मंदिर में भगवान

सूखी रोटी के लिए

शोर है संसार में

आज जीवन फल-फूल रहा

हत्या और अपराध में

केवल रोटी की कीमत

चुका दे जो आदमी

वह आदमी भगवान है

धधकते इस मकान में।

 (काव्य संग्रह संगीन के साये में लोकतंत्र से)

निर्भय देवयांश

About निर्भय देवयांश

यदि मैं यह कहूं कि यह देश बीमार है तो इसमें क्या बुरा है? यदि मैं यह कहूं कि यह देश भिखमंगा है तो यह हकीकत है और यदि मैं मानता हूं कि गरीबी ने दर्जनों लोगों को मौत की नींद सुला दी है तो इसमें आश्चर्य वाली बात क्या है? औरों की तरह यह मेरा अधिकार है मैं जैसा चाहूं अपने देश की तस्वीर बनाऊं।
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One Response to मंदिर में भगवान

  1. Hé c’est un grand poteau. Est-ce que je peux employer une partie là-dessus sur mon emplacement ? Je naturellement lierais à votre emplacement ainsi les gens pourraient lire le plein article s’ils voulaient à. Remercie l’une ou l’autre manière.

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