पटना की बाढ़ त्रासदी पर जगदानंद दागे नीतीश पर कई सवाल

प्रेस के जरिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पटना जल संकट पर सवाल पूछते राजद के वरिष्ठ नेता जगदानंद

पटना, तेवर ऑनलाइन।
राजद के वरिष्ठ नेता सह पूर्व सांसद जगदानंन सिंह ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि नीतीश जी आपके द्वारा पटना में जलजमाव या
जलभराव पर पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल पर आपको आश्चर्यजनक जबाब देते सुना था। मगर उस समय कष्ट में पड़ी आबादी की समस्या से कैसे निजात मिले या आप दे सके या दिलवा सके इसलिए इंतजार करना बेहतर समझा।अभी भी पटना के लोग कष्ट में है। मगर पानी अधिकांश इलाके से निकाला जा चुका है या अंतिम चरण में निकासी है। मैं आपसे या आपके माध्यम से निम्न बाते जानना चाहता हूँ । यदि आप जबाब दे सके तो लोगो को सच्चाई मालूम हो सकेगा।
1 -क्या यह बाढ़ का पानी था या वर्षा का पानी था ।
2 -वर्ष 1975 में पटना में गंगा,  पुनपुन और सोन नदी के पानी का बाढ़ था या यह कह सकते थे कि मुख्यतः सोन नदी के पानी का बाढ़ था, जिसमें पटना डूब गया था। क्या यह सच नहीं है की तत्कालीन सरकार ने केवल एक वर्ष के अंदर पटना को गंगा, पुनपुन एवं सोन नदी के बाढ़ से बचाने के लिए सुरक्षा तटबंध बनाकर पटना के लोगों को सुरक्षा प्रदान कर दिया था। जिसके कारण पटना बाढ़
मुक्त हो चुका है जो 40.42 वर्षो से साबित है।
3 – मगर इसका दूसरा प्रभाव यह पड़ा है कि पटना के सभी सुरक्षा बांध पटना को एक कटोरेनुमा भौगोलिक स्वरूप प्रदान कर दिया है।
4 -एक कटोरे के रूप में परिवर्तित पटना को बचाने के लिए मात्र एक उपाय है कि जब गंगा एवं सोन नदी में पानी का स्तर ऊंचा हो तो थ्सववक ैसनपबम बंद कर दिया जाय तथा पम्पिंग स्टेशन के माध्यम से पटना के भीतर वर्षा के पानी को पंप कर के गंगा नदी में डाल दिया जाए।
5 -इस वर्ष पटना में बाढ़ के समय अधिकांश पम्पिंग स्टेशन खराब थे। चालू पंप सेट भी विलम्ब से चलाये गए साथ ही उन्हें पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा था। क्योंकि नालों की उड़ाही हुई ही नहीं थीए आपका तंत्र यथा नगर विकास मंत्री और पटना के महापौर भी कबुल कर रहै है कि करोडों रुपये उड़ाही के नाम पर अपव्यय हुआ।
6 -क्या इस वर्ष का वर्षापात पूर्व के वर्षो में हुई वर्षा के अधिकतम
रिकॉर्ड से अधिक था घ् यदि नहीं तो जलभराव एवं जलजमाव राजधानी के नागरिकों के लिए क्यों कष्टकारी बन गया ।
7 – जलनिकासी के बने नालों में लगे पानी निकासी के सभी पम्पिंग स्टेशन की समेकित क्षमता से क्या इस वर्ष का वर्षापात अधिक था घ्
8 – यदि पम्पिंग स्टेशन की जलनिकासी की क्षमता से वर्षा अधिक होना साबित है तो शायद आपको पटना की जनता क्षमा कर सकती है नहीं तो यह कष्टकारी
जलजमाव आपकी सरकार को माफ करने लायक नहीं है।
9 – पत्रकारों के समक्ष पटना की वर्षा की तुलना मुम्बई में हुई वर्षा से
कर रहे थे मगर आप भूल गए की पटना एवं मुम्बई की जलनिकासी में अंतर है। मुम्बई में जलनिकासी के लिए बने नालों के द्वारा ग्रेविटी फ्लो से निकलते हैं ।ए वहाँ पम्पिंग स्टेशन के द्वारा जलनिकासी नहीं होती है मगर पटना की जलनिकासी बने पम्पिंग स्टेशन के माध्यम से होती है जो पटना नगर के विस्तारित क्षेत्र के पानी के निकालने के लिए पर्याप्त है इसीलिए कृपया आपको दोनो की तुलना से बचना चाहिए ।
10 – नीतीश जी बिहार में बाढ़ का नियंत्रण सरकार के हाथों में पूर्णतः
नहीं है इसीलिए बाढ़ प्रभावित लोग आपको कहाँ दोषी कह रहे है घ् उलटे पटना के बाढ़ से आपको मदद मिला है की कोशी त्रासदी की तरह राज्य खजाने एवं केंद्रीय अनुदान से लोगो को राहत देकर पुनः अपनी जय.जयकार करा लेंए चाहे
पटना में बाढ़ आने के कारण आप स्वयं हो तो फिर भी अपने को उदार एवं संवेदनशील मुख्यमंत्री साबित कर ले।
11- पटना नगर की वर्तमान त्रासदी से आप असत्य बोलकर नहीं बच सकते है।पानी निकल रहा है या नहीं भी निकलेगा तो कुछ दिनों में अपने आप सुख जाएगा लेकिन 9.10 दिनों से अधिक कष्टकारी जीवन जीने के लिए बाध्य पटना नगरवासी साथ ही राज्य की संवेदनशील जनता के समक्ष ओढ़ी तथा प्रचारित हुई आपकी क्षमता बेनकाब हो चुकी है इसीलिए आपके सहयोगी भी आपको नापसंद करने लगे है जिन्हें आपके इशारे पर आपके कुतर्क करने वाले लोग पटना के आम लोगो को
मनमानी ढंग से मौन कराने का प्रयास कर रहे है।
इस बार लोगो का मन तथा हृदय घायल है। लोगों में पल रहा आपके प्रति भ्रम टूट चुका है। जिन प्रचार तंत्रों ने आपको क्षमतावानए प्रतिभावान प्रचारित करने में सभी  मर्यादाओं को तोड़कर रख दिया था उनपर खीज उतारने तथा क्रोधित होने के बदले अपने तथा अपने तंत्र की असफलता को शायद आप
काबुल कर लेते तो आपकी असफलता का अपराध कम हो गया होता फिर भी मैंने जिन प्रश्नों को उठाया है उसका तकनीकी जबाब तलाशने के प्रयास करेंगे तो शायद
आपका दोष कुछ कम हो जाएगा अन्यथा उत्तर आप नहीं देंगे तो भी अनुत्तरित प्रश्न जनता का प्रश्न बन जाएगा जो आपके वर्तमान एवं भविष्य के लिए घातक
साबित होगा।   संवाददाता सम्मेलन में प्रदेष उपाध्यक्ष डाॅ0 तनवीर हसन, प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन, प्रदश महासचिव निराला यादव, दस्तकार प्रकोष्ठ के अध्यक्ष मदन शर्मा एवं प्रदेष सचिव निर्भय अम्बेदकर उपस्थित थे।
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पटना की बाढ़ त्रासदी पर जगदानंद दागे नीतीश पर कई सवाल
पटना, तेवर ऑनलाइन।
राजद के वरिष्ठ नेता सह पूर्व सांसद जगदानंन सिंह ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि नीतीश जी आपके द्वारा पटना में जलजमाव याजलभराव पर पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल पर आपको आश्चर्यजनक जबाब देते सुना था। मगर उस समय कष्ट में पड़ी आबादी की समस्या से कैसे निजात मिले या आप दे सके या दिलवा सके इसलिए इंतजार करना बेहतर समझा।अभी भी पटना के लोग कष्ट में है। मगर पानी अधिकांश इलाके से निकाला जा चुका है या अंतिम चरण में निकासी है। मैं आपसे या आपके माध्यम से निम्न बाते जानना चाहता हूँ । यदि आप जबाब दे सके तो लोगो को सच्चाई मालूम हो सकेगा।
1 -क्या यह बाढ़ का पानी था या वर्षा का पानी था ।2 -वर्ष 1975 में पटना में गंगा,  पुनपुन और सोन नदी के पानी का बाढ़ था या यह कह सकते थे कि मुख्यतः सोन नदी के पानी का बाढ़ था, जिसमें पटना डूब गया था। क्या यह सच नहीं है की तत्कालीन सरकार ने केवल एक वर्ष के अंदर पटना को गंगा, पुनपुन एवं सोन नदी के बाढ़ से बचाने के लिए सुरक्षा तटबंध बनाकर पटना के लोगों को सुरक्षा प्रदान कर दिया था। जिसके कारण पटना बाढ़मुक्त हो चुका है जो 40.42 वर्षो से साबित है।3 – मगर इसका दूसरा प्रभाव यह पड़ा है कि पटना के सभी सुरक्षा बांध पटना को एक कटोरेनुमा भौगोलिक स्वरूप प्रदान कर दिया है।4 -एक कटोरे के रूप में परिवर्तित पटना को बचाने के लिए मात्र एक उपाय है कि जब गंगा एवं सोन नदी में पानी का स्तर ऊंचा हो तो थ्सववक ैसनपबम बंद कर दिया जाय तथा पम्पिंग स्टेशन के माध्यम से पटना के भीतर वर्षा के पानी को पंप कर के गंगा नदी में डाल दिया जाए।5 -इस वर्ष पटना में बाढ़ के समय अधिकांश पम्पिंग स्टेशन खराब थे। चालू पंप सेट भी विलम्ब से चलाये गए साथ ही उन्हें पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा था। क्योंकि नालों की उड़ाही हुई ही नहीं थीए आपका तंत्र यथा नगर विकास मंत्री और पटना के महापौर भी कबुल कर रहै है कि करोडों रुपये उड़ाही के नाम पर अपव्यय हुआ।6 -क्या इस वर्ष का वर्षापात पूर्व के वर्षो में हुई वर्षा के अधिकतमरिकॉर्ड से अधिक था घ् यदि नहीं तो जलभराव एवं जलजमाव राजधानी के नागरिकों के लिए क्यों कष्टकारी बन गया ।7 – जलनिकासी के बने नालों में लगे पानी निकासी के सभी पम्पिंग स्टेशन की समेकित क्षमता से क्या इस वर्ष का वर्षापात अधिक था घ्8 – यदि पम्पिंग स्टेशन की जलनिकासी की क्षमता से वर्षा अधिक होना साबित है तो शायद आपको पटना की जनता क्षमा कर सकती है नहीं तो यह कष्टकारीजलजमाव आपकी सरकार को माफ करने लायक नहीं है।9 – पत्रकारों के समक्ष पटना की वर्षा की तुलना मुम्बई में हुई वर्षा सेकर रहे थे मगर आप भूल गए की पटना एवं मुम्बई की जलनिकासी में अंतर है। मुम्बई में जलनिकासी के लिए बने नालों के द्वारा ग्रेविटी फ्लो से निकलते हैं ।ए वहाँ पम्पिंग स्टेशन के द्वारा जलनिकासी नहीं होती है मगर पटना की जलनिकासी बने पम्पिंग स्टेशन के माध्यम से होती है जो पटना नगर के विस्तारित क्षेत्र के पानी के निकालने के लिए पर्याप्त है इसीलिए कृपया आपको दोनो की तुलना से बचना चाहिए ।10 – नीतीश जी बिहार में बाढ़ का नियंत्रण सरकार के हाथों में पूर्णतःनहीं है इसीलिए बाढ़ प्रभावित लोग आपको कहाँ दोषी कह रहे है घ् उलटे पटना के बाढ़ से आपको मदद मिला है की कोशी त्रासदी की तरह राज्य खजाने एवं केंद्रीय अनुदान से लोगो को राहत देकर पुनः अपनी जय.जयकार करा लेंए चाहेपटना में बाढ़ आने के कारण आप स्वयं हो तो फिर भी अपने को उदार एवं संवेदनशील मुख्यमंत्री साबित कर ले।11- पटना नगर की वर्तमान त्रासदी से आप असत्य बोलकर नहीं बच सकते है।पानी निकल रहा है या नहीं भी निकलेगा तो कुछ दिनों में अपने आप सुख जाएगा लेकिन 9.10 दिनों से अधिक कष्टकारी जीवन जीने के लिए बाध्य पटना नगरवासी साथ ही राज्य की संवेदनशील जनता के समक्ष ओढ़ी तथा प्रचारित हुई आपकी क्षमता बेनकाब हो चुकी है इसीलिए आपके सहयोगी भी आपको नापसंद करने लगे है जिन्हें आपके इशारे पर आपके कुतर्क करने वाले लोग पटना के आम लोगो कोमनमानी ढंग से मौन कराने का प्रयास कर रहे है।         इस बार लोगो का मन तथा हृदय घायल है। लोगों में पल रहा आपके प्रति भ्रम टूट चुका है। जिन प्रचार तंत्रों ने आपको क्षमतावानए प्रतिभावान प्रचारित करने में सभी  मर्यादाओं को तोड़कर रख दिया था उनपर खीज उतारने तथा क्रोधित होने के बदले अपने तथा अपने तंत्र की असफलता को शायद आपकाबुल कर लेते तो आपकी असफलता का अपराध कम हो गया होता फिर भी मैंने जिन प्रश्नों को उठाया है उसका तकनीकी जबाब तलाशने के प्रयास करेंगे तो शायदआपका दोष कुछ कम हो जाएगा अन्यथा उत्तर आप नहीं देंगे तो भी अनुत्तरित प्रश्न जनता का प्रश्न बन जाएगा जो आपके वर्तमान एवं भविष्य के लिए घातकसाबित होगा।   संवाददाता सम्मेलन में प्रदेष उपाध्यक्ष डाॅ0 तनवीर हसन, प्रदेश प्रवक्ता चितरंजन गगन, प्रदश महासचिव निराला यादव, दस्तकार प्रकोष्ठ के अध्यक्ष मदन शर्मा एवं प्रदेष सचिव निर्भय अम्बेदकर उपस्थित थे।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
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