वेब सीरीज नंदू की टोली में बाल विवाह के खिलाफ मुहिम चलाएंगे कुणाल मित्तल

कुणाल मित्तल

तेवर ऑनलाइन, मुंबई।  कई छोटी बड़ी फिल्मों में काम करने के साथ साथ मॉडलिंग की दुनिया में भी अपनी विशेष पहचान वाले कुणाल मित्तल भले ही कुछ समय के लिए अभियन की दुनिया दुनिया से दूर हो गये थे लेकिन अभियन उनका पीछा नहीं छोड़ रही है। एक बार फिर वह बॉलीवुड में मजबूती से दस्तक दे रहे हैं। एक्टिंग और मॉडलिंग में तो हाथ आजमा ही रहे हैं साथ ही वेब सीरिज के जरिये भी दर्शकों को गुदगुदाने की तैयारी कर रहे हैं। कुणाल मित्तल का जुड़ाव धनबाद से है और इनका परिवार व्यवसायियों का परिवार है। ऐसे परिवार में अभिनय के बजाये व्यवसाय पर जोर दिया जाना स्वाभाविक है। यही वजह रही कि अभिनय में गहरी दिलचस्पी होने और इस क्षेत्र में कई डग भऱने के बावजूद उन्हें कुछ समय के लिए अपने पैतृक व्यवसाय की ओर लौटना पड़ा। इस मोर्चे पर सबकुछ दुरुस्त करने के बाद एक बार फिर वह अपने पहले प्रेम अभिनय की ओर लौट रहे हैं। प्रस्तुत है उनसे की गई बातचीत के प्रमुख अंश-

प्रश्न : अपनी भावी योजनाओं के बारे मे बताये।

उत्तर : इस बार पूरी गंभीरता से मैं वेब सीरीज पर काम कर रहा हूं। मैं चाहता हूं कि जब लोग दिनभर के काम के बाद घर लौटे तो सुकून के साथ घर में बैठकर अपना मनोरंजन कर सके। इसलिए मैं खासतौर से कॉमेडी पर आधारित वेब सीरीज बना रहा हूं। इस वेब सीरीज का नाम है नंदू की टोली। चुंकि मेरी पृष्ठभूमि बिहार और झारखंड से है इसलिए नंदू की टोली में भी बिहार और झारखंड की ही पृष्ठभूमि को लिया गया है। इसकी कहानी  16 साल के नंदू और उसकी टोली की है। उसकी टोली के की कम उम्रे के बच्चों की शादी हो जाती है जिसकी वजह नंदू परेशान रहता है। ”

प्रश्न : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कमउम्र की शादी के खिलाफ पूरे राज्य में मुहिम चला रहे हैं और इस इसे लेकर कॉमेडी वेब सीरीज बना रहे हैं। इससे कोई मैसेज भी देना चाहते हैं या यह बस मनोरंजन के लिए बना रहे हैं?

उत्तर : नंदू और उसकी टोली के जरिये समाज को एक स्ट्रॉंग मैसेज दे रहे हैं कि कम उम्र की शादी कभी भी बेहतर नहीं होती है। बच्चों की शादी सही उम्र में ही करनी चाहिए। अब कम उम्र के भोले भाले बच्चों की शादी करने का क्या औचित्य है, इस पर कॉमेडी के जरिये सवाल उठाया जा रहा है।

प्रश्न : इसके अलावा और क्या कर रहे हैं ?

उत्तर: कैसिनो गेम पर आधारित एक फिल्म पर भी काम चल रहा है। एक गणितज्ञ अपने सवालों को हल करने के लिए एक नंबर गेम बनाता है। उसका एक जरुरतमंद शिष्य उस नंबर गेम को चुरा लेता है और उसे कई मुल्कों के लोगों को बेचने की कोशिश करता है।  इसमें चीन, फ्रांस, जापान जैसे देश के लोग भी शामिल होते हैं। लेकिन सौदा रूसी माफियाओं के साथ होता है। रुसी माफिया उस नंबर गेम का इस्तेमाल जुआघरों में करते हैं। इससे घर के घर तबाह होने लगते हैं। इस बात की जानकारी जब गणितज्ञ होती है तब खुद को इसके जिम्मेदार मानते हुये आत्महत्या कर लेता है। इस फिल्म में मैं गणितज्ञ के शिष्य का किरदार निभा रहा हूं।

प्रश्न: आपके पसंदीदा हीरो कौन है और क्यों है ?

उत्तर : आमिर खान। हर काम को वह बेहतर तरीके से करते हैं। सही मायने में वह परफेक्शनिस्ट हैं। जब तक वह खुद से संतुष्ट नहीं हो जाते तब तक लगे रहते हैं। इनके साथ ही मनोज वाजपेयी, राजपाल यादव और पंकज तिवारी के अभिनय को भी मैं काफी पसंद करता हूं। ये सब मेरे चहेते कलाकाल हैं।

प्रश्न : आप व्यवसायिक परिवार से हैं, फिर अभिनय की दुनिया में कैसे आ गये ?

उत्तर: हमारी जड़े धनबाद से जुड़ी हुई हैं लेकिन परिवार दिल्ली में रहता है। दिल्ली के श्रीराम सेंटर में हर साल रामलीला होता था। एक बार अपने दोस्तों के साथ मैं रामलीला देखने गये। मुझे काफी अच्छा लगा। फिर श्री रामसेंटर के थियेटर क्लास  में शामिल हो गया। तकरीबन डेढ़ साल तक वहां नाटकों से जुड़ा रहा। खासतौर से सूत्रधार की भूमिका निभाता रहा। वहां मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
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