युवाओं में सेल्फी का जानलेवा शौक!

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अनिता गौतम.

स्मार्ट फोन का शौक पागलपन की हद तक लोगों में शामिल हो गया है। हर हाथ को काम हो न हो, एक स्मार्ट फोन होना आवश्यक है। कभी जरूरत रहा फोन आज पागलपन बन चुका है। बदलते समय की गवाही देता स्मार्ट फोन अलग अलग रूप रंग और कीमतों में बाजार में उपलब्ध है। अपने जेब के मुताबिक एक फोन हर किसी के हाथ में है।

बात यहां तक तो ठीक है पर इस फोन के क्रेज को लेकर क्रेजी होना खतरनाक साबित हो रहा है। फोन में फ्रंट कैमरा और बैक कैमरा के पिक्सल को लेकर युवाओं की जानकारी ज्यादा है। इन तकनीकी शब्दों की अहमियत तब सामने आती है जब सेल्फी यानि मोबाइल के कैमरे से अपनी तस्वीर स्वयं लेनी होती है।

किसी समय में कुछ खास-खास लोगों का फोटो शूट सामने आया करता था। पर अब इस सेल्फी क्रेज ने युवाओं को बिना किसी फोटोग्राफर के स्वयं की तस्वीर अजीब अजीब चेहरे बनाकर खींचने की आजादी दे दी है। चेहरे पर पाउट बनाना, खूबसूरती से मुस्कुराना और उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करने तक तो बात समझ में आती है पर कभी कभी लोकेशन को लेकर लापरवाही युवाओं के लिए जानलेवा साबित हो रही है।

जाहिर है अपनी सेल्फी को दूसरों से अलग दिखाने और सोशल मीडिया पर जारी कर लोगों की लाइक्स और कमेंट बटोरने की सनक में लोग चलती ट्रेन की बगल वाली पटरी (जिस पर कभी भी ट्रेन आ सकती है), तो कभी पहाड़ियों के उंचे और खतरनाक पत्थर, तो कभी समुद्र की लहरों के बीच अपनी सेल्फी निकालते दिख जाते हैं।

खतरनाक स्टंट की तरह अनोखी सेल्फी लेने में तल्लीन लोग अपने आस पास की स्थिति से इतने अनजान हो जाते हैं कि गंभीर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। इन दुर्घटनाओं में कभी कभी उनकी जान भी चली जाती है।

माना तकनीक का दौर है और तकनीकी संपन्नता आवश्यक भी है. परन्तु सोशल साइट्स पर चंद लाइक्स औऱ कमेंट की चाहत में खतरों से भरी जगहों पर आत्ममुग्धता से अभिभूत होकर सेल्फी निकालने को कहीं से भी सही नहीं ठहराया जा सकता है।

टेक्नोफ्रेंडली बनना गलत नहीं है पर बहुमूल्य जीवन को दाव पर लगाकर नहीं। सेल्फी के दौरान समुद्र में डूब जाना, चलती ट्रेन के नीचे आ जाना, पहाड़ियों से फिसलकर गिर जाना या किसी खतरनाक जानवर का शिकर हो जाना सिर्फ लापरवाही नहीं अपने बहुमूल्य जीवन से खिलवाड़ है।

बहरहाल सेल्फी के लिए किसी की जान जाना कोई पहली घटना नहीं होती है, कभी कभी एहतियातन स्थानीय प्रशासन अपनी तरफ से नो सेल्फी जोन या फोटोग्राफी की मनाही करके अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं।

जाहिर है आये दिन होने वाली घटनाओं को कानूनी जामा पहना कर आखिर कितनों की सुरक्षा की जा सकती है। हल हाल में लोगों को सर्वप्रथम अपनी सुरक्षा स्वयं करनी होगी।

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