जल्द प्रदर्शित होगी ‘आर पार के माला चढ़ईबो गंगा मईया

देवा फिल्म  एंटरटेनमेंट के बैनत तले बन रही है भोजपुरी फिल्म  ‘आर पार के माला चढ़ईबो गंगा मईया’ जल्दक ही सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जाएगी। पूर्ण रूप से पारिवारिक पृष्ठ भूमि पर बनी इस फिल्मर का मकसद है भोजपुरी सिनेमा से दूर हो रही आधी आबादी को फिर से जोड़ना और उन्हेंठ इसके लिए प्रोत्साहित करना। ये कहना है भोजपुरी फिल्म  ‘आर पार के माला चढ़ईबो गंगा मईया’ के निर्माता देवेंद्र वर्मा और टी राजेश का।
उन्हों ने कहा कि इन दिनों भोजपुरी फिल्मों में आई फूहड़ता के कारण महिलाओं का बड़ा वर्ग भोजपुरी सिनेमा से अलगाव की स्थिति में हैं। वे अब सिनेमाघरों में जा कर फिल्मेंर नहीं देखती है, जिस तरह वे हिंदी फिल्मों  के लिए घर से बाहर निकली हैं और जहां कोई जाती भी हैं तो उनकी संख्या निराशाजनक है। ऐसे में हमने इस फिल्मह के रिलीज के दिन महिलाओं को सिनेमाघारों तक लाने के लिए ऐतिहासिक पहल कर रहे हैं। जिसके तहत भोजपुरी फिल्म  ‘आर पार के माला चढ़ईबो गंगा मईया’ के फर्स्टक डे, फर्स्टक शो का टिकट महिलाओं के सम्माोन में निरूशुल्कर होगा।
वहीं, फिल्मई के लेखक व निर्देशक गोपाल एस गुप्ता  ने कहा कि हमने भोजपुरी फिल्म  ‘आर पार के माला चढ़ईबो गंगा मईया’ की कहानी में फूहड़ता से तो परहेज किया ही है, साथ ही ऐसी फिल्मे बनाई है जिससे कोई भी अपने परिवार के साथ बैठ कर आसानी से देख सकता है। अपनी माटी की सुगंध को महसूस कर सकता है। फिल्मे की एक और खास बात ये है कि इसकी कहानी भारत सरकार के गंगा सफाई अभियान को भी सपोर्ट करता है। नमामि गंगे मिशन को फिल्मे के जरिए लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए भी संदेश एक संदेश है।
फिल्मे में मुख्य  भूमिका में शिवम तिवारी, श्वेलता मिश्रा, गोपाल राय, माया यादव, सब्रतो बनर्जी, गोपाल एस गुप्ताी, सी पी भट्ट, दिलीप सिन्हा, पुष्पाि वर्मा, समर्थ चतुर्वेदी सीमा सिंह और अभिलाषा हैं। फिल्मद    के गीत लिखे हैं आतिश जौनपुरी और गोपाल एस गुप्ताो ने, संगीतकार हैं सुभाष कन्नौ जिया और छायाकार हैं राहुल सक्से्ना।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
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