आंख के आंधर, नाम नयन सुख वाली स्थिति में हैं तेजस्वी: मंगल पांडेय

पटना। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय  ने कहा कि भोजपुरी में एक कहावत है ‘आंख के आंधर, नाम नयनसुख’ और यह कहावत आज प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पर सटीक बैठता है। सच उन्हें दिखाई नहीं देता और झूठ का बवंडर बांधते हैं। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष को उनके माता-पिता का 1990 से 2005 का शासनकाल याद दिलाते हुए कहा कि 15 साल में शिक्षा और स्वास्थ्य का मटियामेट और जगह-जगह चरवाहा विद्यालय खोल सरकारी राशि का बंदरबांट करने वाले शिक्षा और स्वास्थ्य पर प्रश्न चिह्न खड़ा कर लोगों को दिग्भ्रमित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष नासमझ और लावरवाह हैं। सूबे की जनता के साथ गैर जिम्मेवाराना व्यवहार करते हैं। संकट की घड़ी में घर से भाग जाना या फिर घर में बंद होना इनकी फितरत बनी हुई है।

मंगल पांडेय ने कहा कि बयान देने वालों को आज तक मुजफ्फरपुर जाने का समय क्यों नहीं मिला। मुजफ्फपुर में इस वर्ष एइएस हास्पीटल में भर्ती चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों को देखने आज तक क्यों नहीं गये। चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों से मिलने का उनके पास एक मिनट का भी समय नहीं है, लेकिन पटना में कमरे में बंद होकर बेफजूल की बयानबाजी से बाज नहीं आते हैं। राजद शासनकाल में स्वास्थ्य सेवा का यह हाल था कि मेडिकल कालेज अस्पताल में रोगियों की संख्या शतक भी नहीं लगा पाती थी। ब्लॉक स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तो रोगियों की संख्या प्रतिदिन 2 भी पार नहीं कर पाती थी, जो आज प्रतिदिन 3 सौ से अधिक हो गयी है। एनडीए की सरकार में ब्लॉक स्तर से लेकर जिला मुख्यालय के अस्पतालों में आउटडोर और इमरजेंसी सेवा में रोगियों की भरमार रहती है। मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों में भी रोगियों का आना बदस्तूर जारी है। यही नहीं उनका सही ढंग से इलाज हो रहा है और वे स्वस्थ एवं संतुष्ट होकर जा रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था की हालत यह है कि राजद शासनकाल में शिक्षकों को सालों-साल वेतन नहीं मिलता था। स्कूल में छात्रों की संख्या नगण्य थी, लेकिन एनडीए सरकार ने योजनबद्ध तरीके से प्राथमिक और उच्च शिक्षा को सम्मानजनक स्थिति में पहुंचाया। छात्र-छात्राओं की उपस्थिति बढ़ायी और लाखों शिक्षकों को बहाल किया। आज शिक्षकों को नियमित वेतन भी दिया जा रहा है और छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहन के साथ-साथ योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है।
कोरोना की चर्चा करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि बिहार में रैपिड एन्टीजेन टेस्ट किट से संक्रमितों की जांच विभिन्न जिलों में शुरु हो गयी है। विभिन्न जिलों में 40 हजार से ज्यादा किट पहुंच गये हैं। इस किट से महज आधा घंटा में संक्रमण की जांच हो जाती है। उन्होंने बताया कि अभी तक प्रतिदिन 9 हजार से अधिक लोगों की जांच की जा रही है और यह कार्य जिले के अस्पतालों में भी निरंतर जारी है। उन्होंने बताया कि बिहार में कोरोना से स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या 73 फीसदी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार में कोरोना संक्रमितों के इलाज की दिशा में सरकार पूरी तरह सचेत है।

editor

About editor

सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
This entry was posted in पहला पन्ना. Bookmark the permalink.

Comments are closed.