देश बचाओ भाजपा भगाओ रैली को सफल बनाना है : तेजस्वी

जनादेश अपमान यात्रा के प्रथम चरण की यात्रा  पर प्रस्थान करने से पूर्व पत्रकारों से बातें करते हुए विधानसभा मे प्रतिपक्ष नेता श्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने कहा जनादेश को छला गया है जिन्होंने महागठबंधन को वोट किया वे अपने को छला हुआ ,और अपमानित महसूस कर रहे हैं ! लोकतंत्र में जनता मालिक  होती है !जनता ने जो जनादेश दिया उसका अपमान हुआ है । जनता इसका बदला ज़रूर लेगी। उन्होने कहा के केंद्र कि भाजपा सरकार ने अच्छॆ दिनो का  सपना दिखाया था क्या अच्छे दिन आ गये। गरीबों ,किसानों ,नौजवानों और आम लोगों को छला गया! गरीबों  को टी०वी०,रेडियो ,माइक्रोवेव देने की बात कर रहे हैं ! हम जानना चाहते हैं कि वे कब से बाँट रहे हैं । यादव ने कहा कि 16 महीने राजद उनके साथ सरकार में रही इस अवधि मे जीडीपी 7% से बढ़ कर 14% हो गया। जब भाजपा साथ 30 महीने रही थी तो जीडीपी 7% था ।

एक प्रश्न के उत्तर में यादव ने कहा की उनके पास भाजपा और एनडीए सरकार के विरुद्ध अनेकों मुद्दे हैं मगर देश बचाओ भाजपा भगाओ रैली को सफल करना हम सब की पहली प्रथमिकता है।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी को न्यायालय से अर्थ दंड की सजा हो चुकी है! कहाँ गई उनकी अंतर आत्मा। क्या उन्हें त्याग पत्र नहीं दे देना चहिये था ? बिहार मंत्रिमंडल मे 75% दागी मंत्री है !इस मामले में मेरे प्रश्न का कोई जवाब नहीं आया। देश को बाँटने की राजनीति हो रही है। हम तर्क के साथ जनता के बीच जायेंगे जनता को सबकुछ बतायेंगे।

यात्रा पर जाने से पूर्व तेजस्वी  प्रसाद यादव ने अपनी माता राबड़ी देवी एवम पिता श्री लालू  प्रसाद का पैर छू कर आशीर्वाद लिया। राबड़ी देवी ने अपने  दोनो पुत्रों को तिलक लगाई और आशीर्वाद दिया! इस अवसर पर विधायक मुँद्रिका यादव, शिव चंद्र राम, समीर कुमार महासेठ, विजय प्रकाश, शक्ति यादव, ललित यादव ,विधान पार्षद सुबोध यादव,राजद के वरीय नेता श्री तनवीर हसन,विधायक, देवमणि सिंह यादव, पी०के० चौधरी सहित अनेको राजद कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
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