बाल संसद का आयोजन एक चुनौती : मणि भूषण झा

कहते हैं प्रतिभा परिचय की मोहताज नहीं होती। बिहार के मधुबनी जिले के ऐसे ही एक प्रतिभाशाली युवा मणि भूषण झा से अनिता गौतम की बातचीत :-

बिहार के एक छोटे से जिले से देश की राजधानी दिल्ली तक का सफर अपने बुते पर तय करने वाले मणि भूषण झा वर्तमान में एमिटि लॉ स्कूल, देल्ही से कानून की पढ़ाई कर रहे हैं। सुखद आश्चर्य है कि अपने परिवार में पहले ग्रैजुएट होने का गौरव भी इन्हें ही हासिल है।

दिल्ली प्रवास के दौरान गरीब बच्चों को पढ़ाने के क्रम में मेहनत कश मजदूरों को देखकर इनके मन में कुछ नया करने का विचार आया। इन्हें लगा कि मन में लगन हो तो कोई कितने भी कठिन काम कर सकता है। इसी प्रयोग के तहत इन्हों ने चाणक्य को याद करते हुए उनके नाम पर एक स्वयं सेवी संस्था बनाया। इसके माध्यम से इन्हों ने युवाओं को राजनीति में न सिर्फ आने के लिए प्रेरित करने का काम किया वरन् देश में साफ सुथरी राजनीति की वकालत भी की।

हाल के दिनों में इन्हों ने बिहार की राजधानी पटना स्थित डॉन बॉस्को एकेडमी में चाणक्य नीति राष्ट्रीय युवा संसद का आयोजन किया। इस संदर्भ में मणि भूषण झा ने बताया कि इस तरह के आयोजन पहले दूसरे संगठनों द्वारा होते रहे हैं, पर सभी मेट्रों शहरों में ही आयोजित हुए हैं। यह पहला अवसर है जब बिहार की राजधानी पटना में न सिर्फ इसे सफलता पूर्वक आयोजित किया बल्कि बिहार के युवाओं में अपनी एक पहचान भी बनायी।

कानून की पढ़ाई के साथ साथ चाणक्य के कदमों पर चलते हुए इन्हों ने बड़े साफ शब्दों में कहा कि आज युवाओं को सिर्फ नारों, बैनर और पोस्टर की राजनीति से अलग कुछ करना होगा। इनके लिए राजनीति में सिर्फ कदम रखना काफी नहीं है, बल्कि संविधान के संचालन की पूरी जानकारी भी आवश्यक है और इसी मकसद से उन्हों ने खास विषय पर आधारित बाल संसद को पटना में आयोजित किया।

अपने युवा संगठन के माध्यम से इनकी कोशिश यह है कि अधिकाधिक संख्या में लोग राजनीति में आयें, पर सेवा भाव और देश प्रेम की भावना के साथ ही भरपूर जानकारी के साथ। इन भावी कर्णधारों को संसदीय प्रणाली से लेकर राज्य और केन्द्र के कार्यकलापों के संचालन की भी पूरी जानकारी हो।

स्वयं राजनीति में आने की बात को बड़े सहजता से टालते हुए इन्हों ने कहा कि अभी पढ़ाई कर लूं फिर निर्णय करुंगा। अपने लगन औऱ मेहनत से आगे बढ़ने की बात तो सही है पर माता पिता का सहयोग और उनके आशीर्वाद को भी जरूरी बताया। साथ ही अपनी इस सफलता और कार्यकुशलता में अपने एक सहभागी अमित पाराशर के सहयोग को भी याद किया। वड़े गर्व के साथ इन्हों ने बताया कि चाणक्य नीति राष्ट्रीय युवा संसद देश में अब तक हुए आयोजनों में सबसे बड़ा संसद बना। और इस तरह के आयोजन को राजधानी पटना से शुरु कर छोटे छोटे शहरों में कराना चाहते हैं। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाने के लिए उनका अगला पड़ाव गया में है, जहां 21 और 22 जनवरी को बाल संसद के आयोजन का निर्णय किया गया है।

मणिभूषण झा ने देश में बिगड़ते हालात और जाति व्यवस्था पर भी अपनी नाराजगी जतायी। जाति देश को कमजोर कर रहा है। लोग जाति के नाम पर बंटे हुए हैं। राष्ट्र निर्माण में किसी भी तरह जाति आड़े नहीं आनी चाहिए।

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One Response to बाल संसद का आयोजन एक चुनौती : मणि भूषण झा

  1. Jitendra Kumar Jha says:

    Interview of Manibhushan with Gautam ji is nice one. I know personally mani. First time I met him at my home town when he came at my home on a occasion. At that he was sdying in 10th. I asked some question to him on sullabus based. His reply impressed me and from that time I realy appreciate him for his hard work to achieve goal. In addition he is a good social worker and keeping well ideas about national issues and spreading the awareness among the youth of nation. It is his good initiative toward nationalism. Hope for thebest from him. I glad to read his interview. Keep motive in right direction and hoping to lead nation in future.

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