चुनाव आचार संहिता की वाट लगा रही है बिहार सरकार की साइटें

तेवरआनलाईन टीम, पटना

मीडिया के प्रति नीतीश कुमार का प्रेम हर आमो खास जानता है। उनके पूर्ववर्तियों ने मीडिया को नियंत्रित करने के लिए काफी मगजमारी की थी।  दारु-नाच-गाना से लेकर गाँधी दर्शन के हज़ार कार्यक्रमों के बावजूद वे वो नहीं कर पाए जो नीतीश सरकार के एक बदलाव ने कर दिया। वह बदलाव था सारे सरकारी विज्ञापनों को सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी करने का।  इस बदलाव से  नीतीश सरकार मीडिया के गले में पट्टा डालने में पूरी तरह से सफल रही और देखते ही देखते मीडिया जगत उनके इशारों पर बंदर  और भालू की तरह ठुमके दिखाने लगा। चूंकि मीडिया पूरी तरह से मुनाफाखोर मालिकों के हाथ में है, ऐसे में पत्रकारिता के मूलभूत सिद्धांथो की वाट लगाते हुये नीतीश सरकार सीधे मालिकों को डील करने लगी, और मालिकों ने बिहार में  तमाम मीडिया में ऊंचे पदों पर बैठे लोगों को स्पष्ट संकेत दे दिया कि वे किसी भी कीमत पर सरकारी विज्ञापन से हाथ धोना नहीं चाहते। और इस तरह से मीडिया का गला नीतीश सरकार के हाथ में आ गया। दिल्ली के  एक बड़े संपादक को अपने मालिकान के हुक्म से खुद नीतीश के दरबार में आकर घंटों बैठना पड़ा था, तब जाकर उनसे नीतीश से मुलाकात हुई थी।    

जिस मीडिया समूह ने भी इस सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाने (यानी सच बोलने) कि हिम्मत की उसको दी जाने वाली सरकारी विज्ञापन पर वहाँ के बाबू लोग कुंडली मार कर बैठ गए। कुछ छुटभैये अख़बारों ने यहां  व्याप्त भ्रष्टाचार पर ऊँगली उठाने कि कोशिश भी कि तो उनकी आवाज़ नक्कारखाने में तूति बन कर रह गयी। तेवर टीम के हाथ कुछ ऐसे रिपोर्ट लगे हैं, जिसमें साफ़ साफ़ शब्दों में अवैध कमाई करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ टिपण्णी कि गयी है।

ज्ञातव्य है की  चुनाव आयोग द्वारा आदर्श अचार संहिता लगने के साथ ही सरकारी खर्चे पर सत्तारूढ़ दल के हित में किये जाने वाले प्रचार प्रसार पर रोक लग जाती है। इसे समझने के लिए आयोग द्वारा जारी दिशा निर्देश का यह पार्ट देखने योग्य है।

8. (iv) Issue of advertisement at the cost of public exchequer in the newspapers and
other media and the misuse of official mass media during the election period for
partisan coverage of political news and publicity regarding achievements with a
view to furthering the prospects of the party in power shall be scrupulously
avoided.

सत्तारूढ़ दल द्वारा  लागू मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट की जानकारी के लिए इस लिंक को देखें.

लेकिन सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोग के दिशानिर्देशों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन किया जा रहा है। कहने को This Feature has been disabled due to Bihar Vidhan Sabha Election 2010  का बोर्ड लगा दिया गया है, लेकिन इन पर अभी भी नीतीश सरकार  का गुणगान जारी है।  एक नजर आप भी चाहे तो इन लिंकों पर मार सकते हैं- 

 वीडियो गैलरी

  1. बदलता बिहार बढ़ता बिहार
  2. मुख्यमंत्री बीज विस्तार योजना
  3. मुख्यमंत्री बालिका पोषक योजना
  4. मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना

नितीश कुमार द्वारा जारी रिपोर्ट कार्ड यहाँ देखें

  1. पूरी रिपोर्ट कार्ड
  2. हिंदी में
  3. इंग्लिश में

सरकार के स्तुति गान के लिए प्रकाशित पत्रिका कि झलकियां

  1. इंग्लिश में

इस बाबत तेवरआनलाईन ने निदेशक गणेश प्रसाद  से बात करने कि कोशिश की तो उन्होंने इससे अनभिज्ञता जताते हुए इसके लिए इलेक्ट्रोनिक इंजिनियर विजय कुमार से बात करने कि सलाह दी। विजय कुमार ने पल्ला झाड़ते हुए सारी जिम्मेदारी सचिव राजेश भूषण पर थोप दिया और कहने लगे कि  मीडिया इंडस्ट्री में रहना है तो हमसे बैर मत पालो। अभी-अभी मैंने इसी कारण पुराने वेबसाइट वालों को विदा कराया है। अभी वेबसाइट का काम चल रहा है नए लोग हैं सीख जायेंगे। तो क्या क्या जब नये लोग सीख कर आएंगे तब चुनाव आचार संहिता का पालन लोगा? विजय कुमार की बातों से तो यही लगता है या तो उनकी अक्ल घास चरने चली गई है या फिर वे तमाम सरकारी संसाधनों को अपने घर की लौंडी समझ रहे हैं,  जिसका जैसे मन  करे इस्तेमाल करो। कारण चाहे जो हो, बिहार सरकार की तमाम साइटें चुनाव आचार संहिता की वाट लगा रही हैं।  

जिरह करने की स्थिति में विजय कुमार बिदक गये, और धमकाते रहे। इस मामले में तेवरआनलाईन की टीम ने बहुत सारे तथ्य और जानकारियां एकत्रित की है, जिसमें सरकारी तंत्रो के दुरुपयोग की बात तो सामने आ ही रही है, साथ में सरकारी कर्मचारी लोग अवैध तरीके से मोटी कमाई भी कर रहे हैं। शीघ्र ही इस संबंध में  तेवरआनलाईन विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने जा रहा है। इस बीच ऊपर दिये गये लिंक पर देखा जा सकता है कि कैसे आर्दश आचार संहिता को अभी से बिहार सरकार तार-तार कर रही है।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
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2 Responses to चुनाव आचार संहिता की वाट लगा रही है बिहार सरकार की साइटें

  1. यह कोई नयी बात तो आप कह नहीं रहे अलोक भाई. मीडिया तो बिहार में लौंडी बन ही गयी है. अगर आप गहराई से छान-बिन करें तो सूचना विभाग में इतनी गन्दगी मिलेगी कि राज कपूर साहेब कि राम तेरी गंगा मैली भी शर्मा जाए. मुझे तो शक है कि मीडिया ही नहीं इन लोगों ने चुनाव आयोग को भी खरीद रखा है. बेचारे लालू यादव सही में भैंस कि अकल के आदमी हैं उनके लोगों ने सत्ता का दुरूपयोग किया और बेचारे जेल कि हवा खा आये. इस सरकार में तो हर नेता हर अधिकारी भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा है. नितीश जी को जितनी जल्दी अकल आ जाये उनके लिए बेहतर होगा. मीडिया पर ज्यादा भरोसा उनको उनकी लुटिया भी भाजपा के इंडिया शाइनिंग कि तरह डूबा देगी. जितना दावा वो (बल्कि उनके अधिकारी) कर रहे हैं उसके लिए उनको बहुत दूर जाने कि जरूरत नहीं है, पटना के आस पास के इलाके में ही जाकर देख लें उनके दावों कि कलई खुल जायेगी.

    बहरहाल आपको बधाई आपने उस साहस का परिचय दिया है जो अलोक तोमर साहेब सबकी बखिया उधेड़ कर देते रहते हैं. इस चुनाव पर अपनी नज़र रखें और हम पाठकों को सच का सामना कराते रहें.

  2. Pingback: खबर का असर : चुनाव आयोग ने सूचना एंव जनसंपर्क विभाग से जवाब तलब किया | Tewar Online

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