मुंशी प्रेमचंद्र की दो प्रसिद्ध कहानियों पर बनी राजपाल यादव की फिल्म ’भाग्य ना जाने कोई’ रिलीज़

रिपोर्ट राजू बोहरा,
इस शुक्रवार 24  नवंबर  को  अभिनेता  यादव की एक नई फिल्म ’भाग्य ना जाने कोई  ’उत्तर प्रदेश और एन.सी.आर के करीब एक दर्जन मल्टीप्लेक्स में प्रदर्शितहुई है जिसकी ज्यादातर शूटिंग उत्तर प्रदेश के लखनऊ, सहित अलग-अलग लोकेशन्स पर की गई है जो उत्तर प्रदेश के पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देगी। यह फिल्म हिन्दी के शेक्सपीअर कहे जाने वाले मुंशी प्रेमचंद्र की दो बेहद मशहूर कहानियों पर आधारित ”कफन“ और ”निर्मला“ हैं। दोनों कहानियां आज के समाज को बहुत बड़ा संदेश दे जाती है। उस वक्त के गांव, खेत-खलिहान और मुंशी प्रेमचंद्र के रचे साहित्य कोे निर्माता ने पूरी ईमानदारी से पर्दे पर उतारने की कोशिश की है। राजपाल यादव ने पहली बार इसमें एक गम्भीर किरदार किया है और इस फिल्म में उन्हें देखकर लगता है कि वो एक बहुत सशक्त अभिनेता हैं।
कहानी शुरू होती है गांव से, जहां दो निकम्मे बाप बेटे रहते हैं। जिनका ये मानना है कि अजगर करे ना चाकरी, पंछी करे ना काम, दास मलुका कह गये, सबके दाता राम … उन्हें लगता है कि ईश्वर ने पैदा किया है तो रोटी भी जरुर देगा और अपने निकम्मेपन की वजह से उन्हें किन किन दुश्वारियों से सामना करना पड़ता है। संदेष ये है कि इन्सान को कर्मवीर होना चाहिए तभी वो अपनी जिन्दगी को संवार सकता है। दूसरी कहानी में एक बहुत बड़े पैसे वाले वकील की बेटी है निर्मला जिसकी शादी बहुत बड़े घराने में होने वाली है लेकिन हालात ऐसे बनते हैं कि निर्मला की शादी एक ऐसे इन्सान के साथ होती है, जो चार बच्चों का बाप है और निर्मला की जिन्दगी सिर्फ और सिर्फ त्याग बनकर रह जाती है। संदेश ये है कि पैसे से किसी की तकदीर नहीं बदलती।
मुंशी प्रेमचंद्र के इन दोनों संदेषों को बड़ी खूबसूरती से एक ही फिल्म में समेटा गया है। फिल्म में स्क्रीप्टिंग, डायरेक्शन , एडिटिंग और अभिनय कहानी के हिसाब से हर कसौटी पर खरे उतरते हैं। स्टेट्स एयर विजन प्राईवेट लिमिटेड के बैनर से बनी इस फिल्म की निर्मात्री सुशीला भाटिया हैं जबकि निर्देशन की बागडोर दिलीप गुलाटी ने संभाला है लिखा है पारस जायसवाल ने। निर्मात्री सुशीला भाटिया लंबे अर्से से बतौर निर्मात्री सक्रिय है और दूरदर्शन के प्राइम टाइम और मिड प्राइम टाइम के लिए’’इम्तिहान’’ और ’’उम्मीद नई सुबह की’’जैसे लोकप्रिय डेली सीरियलों का निर्माण कर चुकी है। फिल्म की शूटिंग उत्तर प्रदेश के लखनऊ, की खूबसूरत लोकेशन्स में की गई है।
फिल्म भाग्य ना जाने कोई में राजपाल यादव, नेत्रा रघुरमन, साधु मेहर, राजीव वर्मा, रूपा मिश्रा, और अनीता सहगल जैसे चर्चित कलाकार मुख्य एवं अहम किरदारों में है। पिछले दिनों इसी टीम की बड़ी भोजपुरी फिल्म सांवरिया रंग दे रिलीज हुई है। इस फिल्म लिखा है पारस जायसवाल ने। फिल्म के निर्देशक दिलीप गुलाटी अपनी इस फिल्म के विषय को लेकर काफी खुश और उत्साहित है  क्योकि वो अब तक  हर तरह के विषय वाली फिल्मे डायरेक्ट कर चुके है।
raju vohra

About raju vohra

लेखक पिछले सोलह वर्षो से बतौर फ्रीलांसर फिल्म- टीवी पत्रकारिता कर रहे हैं और देश के सभी प्रमुख समाचार पत्रों तथा पत्रिकाओ में इनके रिपोर्ट और आलेख निरंतर प्रकाशित हो रहे हैं,साथ ही देश के कई प्रमुख समाचार-पत्रिकाओं के नियमित स्तंभकार रह चुके है,पत्रकारिता के अलावा ये बातौर प्रोड्यूसर धारावाहिकों के निर्माण में भी सक्रिय हैं। आपके द्वारा निर्मित एक कॉमेडी धारावाहिक ''इश्क मैं लुट गए यार'' दूरदर्शन के ''डी डी उर्दू चैनल'' कई बार प्रसारित हो चूका है। संपर्क - journalistrajubohra@gmail.com मोबाइल -09350824380
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