पैसे दो…….उसे एचआईवी संक्रमित इंजेक्शन दे के मार दूंगा….!

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पिंकी के साथ आरोपी इंस्पेक्ट बालेश्वर

पिंकी के साथ आरोपी इंस्पेक्ट बालेश्वर

आशुतोष कुमार पांडेय, मुजफ्फरपुर

आप थोड़ी देर के लिए आश्चर्य में पड़ गए होंगे। आखिर मुम्बईया फिल्म के
लेखकों के दिमाग को कल्पना की उड़ान से छीन लेने वाला यह कौन सा इंसान
पैदा हो गया। इन दिनों पूरे बिहार में उत्तर बिहार में पदस्थापित एक
इंस्पेक्टर की चर्चा जोरों पर है। नाम बालेश्वर प्रसाद। आरोप। जुए में
जप्त तीन लाख रुपए का गबन। डीएसपी को जान से मारने की धमकी। निलंबन के
बाद सरकारी रिवाल्वर लेकर फरार रहने का आरोप। मुजफ्फरपुर में केसीसी और
पिंकी फर्जीवाड़ा मामले में 50 लाख रुपए से ज्यादा घूस लेने का आरोप। खैर
आरोपों की फेहरिस्त लंबी है।

बालेश्वर जी की खासियत में एक और इजाफा हुआ है। वह है पैसे लेकर किसी
को सलटाने का। बालेश्वर ने हैवानियत,शैतानियत और मानवीय संवेदना को ताक
पर रखकर जिस कदर वर्दी को दागदार किया है उसे देख और सुनकर लोगों के
रोंगटे खड़े हो जाते हैं। अन्ना हजारे का असर मुजफ्फरपुर में भी है।
बालेश्वर को लेकर शहर के संस्कृतिकर्मी और रंगकर्मी बैठकें करने लगे हैं।
चारों ओर बस बालेश्वर की चर्चा है। अखबारों के पेज रंगे जा रहे हैं। कई
वरिष्ठ अधिकारी बालेश्वर के खिलाफ आखिरी सांस तक जंग लड़ने की कसमें खा
रहे हैं।

इतना ही नहीं गत तीन दिनों के अंदर बालेश्वर पर तीन दर्जन से अधिक
मुकदमें दर्ज हो चुके हैं। आज जो मुकदमा दर्ज हुआ उसके मुताबिक बालेश्रर
प्रसाद ने करेंसी तस्करों को छोड़ा था जिसे एक ट्रेनी दारोगा ने पकड़ा
था। 35 हजार पर बालेश्वर ने उन नेपाल के तस्करों को वापस नेपाल भेज दिया।
इतना ही नहीं मुजफ्फरपुर में एसएफसी के ठेकेदार सतेद्र दूबे हत्याकांड के
आरोपी मिंटू सिंह को गिरफ्तारी के बाद टार्चर की वजाए उसको पैसे लेकर
मुर्गा मुस्सलम तक बालेश्वर ने खिलाए। इतना ही उसने परिजनों कहा कि आपके
पास पैसे हो तो हमे दिजिए। मैं उसे एचआईवी का संक्रमित इंजेक्सन दिलवा
दूंगा।
त्राहीमाम…….त्राहीमा………नारायण ………नारायण…..मैं नारद हूं और ब्रम्हाणड का पहला पत्रकार भी। यह सारी घटनाएं तो प्राचिनकाल जैसी
लग रही है। हे ईश्वर इस राक्षस का वध करने में मीडिया भी असफल भी है
क्या……..। तबतक धर्मराज आ चुके थे………उन्होंने कहा। हे
तात्……..सुशासन की सरकार में मुंबईया फिल्मों के निर्देशकों की
कल्पना को मात देने वाला इस तरह का भ्रष्ट अधिकारी ऐसा दिमाग कैसे पा
गया। तात ने कहा….हे धर्मराज बात वहीं है…जब-जब होई घर्म की
हानी…….। आप समझते नहीं हैं। बालेश्वर कलियुग का वह रावण साबित होगा।
जिसके बारे में जानकर कोई पुलिसवाला अधिकारी बनने और इंस्पेक्टर शब्द से
डरेगा। इसने तो अपने नाम की परिभाषा ही बदल दी । अब तो लोग कह रहे
हैं…..बा ले श्व र….माने होना चाहिए। बलात्कारी,लेनू,शक्की,राक्षस….। हे तात…आपने यह कैसे कह दिया इ सब। अरे धर्मराज…लोग अबतक उसके आतंक से त्रस्त थे। लेकिन भला हो उस अन्ना का जिन्होंने लोगों को एक राह दिखा दिया। अब तक अपमान और जिल्लत के साथ बालेश्वर से अपना शारिरीक मानसिक और आर्थिक शोषण करा चुके लोग चुप थे। लेकिन जैसे ही पहला मामला खुला। अब लोग अन्ना को याद कर उसके खिलाफ मामला
दर्ज कराने लगे हैं।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

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