सिम्मी मरवाहा ट्रस्ट ने चार पत्रकारों को सम्मानित किया

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तुमने जिन पौधो को रोपा,फूले और फलेगें,पत्रकारिता की वेदी पर सौ सौ सूर्य ढलेंगे। दिवंगत कवि पांडे आशुतोष की इन पंक्तियो को पढ़ते हुए पत्रकार सिम्मी मरवाहा को रविवार को याद किया गया। सिम्मी मरवाहा मैमोरियल चैरीटेबल ट्रस्ट द्वारा चंडीगढ़ प्रेस कल्ब में आयोजित किए गए 8वें पत्रकार सम्मान दिवस के दौरान प्रिंट, ई मीडिया के क्षेत्र से चार पत्रकारों को ये सम्मान प्रदान किया गया।

सम्मान पाने वालो में भोपाल एमपी से प्रकाशित पीपुल्स समाचार की विशेष संवादाता भूमिका कलम, छायाकारों में इंडियन एक्सप्रेस चंडीगढ़ से कार्यरत विक्रम जॉय, इंगलिश प्रिंट मीडिया में दि पॉयनीयर चंडीगढ़ में कार्यरत आलोक सिंह और पहली बार शुरू की गई ई जर्नालिज्म श्रुंखला में डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू दरबारी लाल डॉट कॉम के एमडी दिलीप झा नोएडा यूपी, पीयु चंडीगढ़ से मॉस कमनियुकेशन पत्राचार के टॉपर तेजिंदर सिंह लूथरा दिल्ली शामिल है। इस दौरान हाजिर कवियों सुशील बंसल,मनजीत कौर मोहाली,जोगिंदर सिंह जगगा, थापर अंबाला,मनजीत सिंह गिल,जी के नंदा, सुशील हसरत नरेलवी, उर्मिल कौशिक ने अपनी रचनाए पेश कर सिम्मी को याद किया।

ट्रस्ट की प्रबंध न्यासी कवियत्री राजिंदर रोज़ी ने सिम्मी के जीवन पर प्रकाश डाला। ज्ञात हो कि सिम्मी का मार्च 2003 में चंडीगढ़ में हुए सडक़ हादसे में निधन हो गया था। उनके चाहने वालो द्वारा सिम्मी की याद में ट्रस्ट की स्थापना कर जहां ये आयोजन हर वर्ष किया जाता है,वहीं समाज सेवा के भी कई कार्य किए जा रहे है। इस अवसर पर पूर्व पार्षद मनजीत कौर सैणी,गोल्डन पब्लिक स्कूल मोहाली के डायरेक्टर पूर्व कर्नल सी एस बावा,सिटीजन अवेयरनेस गुप्र के चेयरमैन सुरिंदर वर्मा,पूर्व डिप्टी डायरेक्टर पीएसईबी अमरजीत कौर पसरीचा मौजूद थे।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

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