बाबा रामदेव के “स्वाभिमान भारत” को लगी संक्रमित बीमारी

तेवरआनलाईन टीम, पटना

योग का पताका फहराकर दुनिया भर में धूम मचाने वाले बाबा रामदेव का भारत स्वाभिमान आंदोलन भी अपने जन्म के तत्काल बाद ही रोगग्रस्त हो चला है और यदि समय पर इस रोग की पहचान करके इसका देसी जड़ी-बूटी से इलाज नहीं किया गया, तो बाद में हाईपावर वाली अंग्रेजी दवाएं भी असरकारक नहीं होंगी, जैसा कि भारत में अन्य कई संगठनों और आंदोलनों के साथ अब तक होता आया है और हो रहा है। भारत स्वाभिमान के उदेश्यों में राष्ट्र की सबसे बड़ी समस्या भ्रष्टाचार का पूर्ण समाधान को प्रमुखता से शामिल किया गया है और एक तरह से यह भारत स्वाभिमान आंदोलन का मुख्य बिन्दु भी है, लेकिन जमीनी स्तर पर इस संगठन के लिए सदस्य बनाने की प्रक्रिया में ही कुछ चतुर सुजानों ने छेद कर दिया है और वर्तमान में इसका इस्तेमाल एक दुधारु गाय की तरह पैसा कमाने के लिए तो कर ही रहे हैं साथ ही भविष्य में इस संगठन द्वारा एक राजनीतिक उफान खड़ा होने की स्थिति में अपनी गोटी लाल करने की जुगत में भी हैं। तेवरआनलाईन को इस संबंध में कुछ पुख्ता सबूत हाथ लगे हैं, और काफी सोच, विचार और चिंतन के बाद इन्हें बाबा रामदेव के संगठन भारत स्वाभिमान और राष्ट्रहित में जारी करने का निश्चय लिया है ताकि समय रहते बाबा रामदेव सचेत होकर अपने संक्रमित हो रहे संगठन का  इलाज कर लें या फिर इस आंदोलन से जुड़ने के इच्छुक लोग इसके भविष्य को लेकर सजग हो जायें।

भारत स्वाभिमान के सदस्यों की संख्या बढ़ाने के लिए बाबा रामदेव ने पूरे देश में सघन अभियान छेड़ रखा है, और बहुत बड़े पैमाने पर लोगों के ऊपर उनकी बातों का असर भी हो रहा है और वे लोग इस अभियान से जुड़ने के लिए बढ़-चढ़कर आगे भी आ रहे हैं। लेकिन भारत स्वाभिमान के बिहार केंद्र में बैठे पदाधिकारी लोग अपने व्यक्तिगत स्वार्थों के वशीभूत होकर इस अभियान की मूलभूत सिद्धांतो को ही पटकनी मार रहे हैं। सदस्य बनने के इच्छुक आने वाले लोगों से सदस्यता शुल्क के तौर पर 1100 रुपये (यह शुल्क विशिष्ट सदस्य के लिए होता है) तो वसुल रहे हैं, लेकिन उन्हें रसीद देने और उनके द्वारा भरे हुये फार्मों को प्रशासनिक कार्यालय पतंजलि योग पीठ, हरिद्वार में नहीं भेज रहे हैं। बीच में ही सारा पैसा गोल हो रहा है। भारत स्वाभिमान आंदोलन से जुड़ने के इच्छुक फार्म भरने वाले लोगों को इस बात की जानकारी तक नहीं है। वे लोग यही समझ रहे हैं कि पैसा देने के बाद वे लोग विधिवत स्वाभिमान आंदोलन के सदस्य बन चुके हैं, जबकि हरिद्वार स्थिति प्रशासनिक कार्यालय उनका नामो-निशान नहीं है।  

हरिद्वार स्थिति प्रशासनिक कार्यालय में इस मामले को लेकर लोग संपर्क कर रहे हैं तो वहां से साफतौर पर कहा जा रहा है कि आपका फार्म हमारे पास नहीं पहुंचा है, इसलिए सदस्यों के डेटा में आपका नाम नहीं है। पांच-छह महीने पूर्व बिहार में सदस्यता के लिए फार्म भर चुके लोगों में इस बात को लेकर संगठन की कार्य-प्रणाली से अच्छी खासी नाराजगी है, हालांकि इसके साथ ही ये लोग यह मान रहे हैं कि संभवत: संगठन के अंदर इस तरह की गोरखबाजी की जानकारी बाबा रामदेव को नहीं है। पटना के पुनाईचक स्थित राम दयाल सिंह के पीली कोठी में रहने वाले प्रमोद कुमार व पुनाईचक में ही देवी मंदिर रोड में रहने वाले दिनेश राय के मामले से इस पूरे गोरखधंधे का खुलासा होता है।   

प्रमोद कुमार

प्रमोद कुमार पिछले 4-5 साल से मानसिक परेशानी से ग्रस्त थे, और उनका इलाज भी चल रहा था। मानसिक परेशानी के इसी दौर में वह बाबा रामदेव के योग विधि से परिचित हुये और फिर बाबा के बताये हुये तरीके से योग करने लगे। बाबा का योग रामबाण की तरह फायदा करने लगा, और देखते ही देखते वह अपने आप को पूरी तरह से स्वस्थ्य और उर्जावान महसूस करने लगे। बाबा रामदेव में उनकी निष्ठा बढ़ती चली गई और वह न सिर्फ नियमित योग करते रहे, बल्कि अन्य लोगों को भी योग करने के लिए प्रेरित करना शुरु कर दिया। इसके लिए वह सुबह-सुबह पटना स्थित चिड़ियाघर (जू) भी जाने लगे, और वहीं पर लोगों को एकत्रित करके बाबा रामदेव के सपनों को आगे बढ़ाते हुये योग का प्रचार प्रसार करने लगे और  सिखाने भी लगे। बाबा रामदेव से प्रभावित होकर उन्होंने विधिवत बाबा के संगठन भारत स्वाभिमान से जुड़ने का निश्चय किया। पटना में बाबा रामदेव की दवाइयों को  बेचने वाली गाड़ी इधर उधर घूमती रहती है। इन्होंने उस गाड़ी में बैठे लोगों से संपर्क किया और भारत स्वाभिमान से जुड़ने की अपनी मंशा जाहिर की ताकि अपने जीवन को योग और बाबा रामदेव के स्वाभिमान भारत को समर्पित कर सार्थक बना सकें।  

उस गाड़ी में बैठे लोगों के कहने पर उन्होंने ग्यारह (1100) सौ रुपये जमा कर दिये। साथ में एक और व्यक्ति दिनेश राय को भी उन्होंने सदस्य बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने ने भी सदस्यता के लिए निर्धारित राशि जमा कर दी। इनसे कहा गया कि रसीद इन्हें बाद में दी जाएगी। बहुत दिन बीत गये लेकिन इन्हें न कोई रसीद मिली न ही सूचना। इस बीच प्रमोद ने कुछ और लोगों को भी भारत स्वाभिमान का सदस्य बनने को प्रेरित किया। सदस्यता फार्म में ही यह अंकित है कि एक निश्चित सीमा तक भारत स्वाभिमान का सदस्य बनाने वाले विशिष्ट सदस्यों को बाबा रामदेव खुद हरिद्वार में अपने पास बुलाकर योग का प्रशिक्षण देंगे ताकि समाज में जाकर वे लोग योग के विभिन्न पहलुओं को सही तरीके से रख सकें। प्रमोद की लालसा बाबा रामदेव से मिलने की भी थी, इसलिए वह अधिक से अधिक सदस्य बनाने के लिए तत्पर थे। चक्कर लगाने के बाद भारत स्वाभिमान (न्यास) का एक रसीद दिया गया, जिसपर 19.04.2010 की तारीख अंकित है। रसीद का नंबर 0412574 है, लेकिन इस पर न्यास की ओर से किसी भी पदाधिकारी का हस्ताक्षर नहीं है, जो न्यास में जारी धांधलेबाजी की ओर इशारा कर रहा है। प्रमोद के साथ ही दिनेश राय ने भी 1100 रुपये जमा किये थे। उन्हें भी एक रसीद दी गई, जिसकी संख्या 0412575, लेकिन इस पर 06.08.2010 की तारीख अंकित है। इस रसीद पर जगदीश प्रसाद का हस्ताक्षर है और साथ में जेपी-3070 कोड भी दिया हुया है। अब सवाल उठता है कि एक ही दिन सदस्यता शुल्क जमा करने वाले दो लोगों को अलग-अलग तारीखों पर काटी गई रसीदें क्यों दी गई, साथ ही एक रसीद पर हस्ताक्षर है और दूसरा पर क्यों नहीं है?      

दिनेश राय को भारत स्वाभिमान द्वारा दी गई रसीद

लोगों को भारत स्वाभिमान का सदस्य बनने के लिए प्रेरित करने के दौरान प्रमोद के मन में यह प्रश्न उठा कि आखिर इस बात का पता कैसे चलेगा कि कौन से विशिष्ट सदस्य ने कितने लोगों को सदस्य बनाया। इसके लिए उन्होंने हरिद्वार स्थित प्रशासनिक कार्यालय में संपर्क किया। यह कहने पर कि वह भारत स्वाभिमान के सदस्य हैं और यह जानना चाहते हैं कि कौन सदस्य कितने सदस्य बना रहा है उनसे आईडी(पहचान कोड) की मांग की गई। चूंकि स्वाभिमान आंदोलन के बिहार मुख्यालय  ने अभी तक उन्हें आईडी उपलब्ध नहीं कराई थी , और वस्तुत वे इस विषय में कुछ जानते भी नहीं थे। जब उन्होंने यह कहा कि उन्हें अब तक पटना कार्यालय से कोई आईडी नहीं दी गई है तो उनसे नाम पूछ कर भारत स्वाभिमान के डेटा में उसे तलाशा गया और फिर यह जानकारी दी गई कि उनका फार्म प्रशासनिक कार्यालय पहुंचा ही नहीं है। यह जानकर उन्हें काफी दुख हुआ कि विशिष्ट सदस्य के लिए ग्यारह सौ रुपये जमा करने के महीनों बाद भी वह न सिर्फ खुद सदस्यता से वंचित हैं, बल्कि उनलोगों की नजरों में भी वे झूठे साबित होने वाले हैं, जिन्होंने उनके कहने पर भारत स्वाभिमान से जुड़ने की पहल की है।

प्रमोद कुमार को भारत स्वाभिमान द्वारा दी गई रसीद

पतंजलि से ही काफी मगजमारी करने के बाद  न्यास के पटना प्रभारी आशिष सिन्हा का नंबर मिला। प्रमोद का कहना है कि जब उन्होंने आशिष सिन्हा को बताया कि  “ वे योगपीठ की दवा गाड़ी से फार्म लेकर स्वाभिमान भारत के सदस्य बने  हैं तो पटना प्रभारी ने कहा,  योगपीठ की दवा वाहन से 75 फीसदी नकली एंव 25 फीसदी असली दवा बेची जा रही है, तथा उस वाहन के संचालकों में से एक जगदीश प्रसाद ठग है। वे फर्जी रसीद देकर लोगों को भारत स्वाभिमान का सदस्य बनाते हैं।

इसके बाद प्रमोद ने पुन: हरिद्वार कार्यालय में संपर्क किया। वहां से राजीव दीक्षित का नंबर मिला। उनसे संपर्क करने पर उन्होंने कहा कि वह 24-09-2010 को सिवान और छपरा आ रहे हैं, जहां वे संपर्क करें। बाद में उन्होंने टालते हुये कहा कि जब वह पटना आएंगे तो उनसे मिल लेंगे।

कुछ दिन बाद प्रमोद ने दवा वाहन को पकड़ा, जिस पर जगदीश प्रसाद रहते हैं। जगदीश प्रसाद ने स्वीकार किया कि प्रमोद का पैसा और फार्म उन्हीं के पास है, और उन्होंने उसे हरिद्वार नहीं भेजा है। इसके साथ ही उन्होने आशिष सिन्हा के बारे में कहा कि वह खुद ठग है और उन्होंने सैकड़ों लोगों से योग शिक्षक बनाने के नाम पर लाखों रुपये ठग चुका है।     

जब इस मामले को बिहार स्टेट प्रमुख नवीन के सामने उठाया गया तो उन्होंने कहा कि हर दसवें दिन नये सदस्यों के फार्म को हरिद्वार स्थित प्रशासनिक कार्यालय भेज दिया जाता है। अब उनका फार्म ही पटना कार्यालय में नहीं पहुंचा है तो वे क्या कर सकते हैं। बहुत जिरह करने पर उन्होंने टालने वाले अंदाज में कहा कि आप सारे कागजात जमा करा दें, इस पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

जब तेवरआनलाईन ने इस बारे में गहन छानबीन की तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। बिहार में अन्य स्थानों पर भी इसी तर्ज पर भारत स्वाभिमान के सदस्य बनने के इच्छुक लोगों को लूटा जा रहा है और भारत स्वाभिमान की बिहार इकाई रोगग्रस्त हो गई है। सबकुछ काफी सुनियोजित तरीके से चल रहा है। सदस्यता फार्म के साथ आने वाले पैसों का इस्तेमाल सूदखोरी के लिए हो रहा है और सारे फार्म को एक जगह पर डंप हो रहे हैं।

बाबा राम देव का प्रवेश जिस तरह से राजनीति में हो रहा है और जिस तरह से भावी भारत के निर्माण के लिए ताल ठोक रहे हैं उसे लेकर उनको उनकी औकात पर लाने की रणनीति उनके विरोधी अभी से बना रहे हैं। मजबूत से मजबूत संगठन को भीतरघात सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। यदि सदस्यों का फार्म और माल समेटकर किसी राज्य के सारे पदाधिकारी संगठन को अचानक बाय बाय करके निकल जाएंगे तो एक साथ संगठन पर चौतरफा मार पड़ेगा। आर्थिक नुकसान तो होगा ही, आम जन में इनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल उठने शुरु हो जाएंगे। और यदि भ्रष्टाचार मुक्त भारत की बात करने वाला कोई संगठन खुद भ्रष्टाचार के आरोप में फंस जाता है तो फिर इसकी स्थिति हास्यास्पद हो जाएगी।                 

दुनिया में सामुहिक रुप से व्यवस्थित तरीके से जिनती भी महान घटनाएं हुई हैं, चाहे वह अमेरिका का स्वतंत्रतता संग्राम हो, 1789 ई. का फ्रांसीसी क्रांति हो, या फिर 1917 का रूसी क्रांति हो- उनके तल में कोई न कोई संगठन रहा है। लंबी प्रक्रिया के तहत लोगों की चेतना को आंदोलित करके उनसे अनुकूल व्यवहार कराने के लिए संगठनों की हर युग में आवश्यकता पड़ी है और पड़ती रहेगी। प्राय: किसी भी संगठन के प्रसव-काल व विकास के  शुरुआती दौर में उसके साफ-सफाई और रख-रखाव पर पूरा ध्यान दिया जाता है ताकि जमीनी स्तर पर उसके उद्देश्यों को पाने का रास्ता साफ होता जाये। लेकिन यह भी सच है कि कई बार बेहतरीन से बेहतरीन संगठन भी समय के साथ डग भरते हुये सड़न का भी शिकार होने लगते हैं, और कभी-कभी तो यह सड़न उस संगठन विशेष के उद्देश्यों को ही ले डूबता है, या फिर उसके महान उद्देश्यों को चौपट करते हुये उसे एक परजीवी तंत्र के रुप में बनाये रखता है। ऐसी स्थिति में संगठन का ढांचा तो दिखाई देता है, लेकिन उस संगठन विशेष द्वारा चलाये जा रहे आंदोलन की धार बुरी तरह से कुंद पड़ जाती है, और देर-सवेर उस पूरे आंदोलन का डूबना तय है। पूरी दुनिया को योग के बल पर स्वस्थ्य रखने का हौसला देने वाले बाबा रामदेव ने यदि समय रहते भारत स्वाभिमान में फैल रही बीमारी का इलाज नहीं किया तो यह पूरे संगठन को जवान होने से पहले ही जर्जर कर देगी।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
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3 Responses to बाबा रामदेव के “स्वाभिमान भारत” को लगी संक्रमित बीमारी

  1. Shiv Mohpal says:

    Babaji,

    I have a solution to stop such fraud forever.

    You must open an account in such a bank like SBI which has branches all over India and make sure that who so ever wish to become life member for a deposit of 1100 Rs must deposit first that money in the bank and then get the free form from your district office and fill that up with a photocopy of the receipt of bank deposit.

    This way not a single person will be duped and your esteemed cause will not be harmed and also there will be completed record of money flow for taxation purpose.

    May Lord Ram blesses you for your unique cause.
    Jai shri Ram.

  2. Nicki Minaj says:

    Hey, I just hopped over to your site via StumbleUpon. Not somthing I would normally read, but I liked your thoughts none the less. Thanks for making something worth reading.

  3. ्हा हा हा अपनी संस्था को तो बचा नही पाये और चले है देश से भ्रष्टाचार मिटाने। वैसे रामदेव खुद भी कहां दुध के धुले हैं।

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