दरक रही है जदयू की दीवार

बिहार में जब से नीतीश कुमार ने बीजेपी का दामन थामा है तब से लालू और उनका कुनबा तो उनके खिलाफ हमलावर है ही जदयू के अंदर भी घमासान मचा हुआ है। अपनी बाजीगरी से  नीतीश कुमार भले ही बिहार में अपने मुख्यमंत्री पद के ओहदे को बचाने में कामयाब हो गये हो लेकिन जिस तरह से जदयू के अंदर शरद यादव नीतीश कुमार के इस कदम की मुखालफत कर रहे हैं उससे जदयू के मुस्तकबिल पर खतरा मंडराने लगा है। महागठबंधन की मौत के बाद अब जदयू की दीवारे दरक रही है। शरद यादव के तीन दिवसीय पटना यात्रा के दौरान जिस तरह से राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकर्ताओं ने पटना एयरपोर्ट पर उनका जोरदार इस्तकबाल किया उससे साफ हो जाता है कि अब नीतीश कुमार को अपनी पार्टी ओर मुख्यमंत्री की कुर्सी बचाने के लिए एक साथ दो मोर्चों पर जूझना होगा।

नीतीश कुमार के कदम को शरद यादव खुलकर अनैतिक करार दे रहे हैं। हालांकि शरद यादव और उनके लोगों को पार्टी के अहम पदों से अलग थलग करने की कवायद नीतीश कुमार ने बहुत पहले ही शुरु कर दी थी। नीतीश कुमार खुद को मुख्यमंत्री के पद पर कायम रखते हुये जदयू को बिहार तक ही सीमित रखने के पक्षधर हैं। बिहार से बाहर जदयू के विस्तार को लेकर नीतीश कुमार कभी भी गंभीर नहीं रहे। अब तो इस बात की ताइद वह खुल्लमखुल्ला कर रहे हैं। वैसे भी बीजेपी के साथ हाथ मिलाने के बाद दूसरे सूबों में जदयू के विस्तार की बात बेमानी हो जाती है। इस हकीकत को शरद यादव अच्छी तरह से समझ रहे हैं। उन्हें साफ दिख रहा है कि नीतीश कुमार की वजह से जदयू का चाल और चरित्र पूरी तरह से बदल गया है। तभी तो पटना एयर पोर्ट पर मीडिया से मुखातिब होते हुये शरद यादव ने कहा कि हमने पांच साल के लिए गठबंधन किया था।  जिस 11 करोड़ जनता से हमने जो करार किया था, वो ईमान का करार था। वो टूटा है, जिससे हमको तकलीफ हुई है। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि शरद यादव नीतीश कुमार को साफ तौर पर बेईमान करार दे रहे हैं। जदयू से राज्यसभा सांसद अली अनवर भी शुरुआत में ही दबी जुबान में नीतीश कुमार के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। अली अनवर नीतीश कुमार के हक में लंबे समय तक खड़ा रहे हैं। यहां तक कि सार्वजनिक मंचों से कई बार वह नीतीश कुमार पीएम का चेहरा बता चुके हैं। लेकिन अब नीतीश कुमार की बाजीगरी से उनका दिल चाक चाक हो चुका है। यदि जदयू के अंदर नीतीश कुमार के खिलाफ कोई मुहिम खड़ा होती है तो अली अनवर उस मुहिम से अपने आप को शायद ही दूर रख पाये।

पटना में 19 अगस्त को जदयू की कार्यकारिणी बैठक होनी है। इस बैठक के पहले शरद यादव पार्टी के नेताओं का मन टटोल रहे हैं। उन्हें इस बात का आभास है कि पार्टी के अंदर नीतीश कुमार की मुखालफत दबी जुबान से हो रही है। चूंकि इस वक्त नीतीश कुमार सत्ता में है इसलिए कोई भी खुलकर सामने आने की हिमाकत नहीं कर रहा है। शरद यादव लालू यादव से भी राब्ता बनाये हुये है और लालू यादव भी जदयू के अंदर उन नेताओं पर निगाह गड़ाये हुये जो विभिन्न कारणों से नीतीश कुमार से नाराज चल रहे हैं। यदि तीर सही निशाने पर बैठा तो बिहार में एक बार फिर से सियासी हलचल देखने को मिल सकता है। हालांकि जदयू के महासचिवल केसी त्यागी जो कभी शरद यादव के करीबी माने जाते थे ने कहा है कि शरद यादव 19 तारीख तक संयम बरतना चाहिए और मर्यादा का पालन करना चाहिए। शरद यादव कितना संयम बरतते हैं यह तो वक्त ही बताएगा लेकिन जानकारों का यही कहना है कि जदयू के अंदर ऑल इज वेल नहीं है।

दूसरी ओर तेजस्वी यादव ने भी चंपारण से जनादेश अपमान यात्रा की शुरुआत कर नीतीश कुमार के खिलाफ उन्हीं की राजनीतिक शैली में जंग का ऐलान कर दिया है। गौरतलब है कि नीतीश कुमार लगातार यात्राएं करते रहे हैं। अब तेजस्वी यादव की यात्रा नीतीश कुमार को सियासी तौर पर निपटाने के लिए हो रही है। तेजस्वी के इर्दिगिर्द लोगों का हुजूम बढ़ता जा रहा है और नीतीश के खिलाफ वह खुलकर मुखर भी हो रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहना शुरु कर दिया है कि नीतीश कुमार आरएसएस से मिल गये हैं। पूरे बिहार में वह घूम-घूम कर बताएंगे कि कैसे नीतीश कुमार ने बिहार के जनमत के साथ दगाबाजी की है। नीतीश कुमार के खिलाफ तेजस्वी यादव के सटीक रणनीति का अहसास इस बात से होता है कि उन्होंने अपनी मुहिम को गांधी जी साथ जोड़ दिया है जो सादगी और सदाचार के प्रतीक हैं। कहा जाता है कि यदि शत्रु मजबूत हो तो लड़ने को तौर तरीको में निखार आता है। भविष्य में तेजस्वी की राजनीतिक शैली और निखरेगी जिससे नीतीश कुमार की सिरदर्दी में इजाफा होगा।

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