स्टेट बैंक ऑफ मैसूर की औद्योगिक वित्त शाखा, नई दिल्ली में सौ करोड़ से भी ज्यादा का घपला, चार अधिकारी निलंबित

देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, स्टेट बैंक और मैसूर(http://www.statebankofmysore.com/) की दिल्ली स्थित औद्योगिक वित्त शाखा में लगभग एक सौ बीस करोड़ रूपये के हेर फेर का मामला सामने आया है। साख-पत्र (लेटर ऑफ़ क्रेडिट) की डिस्काऊंटिंग में हुई इस बड़ी वित्तीय गड़बड़ी के मद्देनजर शाखा के चार बड़े अधिकारियों  को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
विदित है  कि स्टेट बैंक ऑफ मैसूर भारतीय स्टेट बैंक का एक  सहयोगी बैंक है, जिसका मुख्यालय बैंगलूरू में है। विगत वित्तीय साल (2009-10) में जहां बैंक का मुनाफ़ा 446 करोड़ का है,  इतने बड़े घोटाले से बैंक और इसके शेयरधारकों को होने वाले नुकसान का अन्दाज़ा लगाया जा सकता है । प्रारंभिक तौर पर इस मामले को  एक कार्यकारी-चूक की दृष्टि से देखा जा रहा है। पर आधिकारिक स्तर पर इतने बड़े वित्तीय गोलमाल को  एक  चूक की शक्ल देना बेहद चिंताजनक  और संदेहास्पद है। दिल्ली स्थित विश्वस्त सूत्रों की मानें तो मामले में जुड़े तीन कंपनियों में एक “ टेक्सोमेश ” पहले से ही वित्तीय आपराधिक मामलों में संलिप्त रहा  है। ऐसे में किसी कम्पनी का वित्तीय-इतिहास जाने बिना  इतने बड़े स्तर पर डिस्काऊंटिंग की सुविधा देना बैंक के कामकाज पर एक सवालिया निशान लगाता है।  टेक्सोमेश से संबधित  कुछ प्रमुख मामलों पर एक नजर डालने के लिए निचे दोनों लिंकों पर क्लिक करें।

1.http://delhicourts.nic.in/Aug09/TEXEM%20ENGINEERING%20VS.%20TEXCOMASH%20EXPORTS.pdf
2.http://www.indiankanoon.org/doc/800259/

उपरोक्त मामलों में तथाकथित कंपनी के ऊपर लगे धोखाधड़ी के आरोपों के मद्देनज़र इस  ताज़े  मामले को  भी  एक सोची समझी साजिश का  परिणाम होने से इनकार नहीं किया जा सकता।  साथ ही बैंक के चार अधिकारियों के तत्काल निलंबन  बैंक की कार्यप्रणाली में आधिकारिक स्तर पर बरती गयी ढिलाई या सम्बंधित अधिकारियों के इस मामले में शामिल होने  का भी संकेत  करता है। वैसे बर्खास्त अधिकारियों की इस मामले में सक्रिय संलिप्तता की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
ज्ञात हो कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयात-निर्यात को सुचारू रूप से चलाने के लिए  “साख -पत्र” जैसे वित्तीय-उपकरण का  उपयोग धड़ल्ले से  किया जाता है। आयत-निर्यात के कामकाज में इसपर अत्यधिक निर्भरता के चलते ही इसमें धोखाधड़ी करने वाली कंपनियों और गिरोहों का भी बड़ा बोलबाला है। इस दृष्टिकोण में बैंकों को इस क्षेत्र  में काफी सावधानी बरतनी होती है।
वर्तमान मामला सुदृढ़  और सुरक्षित समझे जाने वाले राष्ट्रीयकृत बैंकों के ढुलमुल कामकाजी रवैये की पोल खोलता नज़र आता है। तेवआनलाईन  सम्बंधित अधिकारियों से इस मामले की जानकारी लेने का प्रयत्न कर रहा है, आधिकारिक तौर पर अभी तक किसी भी अधिकारी से संपर्क नहीं हुआ है।

Read the news in English

Country’s premiere public lender, State Bank Of Mysore  is reportedly hit by the latest case of fraud unearthed last week in its industrial finance branch situated at Delhi. A whopping Rs. 120 crores said to have been misappropriated fraudulently by three companies one of which Texcomash Exports has been quite infamous for similar financial irregularities in the past. Four officials including two senior graders have been suspended immediately after the incident came into light.

The irregularities, reportedly, pertain to the lapse shown on part of the bank in discounting of a series of import Letters of Credit issued by foreign bankers based in HongKong and Singapore.
The suspended officials are under management’s scanner  for their possible involvement in the case. Primary investigations in the case hint towards an act of negligence committed by bank officials. An associate of State Bank Of India, SBM is listed entity having a large customer base in the state of Karnataka. Recently in news for its merger with the parent State Bank Of India, the bank had declared an impressive profit of Rs. 466 crores in the fiscal 2009-10. Seeing the size , the  Rs.120 crores worth fraud will badly affect the lender’s financial aspirations including its shareholder’s confidence.
We are constantly trying to contact the senior management of state bank group for their reaction on the news but there is no response as of now from their end.

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।
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