भोजपुरी इंडस्‍ट्री में स्‍कोप के साथ–साथ है होप : अनिल काबरा

फिल्‍म ‘इंडिया वर्सेस पाकिस्तान’ 11 अगस्‍त से भोजपुरिया दर्शकों के लिए देशभक्ति का एक अनूठा मिशाल पेश करने को तैयार है। इस फिल्‍म के निर्माता अनिल काबरा किसी परिचय के मोहताज नहीं है। वे मूलत: राजस्‍थान से आते हैं। उन्‍होंने अब तक कई हिंदी फिल्‍मों का भी निर्माण किया है। मगर भोजपुरी के प्रति उनका प्रेम और इसकी लोकप्रियता ने अनिल काबरा आकर्षित करती है। तभी तो उन्‍होंने भोजपुरी इंडस्‍ट्री को पवन सिं‍ह स्‍टारर सुपर हिट फिल्‍म ‘सरकार राज’ दी। वहीं, भोजपुरी फिल्‍म ‘मैं सेहरा बांध के आउंगा’ भी शूट हो चुकी।  अब फिर एक बार लीक से हट कर अलग कहानी के साथ वे भोजपुरिया स्‍क्रीन पर दस्‍तक देने को तैयार हैं। अभी हाल ही मैं उन्‍हें प्रतिष्ठित 9वां NIFF दादासाहेब फाल्‍के गोल्‍डन कैमरा अवार्ड 2017 से भी सम्‍मानित किया गया है। आज भोजुपरी इंडस्‍ट्री और उनकी फिल्‍म ‘इंडिया वर्सेस पाकिस्तान’ के बारे में अनिल काबरा से बात की रंजन सिन्‍हा ने –

सवाल : आप गैर भोजपुरी भाषी हैं, फिर भोजपुरी में फिल्‍म निर्माण उतरने के फैसला कितना सही रहा आपके लिए ?

जवाब : सबसे पहले मैं बता दूं कि मैं राजस्‍थान से आता हूं। फिल्‍म मेकिंग मेरा पैशन है और इसमें भाषाई चुनौतियों से मैं घबराता नहीं हूं। रही बात भोजपुरी की तो मुझे लगता है यह एक बेहद लोकप्रिय भाषा है। इसके बोलने समझने वालों की संख्‍या भी काफी है, तो इस भोजपुरी सिनेमा करना मेरे लिए गर्व  की बात है। मेरी पिछली फिल्‍म ‘सरकार राज’ को दर्शकों ने खूब प्‍यार भी दिया, इससे मुझे लगा कि इस इंडस्‍ट्री में स्‍कोप के साथ – साथ होप है। अगर अच्‍छी फिल्‍में मैं लोगों के बीच लेकर जाउंगा,तो मुझे उतना ही मान मिलेगा, जितना हिंदी में मिला।

सवाल :  फिल्‍म ‘इंडिया वर्सेस पाकिस्तान’ बनाने के पीछे आपकी समझ क्‍या रही ?

जवाब : यूं तो इंडस्‍ट्री में भारत – पाकिस्‍तान पर आधारित कहानियां का दौर चल रहा है। कई फिल्‍म मेकर इसके जरिए दर्शकों में देशभक्ति का जज्‍बा पैदा कर रहे हैं। लेकिन हमने फिल्‍म ‘इंडिया वर्सेस पाकिस्तान’ को अलग न‍जरिए से बनाया है। पाकिस्‍तान को वर्ल्‍ड कप टाइटल जिताने वाले क्रिकेटर इमरान खान ने कभी कहा था कि भारत और पाकिस्‍तान के बीच रिश्‍तों में सुधार का जरिया क्रिकेट ही बन सकता है। उनके इस नजरिए को भी हमने फिल्‍म की कहानी में शामिल किया है।

सवाल : फिल्‍म के बारे में बतायें ?

जवाब : फिल्‍म ‘इंडिया वर्सेस पाकिस्तान’ का थीम ही हमने लीक से हटकर चुना है। इसमें फ्रेश कहानी के साथ – साथ एक लंबी स्‍टार कास्‍ट के जरिए स्‍क्रीन प्‍ले किया है, जो दर्शकों का मनोरंजन तो करेगा ही, साथ ही भारत-पाकिस्‍तान के रिश्‍तों के बारे में भी बताएगा। भोजपुरी सिनेमा के इतिहास में पहली बार होगा जब एक साथ कई सुपर स्‍टार स्‍क्रीन शेयर करते नजर आएंगे। फिल्‍म में यश कुमार, प्रियंका पंडित, निशा दुबे, रितेश पांडे, राकेश मिश्रा, अरविंद अकेला कल्लू, आदित्य मोहन, अनिल यादव, अयाज खान, बृजेश त्रिपाठी, अभिनव कुमार, गौरी शंकर, देव सिंह, स्वीटी छाबड़ा, कनक पांडेय, निधि झा, माया यादव, आनंद मोहन पांडे, जसवंत कुमार, उदय तिवारी, राधे मिश्रा, प्रेम दुबे, करण पांडेय, उज़ैर खान, जय सिंह, अनूप अरोरा जैसे स्‍टार का जबरदस्‍त अभिनय देखने को मिलेगा। फिल्‍म के गाने भी लोगों को काफी पसंद आयेंगे।

सवाल : फिल्‍म में इतने बड़े स्‍टार को एक साथ कास्‍ट काम करने का अनुभव कैसा रहा है ?

जवाब : सच में यह मेरे लिए काफी चाइलेंजिंग था। हमने पहली बार इस इंडस्‍ट्री में स्‍टार कास्‍ट की फौज उतारी है, जिसके बीच फिल्‍म में सामंजस्‍य बिठाना वाकई कठिन काम था। मगर मैं धन्यवाद करना चाहूंगा फिल्‍म के निर्देशक फिरोज ए. आर. खान का,जिन्‍होंने इनके बीच बेहरतीन तालमेल के साथ फिल्‍म को पूरा किया, जो 11 अगस्‍त से सिनेमाघरों में आने को तैयार है। हमने भोजपुरी दर्शकों को कुछ नया देने के लिए यह प्रयोग किया और इसी आधार पर फिल्‍म की पटकथा तैयार की गई।

सवाल : अंत में ये बताएं कि डिस्‍ट्रीब्‍यूशन और फिल्‍में प्रोड्यूस करने का आपका अनुभव कैसा रहा है ?

सवाल : बतौर निर्माता मुझे फिल्‍म करने काफी मजा आता है, जबकि डिस्‍ट्रीब्‍यूशन एक अलग पार्ट है। जितना चाइलेंजिंग फिल्‍म मेकिंग है, शायद उतना ही डिस्‍ट्रीब्‍यूशन। मेरी अपनी एक इंडिया ई-कॉमर्स के नाम से मेरी एक डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपनी भी है,जिसके तहत मैंने कई हिंदी, राजस्‍थानी, मराठी समेत अन्‍य कई भाषा की फिल्‍में की है। अब इसी कंपनी के तहत मैं फिल्‍में भी प्रोड्यूश कर रहा हूं। सच कहूं तो फिल्‍म निर्माण से डिस्‍ट्रीब्‍यूशन तक मुझे मैंने बहुत कुछ सीखा और उसी अनुभव को मैं आने वाले प्रोजेक्ट में यूज करता हूं।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
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