूठे आश्वासनों का भ्रमजाल फैलाकर उनका समर्थन हासिल किया है।  अब जब केंद्र सरकार की सच्चाई खुल कर सामने आने लगी है तो लोग धीरे धीरे इसके साजिशों से अवगत हो रहे है। कालेधन के मुद्दे पर भाजपा ने झूठे वादों की इमारत खड़ी की थी तथा ऐसा भरोसा दिलाया था कि उनकी सरकार बनते ही कला धन वापिस आ जायेगा।  परन्तु आज जब वो केंद्र में सत्ता में आ गए है तो वह कालाधन वापस लाने में अपनी असमर्थता दिखा रहे है।  और इस बात के लिए वह 1995 के जिस कानून का हवाला
दे रहे है यह बात क्या उन्हें सत्ता में आने के पहले पता नहीं थी।  भाजपा
के नेता तथा प्रधानमंत्री जो खुद तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके है क्या
उन्हें इस कानून की जानकारी नहीं थी।  क्या भाजपा नेता इतने गैरजिम्मेदार
है कि उन्हें ऐसे प्रमुख कानून की पहले जानकारी नहीं थी या वह जानबूझकर
झूठे वादे कर रहे थे।  दोनों ही स्थिति में यह अत्यंत निंदनीय है।
इनकी कलई अब परत दर परत खुलना प्रारंभ हुआ है और आने वाले वक़्त में इनकी और फजीहत होने वाली है।  अतः भाजपा के लिए यह उचित होगा कि वो हरियाणा और महाराष्ट्र के नतीजों से आत्ममुग्ध होने के बजाय जनता से किये वादे निभाने पर ध्यान केन्द्रित करे।

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