जगदेव बाबू की पुनपुन परियोजना को साकार किया : मुन्द्रिका सिंह यादव

(मुन्द्रिका सिंह यादव से अनिता गौतम की खास बातचीत)

 वर्तमान में राष्ट्रीय जनता दल में किसान सेल के प्रदेश अध्यक्ष मुन्द्रिका सिंह यादव का राजनीतिक जीवन काफी उतार चढ़ाव भरा रहा है। उनके आत्मविश्वास और लगन ने उन्हें आज इस मुकाम पर पहुंचाया है जहां से वे अपने को सीधे आमजन से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। अपने स्कूली जीवन से ही गरीबों पिछड़ों के लिए उनके मन में कुछ करने की इच्छा थी। आगे जाकर 1985 में सरकारी सेवा से इस्तीफा कर राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखने वाले श्री यादव ने शोषित समाज दल जैसी क्षेत्रीय पार्टी से चुनाव में कुर्था विधानसभा सीट से जनता के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। नौकरी परित्याग, परिवार का विरोध, पत्नी के आंसू, पिता की फटकार, फिर भी प्रदेश के लिए कुछ करने का जज्बा। तमाम विरोधाभास के बावजूद श्री यादव ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। साथ बैठी उनकी पत्नी ने बताया कि जब इन्होंने नौकरी छोड़ी तो घर में एक तुफान सा आ गया। मेरे तो आंसुओं से गीले आंचल सूखते ही नहीं थे। फिर भी मैंने इनको पूरा सहयोग करने की ठानी।

1988 में जब कर्पूरी ठाकुर के नेतृत्व में लोकदल का निर्माण हुआ तो उन्होंने अपने सहयोगी और समर्थकों के साथ उस पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। 1990 के विधानसभा चुनाव में जनता दल के टिकट पर कुर्था से चुनाव जीताकर वहां की जनता ने उन्हें बिहार विधानसभा में पहुंचाया। लालू प्रसाद के नेतृत्व में जब सरकार का गठन हुआ तो उन्हें स्वास्थ्य मंत्री के पद पर आसीन किया गया । मंत्रीपद पर रहने के बावजूद उन्होंने क्षेत्र की जनता को नहीं भुलाया। पूरे पांच वर्षों तक वे मंत्री रहे। परन्तु विभागीय जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने अपने क्षेत्र के लिए अनवरत काम किया।

उनका अपना पैतृक गांव सोनभद्र जिसने आजादी के 50-55 वर्षों में भी विकास का मुंह नहीं देखा था, सुदूर देहाती इलाका जहां बिजली पानी तो दूर कच्ची सड़क भी ढंग से नहीं थी। श्री यादव ने अपनी मेहनत, लगन और बुलंद आवाज से उस क्षेत्र को प्रखंड बनाकर वहां की जनता को उनकी वांछित सुविधाएं मुहैया कराई।

लालू सरकार में मंत्री रहते उन्होंने मध्य बिहार की खेती युक्त भूमि जिसका बहुत बड़ा भू-भाग सिंचाई से वंचित था को हमीद नगर पुनपुन सिंचाई परियोजना को कार्यान्वित करा कर एक बड़ी आबादी को तोहफा दिया। इस सिंचाई परियोजना को श्री यादव अपने राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं। उनके अनुसार शोषितों दलितों के मसीहा जगदेव बाबू अपने राजनीतिक जीवन में हमेशा इस योजना के लिए संघर्ष करते रहे। 1969 में जगदेव बाबू जब सिंचाई, बिजली एंव नदी घाटी योजना मंत्री बने तो इस योजना को स्वीकृति दी गई, जिसे बाद वाली सरकार ने अस्वीकृत कर दिया था। उन्होंने बताया कि वे सभी जगदेव बाबू के नेतृत्व में नारा लगाया करते थे,  पुनपुन में पक्का बांध लगायेंगे,

मछली भात खिलाएंगे।

5 सितंबर 1974 को जहानाबाद में इसी योजना  के लिये एक प्रदर्शन के क्रम में जगदेव बाबू कांग्रेस की गोली का शिकार हुये। जगदेव बाबू की शहादत ही आगे चलकर श्री यादव की राजनीति का आधार बनी।

1985 के विधानसभा चुनाव में टिकट के फेरबदल में उन्हें जहानाबाद की जनता के बीच भेजा गया। उनके द्वारा किये गये विकास कार्यों ने उन्हें इस बार भी जीत दिलाई। आने वाले समय में आपसी मतभेद में पार्टी का विभाजन हो गया। जनता दल से अलग होकर लालू प्रसाद के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनता दल का निर्माण हुया। वह शरद के नेतृत्व में पुरानी पार्टी जनता दल में ही रह गये। 2000 के चुनाव में जनता दल से कुर्था सीट से चुनाव लड़े। लालू लहर के बावजूद मात्र 228 मतो से हार असंतोषजनक परिणाम उन्हें प्राप्त हुआ। लालू प्रसाद  ने जनता के बीच पकड़ और अच्छे व्यवहार की वजह से 2004 में एक बार फिर अपनी पार्टी में जगह दी। उसी वर्ष वह विधान पार्षद बने। 21 जुलाई 2010 को उनका कार्यकाल समाप्त हुआ है और पार्टी पुन उन्हें जहानाबाद की जनता के बीच भेजना चाहती है। आज जहानाबाद की भौगोलिक स्थिति बदल गई है। परिसिमन के बाद का यह पहला चुनाव होगा। क्षेत्र में जातीय समीकरण बदल गये हैं, फिर भी श्री यादव का मानना है कि जो जनता के दरबार में विकास कार्यों की बदौलत अपनी उपस्थिति दिखाएगा वही जनप्रतिनिधि होगा।

नक्सलियों की स्थिति पर वे कहते हैं कि 90-95 के वर्षों में नक्सलवाद एक बड़ी समस्या थी। उन्होंने स्वयं कितने नक्सलियों को आग्रह एंव विनती के माध्यम से समाज की मुख्य धारा में लाने का काम किया था। उनकी समझ से समाज का ही एक तबका दिशाहीन राजनीति का शिकार होकर नक्सलवादी बनता है, जिसके पीछे आपसी रंजिश एंव द्वेष होता है। सामंती विचारधारा एंव पंचायती राज व्यवस्था भी उन्हें इस राह पर चलने को उकसाती है। यदि हर हाथ को काम और हर व्यक्ति तक रोटी पहुंचे तो शायद यह भटकाव नहीं आये। आज फिर स्थितियां बिगड़ती दिखाई दे रही हैं। नक्सलवाद अपने सिद्धांतों से भटक रहा है, निर्दोषों की हत्या किसी वाद में नहीं है।

तेवरआनलाईन के माध्यम से वह जहानाबाद की जनता में अमन, चैन और शांति का संदेश भेजना चाहते हैं। साथ ही विश्वास जताते हैं कि स्थानीय लोग अपने आत्मविश्वास को अपनी पूंजी तथा विकास एंव विश्वास को अपने वोट का आधार बनाये।

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4 Responses to जगदेव बाबू की पुनपुन परियोजना को साकार किया : मुन्द्रिका सिंह यादव

  1. Sam Hans says:

    ya he is right ..he has done many things…we hope that he wins this time so that…. he gets one more chance to serve the people…best of luck……

  2. birendra yadav says:

    mundrika singh yadav ke bare me kafi achchhi janakari hai. anya netaon ke bare me bhi janakari dene ki jarurat hai.

  3. Here’s a comment. Great advice =) Thanks

  4. vipin says:

    har rajnitik dal mein kuchh achhe/bahut achee log hote hain,jo janhit karyon ko apne tarike se aatmik aur samajik sukh ke liye karte rahte hain.Aise karyashil,sakriy aur gunwan logon ki jaankari aam aadmi ko prakashan dwara hote rahni chhahiye taki sabhi log prerna lekar apne ke alawa samaj aur janhit karya karne ki bhi sochhe aur karein!Aam samaj mein rahkar bhi janhit karya mein kai log lage hai,aise logon ke bare mein bhi prernadayi uplabdhiyon ka vyakhyan prakashit honi chhahiye!!

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