महान कवि की कविता

ऊंची इमारत की ऊपरी मंजिल पर

लिखी जाने वाली कविताओं में

अब हिन्दुस्तान का बोध नहीं होता

शब्द गमगीन की जगह

सौंदर्य से भरे होते हैं

वातावरण खुशनुमा होता है

कवि की बगल में चार-चार युवतियां खड़ी रहती हैं

कवि को पसंद है युवतियों को निहारना

बातें करना, जिस्मों को सहलाना

आजकल महान कविताएं

इसी प्रक्रिया से निकलती हैं

अब उसे अच्छा नहीं लगता

किसी गरीब की झोपड़ी

भूखे पेट इंसान की तस्वीर

अनाथ बच्चे और उनकी चिल्लाहट

उसे पसंद नहीं धरती की नीचता

दलदल पर बना व्यक्तित्व

इन चीजों में अब ऊंचाई नहीं रही

ऊंचाई तो महलों में है

जहां लिखी जाने वाली कविताओं को

सरकार चयन करती है

पुरस्कार देने के लिए।

(काव्य संग्रह संगीन के साये में लोकतंत्र से)

निर्भय देवयांश

About निर्भय देवयांश

यदि मैं यह कहूं कि यह देश बीमार है तो इसमें क्या बुरा है? यदि मैं यह कहूं कि यह देश भिखमंगा है तो यह हकीकत है और यदि मैं मानता हूं कि गरीबी ने दर्जनों लोगों को मौत की नींद सुला दी है तो इसमें आश्चर्य वाली बात क्या है? औरों की तरह यह मेरा अधिकार है मैं जैसा चाहूं अपने देश की तस्वीर बनाऊं।
This entry was posted in लिटरेचर लव. Bookmark the permalink.

One Response to महान कवि की कविता

  1. Resources this kind of as the 1 you mentioned here will be incredibly useful to myself! I’ll publish a hyperlink to this web page on my private weblog. I’m sure my site website visitors will locate that very helpful.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <strike> <strong>