सिंतबर में होगा एक शाम, मो रफी के नाम कार्यक्रम का भव्य आयोजन

पटना, 21 जुलाई 2017 रू मशहूर गीताकार मो. रफी को समर्पित कार्यक्रम श्एक शाम, मो रफी के नामश् का भव्य  अयोजन सितंबर माह के पहले सप्ता2ह में श्रीकृष्ण  मेमोरियल हॉल, पटना में होगा। आज पटना में संवाददाता सम्मेरलन के दौरान कार्यक्रम की सूचना देते हुए  श्एक शाम, मो रफी के नामश् आयोजक ऑन मौसमी ने बताया कि रफी साहब जैसे लीजेंड ने भारतीय संगीत को एक नया आयाम दिया। गायकी के क्षेत्र में उनके योगदान को कोई भूला नहीं सकता। इसलिए पटना में  सितंबर माह के पहले सप्ताह में एक शानदार कार्यक्रम रफी साहब को समर्पित होगा।

संवाददाता सम्मे लन में ऑन मौसमी ने बताया कि यह कार्यक्रम पिछले कई सालों से आयोजित किया जा रहा है। वैसे तो रफी साहब की पुण्यतिथि पर हमलोग इसका आयोजन करते हैं। मगर इस बार यह कार्यक्रम सितंबर महीने के प्रथम सप्ता ह में आयोजित किया जाएगा। उन्हों ने  कहा कि पिछली बार बिहार सरकार के वित्त मंत्री अब्दुरल बारी सिद्दिकी और कला संस्कृतति मंत्री शिवचंद्र राम ने मंच से घोषणा की थी कि आगे आने वाले दिनों में सरकार इस कार्यक्रम के लिए अनुदान देगी। मगर वर्तमान समय की राजनीतिक घटनाक्रम के बीच अनुदान नहीं मिल पाया, जिस वजह से यह कार्यक्रम अब सितंबर माह में आयोजित की जाएगी।

ऑन मौसमी ने कहा कि नई सरकार की ओर से अगर श्एक शाम, मो रफी के नामश् कार्यक्रम के लिए कोई सहयोग मिलता है, तो ठीक। और अगर इसमें कोई दिक्कीत होती है तो फिर हम हर साल की तरह इस कार्यक्रम का आयोजन करेंगे और पटना में रफी साहब के चाहने वालों को निराश नहीं करेंगे। उन्होंने बताया कि 31 जुलाई को देश के एक नायाब सिंगर ने भले हमें अलविदा कह दिया, मगर आज भी वे अपने आवाज के जरिए लोगों के दिल पर राज करते हैं। वहीं,  संवाददाता सम्मेभलन से पूर्व रफी साहब की पुणतिथि पर आज लोगों ने उन्हेंव संगीत के जरिए श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके गानों को गाकर याद किया।

editor

About editor

सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
This entry was posted in इन्फोटेन. Bookmark the permalink.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>