रेलवे से जुड़ी जन शिकायतों का त्वरित निष्पादन करें: आर के सिंह

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तेवरआनलईन, हाजीपुर

जन परिवेदना के मामलों को गंभीरता से लिया जाये तथा इनके त्वरित एवं समय से निष्पादन के लिए हर संभव प्रयास किया जाये ।  रेलवे बोर्ड द्वारा निर्धारित समय सीमा के अंदर जन परिवेदनाओं का निष्पादन हमारा लक्ष्य  है । साथ ही शिकायतों के निष्पादन के बाद समय से इसकी सूचना आवेदक को दिया जाना सुनिश्चित किया जाये । माननीया रेलमंत्री ने संदेश दिया है कि भारतीय रेल को अपने वाणिज्यक हितों को बनाये रखना है लेकिन यह कार्य ‘‘मानवीय संवेदना‘‘ के साथ करना होगा । जन शिकायतों का निपटरा करते समय भी मानवीय संवेदना को  ध्यान में रखना होगा । पूर्व मध्य रेल के अपर महाप्रबंधक श्री आर.के.सिंह ने उच्चाधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि जन प्रतिनिधियों, सांसद/विधायक, प्रषासनिक सुधार विभाग और जन षिकायत निदेषालय से प्राप्त शिकायतों के निष्पादन भी समय से किया  जाये । उन्होंने जन शिकायत के निपटारे  में  पूर्व मध्य रेल के अधिकारियों के प्रयासों को संतोषजनक बताया । बैठक में जन परिवेदना के सभी मामलों की समीक्षा की गई । इसमें श्री मनोज कुमार/प्रमुख मुख्य इंजीनियर, श्री जे.एस.पी.सिंह/मुख्य कार्मिक अधिकारी, श्री एच.के.अग्रवाल/मुख्य सिगनल एवं दूरसंचार इंजीनियर, श्री जी.एस.तिवारी/मुख्य प्रषासनिक अधिकारी/निर्माण/दक्षिण, श्री वी.के.तिवारी/मुख्य वाणिज्य प्रबंधक, श्री एस. भट्टाचार्या/वित्त सलाहकार एवं मुख्य लेखाधिकारी (एफएंडबी), श्री दीपक छाबड़ा/मुख्य संरक्षा अधिकारी, श्री सुशांत झा/मुख्य कार्मिक अधिकारी (प्रशासन),  श्री ए.के.झा/निदेशक(जन परिवेदना) सह उप महाप्रबंधक(सा.) बैठक में उपस्थित थे ।

इनके अलावे मंडलों के जन परिवेदना के समन्वय अधिकारी  श्री अंगराज मोहन/अपर मंडल रेल प्रबंधक/सोनपुर, श्री राजेष मोहन/ अपर मंडल रेल प्रबंधक/धनबाद एवं श्री रंधावा सुहाग/अपर मंडल रेल प्रबंधक/दानापुर,     श्री आर. चन्द्रा/अपर मंडल रेल प्रबंधक/मुगलसराय एवं श्री मनोज विष्वास /अपर मंडल रेल प्रबंधक/समस्तीपुर भी बैठक में उपस्थित थे । कार्यक्रम का समन्वय श्री आई.डी.चैधरी/सहायक उपमहाप्रबंधक द्वारा  किया गया ।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

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