जनता अवसरवादी राजनीति को तरजीह देने वाली नहींः मंगल

जनता अवसरवादी राजनीति को तरजीह देने वाली नहींः मंगल पांडेय

अपनी पीठ खुद थपथपा तीस मार खान बन रहे नेता प्रतिपक्ष

पटना, 20 सितंबर। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने राजद नेता तेजस्वी यादव पर हमला बोलते हुए कहा है कि जनाधार खो चुके नेता प्रतिपक्ष इन दिनों पूरी तरह से बेरोजगार बैठे हैं। इसलिए फिर से जनता के बीच पैठ बनाने के लिए अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब जनता और सदन को उनकी जरूरत थी तो वे राष्ट्रीय राजधानी में मशखरे मार रहे थे। अब जब विस चुनाव करीब आया तो वे लोगों को तरह-तरह की बातांे में उलझा पुराने जख्मों को कुरेदने का काम कर रहे हैं, लेकिन जनता उनकी अवसरवादी राजनीति को तरजीह देने वाली नहीं है।
श्री पांडेय ने कहा कि लोस चुनाव के बाद विपक्ष के कुछ नेता राजनीतिक पटल से ओझल हो गये हैं। उनमें से एक नेता प्रतिपक्ष भी हैं। तेजस्वी विपक्ष का दायित्व नहीं निभा सरकार पर टीका-टिप्पणी कर बेवजह खलल डाल रहे हैं। यही नहीं अपनी पीठ खुद थपथपा अपने आप को तीस मार खान समझ रहे हैं। उन्हें मालूम होना चाहिए कि उनके परिवार के पंद्रह वर्षों के शासन की तुलना में एनडीए के 14 वर्षों के शासन में बिहार प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। उनके परिवार के शासनकाल में जमा किए गए कचरे को न सिर्फ साफ किया गया बल्कि कानून का राज स्थापित किया गया।
श्री पांडेय ने कहा कि बिहार की जनता को वो दिन भी याद है, जब सरकारी अस्पतालों में मरीज की जगह जानवर रहता था। संसाधनों और दवाओं के पैसे से नेता और बाबुओं के बच्चे का परवरिश होता था। आज जब एक-एक संस्थानों को संसाधनों से सुसज्जित किया जा रहा है तो, उन्हें टीस हो रही है। तेजस्वी को याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि आपके माता-पिता ने अपने-अपने शासनकाल मंे न सिर्फ स्वास्थ्य बल्कि सभी विभागों का बंटाधार कर दिया था। आज जब सरकार लोगों को बेहतर तरीके से मूलभूत सुविधाएं मयस्सर करवा रही है तो आपको हजम नहीं हो रहा है।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
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