‘टॉपलेस’ विरोध से चकित दुनिया

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हाल ही में ट्यूनीशिया के न्याय मंत्रालय के बाहर जिस तरह से तीन महिलाओं ने अमीना टेलर के हक में ‘टॉपलेस’ प्रदर्शन करके स्थापित मान्यताओं को चुनौती देते हुये ‘नारी के शरीर पर नारी का अधिकार’ के नारे को बुलंद किया है, उससे स्पष्ट पता चलता है कि दुनियाभर में जारी महिलावादी आंदोलन अब एक नये दौर पर प्रवेश कर चुका है। अपने हक को लेकर अब महिलाएं बेबाक हो रही हैं और अपनी बात को पूरी दुनिया में फैलाने के लिए अपने शरीर का भी धड़ल्ले से इस्तेमाल करने से नहीं हिचक रही हैं, जो आज भी पुरुषों के लिए आकर्षण का केंद्र है। मतलब साफ है कि अब महिलाएं अपने अधिकारों को हासिल करने के लिए अपने शरीर का इस्तेमाल हथियार की तरह कर रही हैं। ट्यूनीशिया जैसे इस्लामिक मुल्क में जहां महिलाओं को पर्दे के पीछे रखने की रवायत है, ‘टॉपलेस प्रदर्शन’ निस्संदेह चौंकाने वाला है।
इस टॉपलेस प्रदर्शन ने ट्यूनीशिया को तो असहज किया ही है, साथ ही दुनिया भर में इस बात को लेकर भी बहस छिड़ गई है कि समाज में ‘नैतिकता’ और ‘मर्यादा’ जैसी चीजों का क्या औचित्य है? क्या नैतिकता और मर्यादा मरे हुये कुत्ते की तरह है, जिसमें से बदबू निकलने लगा है या फिर दुनिया महिलाओं को लेकर नये तरीके से करवट ले रही है? प्रदर्शन के दौरान वहां पर मौजूद भीड़ में शामिल कुछ लोग बार-बार इन महिलाओं के नंगे बदन को ढंकने की कोशिश करते रहे, लेकिन प्रदर्शनकारी महिलाओं की उग्रता के सामने सारी कोशिशें बेकार साबित हुई हैं। तीनों महिलाएं अपनी नंगी पीठ और सीने पर नारे लिखकर समाज और व्यवस्था को बेबाक चुनौती देती रहीं। अंत में लोग उन फोटोग्राफरों से मारपीट पर उतर आए, जो प्रदर्शनकारी अधनंगी महिलाओं की तस्वीरें उतार रहे थे। लोग यह कतई नहीं चाह रहे थे कि उनकी नंगे सीनों और पीठ पर नैतिकता और मर्यादा के खिलाफ लिखे गये नारे सारी दुनिया के सामने आये। वर्षों से स्थापित मूल्यों पर प्रहार होते देखकर लोगों का गुस्सा भड़क गया था। बाद में पुलिस तीनों अधनंगी महिलाओं को हिरासत में लेकर स्थिति को काबू में करने की कोशिश करती रही।
ट्यूनीशिया में हंगामा 19 साल की लड़की अमीना टेलर द्वारा फेसबुक पर जारी उसकी खुद की दो ‘टॉपलेस’ तस्वीरों को लेकर शुरूहुआ था। उसके शरीर पर लिखा हुआ था ‘मेरा शरीर मेरा है और यह किसी के सम्मान का स्रोत  नहीं है।’ दूसरी तस्वीर में तो अपने सीने पर लिखे नारों में उसने नैतिकता को खुलेआम चुनौती दी थी। अपनी बातों को कहने के लिए उसने अरबी भाषा का इस्तेमाल किया था। बाद में पत्रकारों से बात करते हुये उसने कहा था कि इन तस्वीरों कोे फेसबुक पर प्रेषित करने का उद्देश्य ट्यूनीशियाई महिलाओं की आवाज को उठाना और साथ ही महिलाओं के खिलाफ जारी हिंसा और दमन के खिलाफ खड़ा होना है। बाद में उसके उसके खिलाफ जब अतिवादी संगठनों ने मौत का फतवा जारी किया तो उसके परिवार वालों ने उसे किसी गुप्त स्थान पर छुपा दिया। फिर यह अफवाह तेजी से फैलने लगी कि वह मानसिक रूप से विक्षिप्त हो चुकी है, जिसकी वजह से उसे मानसिक अस्पताल में भेज दिया गया है। इस बीच उसकी ओर से एक बार फिर बयान जारी करते हुए कहा गया कि वह पत्रकारिता की पढ़ाई के लिए यूरोप जा रही है और देश छोड़ने से पहले वह एक बार ट्यूनीशियिा में ‘महिला अधिकारों’ को लेकर ‘टॉपलेस’ प्रदर्शन करना चाहती है। अमीना इसी साल फरवरी में विधिवत ट्यूनीशिया में ‘फेमेन आंदोलन’ की संस्थापिका की भूमिका में आई। चूंकि ट्यूनीशिया मुख्यरूप से एक मुस्लिम बहुल देश है, इसलिए वहां पर सार्वजनिक तौर पर महिलाओं को लेकर चर्चा करने से परहेज किया जाता रहा है। अमीना शिद्दत से इस बात को महसूस कर रही थी कि ट्यूनीशिया में महिलाओं की स्थिति अच्छी नहीं है। इंटरनेट के माध्यम से फेमेन के साथ संपर्क में आने पर उसने बिल्कुल आक्रामक अंदाज में ट्यूनीशियाई महिलाओं की समस्याओं को उठाने का निर्णय कर लिया।
फेमेन यूक्रेन की एक उग्र महिलावादी संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 2008 में की गई थी।  प्रारंभिक दौर में इस संगठन का मुख्य कार्य यूक्रेन से बाहरी मुल्कों में वेश्यावृति के लिए भेजी जा रही महिलाओं का विरोध करना था। जिस तरह से यूक्रेनी महिलाओं को अंतरराष्टÑीय सेक्स मार्केट में धकेला जा रहा था, उसे लेकर यह संगठन काफी चिंतित था। इन लोगों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करके अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन इन पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। फिर इन लोगों ने अपने मुद्दों को लेकर ‘टॉपलेस प्रदर्शन’ करना शुरू कर दिया। समय के साथ इनके एजेंडों का भी विस्तार होता गया।  सेक्स पर्यटन, धार्मिक संस्थानों, अंतरराष्टÑीय शादी एजेंसियों के साथ-साथ दुनिया के मुख्तलफ मुल्कों में सत्ता पर काबिज तानाशाहों आदि का विरोध इनके एजेंडे में शामिल हो गया। अपने विरोधी स्वर को मजबूती के साथ रखने के लिए इस संगठन में शामिल महिलाओं ने ‘टॉपलेस’ प्रदर्शन का जबरदस्त तरीके इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। बाद में महिलाओं से संबंधित अन्य कई अंतरराष्टÑीय मसलों को भी इसने उठाना शुरू कर दिया। बर्लिन में एक कार्यक्रम के दौरान रूसी राष्टÑपति व्लादिमीर पुतिन की भी जबरदस्त घेराबंदी करके यह संगठन सुर्खियां बटोरने में कामयाब रही। फिलहाल इस संगठन में अधिकतर कालेज की लड़कियां हैं, लेकिन इनका संगठन मुल्कों की सीमाओं से परे निकाल कर तेजी से चारों ओर फैल रहा है।
जिस तरह से तमाम स्थापित मान्यताओं को इस संगठन में शामिल महिलाएं खतरनाक  अंदाज में चुनौती दे रही हैं, उससे स्थापित मूल्यों का पोषण करने वाले तमाम लोगों और संगठनों का भड़कना स्वाभाविक है। विरोधों की परवाह न करते हुये फेमेन अपने अभियान को और उग्र रूप से आगे बढ़ाने में लगा हुआ है। ‘टॉपलेस प्रदर्शन’ की हिमायत करते हुये फेमेन के नीति निर्धारकों का कहना है कि सभी मुल्क और सभी धर्म आमतौर पर महिलाओं को दबाने में यकीन करते हैं। दुनियाभर में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचारों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। जब महिलाएं शातिपूर्ण और मर्यादित तरीके से अपनी बात रखने की कोशिश करती हैं तो उन पर ध्यान नहीं दिया जाता। अब जब टॉपलेस प्रदर्शन होने लगा है तो लोग बौखला रहे हैं। और हम भी यही चाहते हैं कि लोग बौखलाएं और इस बात को अच्छी तरह से समझ लें कि महिलाओं को चारदीवारी में कैद करके रखने के दिन लद गये। हालांकि इस संगठन के कई सदस्यों पर यूक्रेन में कई आपराधिक मामले भी दर्ज हो चुके हैं, फिर भी उनका हौसला नहीं टूटा है। अपने अधिकारों को लेकर वह पूरी तरह से मुस्तैद नजर आ रही हैं।
कीव में फेमेन का नेतृत्व करने वाल शेवचेंको को वहां की सरकार के कड़े रुख की वजह से देश छोड़कर फ्रांस पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा है। हालांकि फ्रांस जाने के बाद महिला अधिकारों को लेकर शुरू की गई उनकी मुहिम और तेज हो गई है। अपने आंदोलन को नया धार देने के लिए उन्होंने पेरिस में ही फेमेन का एक ट्रेनिंग सेंटर खोल रखा है। इस ट्रेनिंग सेंटर में महिलाओं को अपने हक के लिए नये तरीके से लड़ने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस संगठन की एक शाखा जर्मनी में भी खोली गई है। शेवचेंको मानती हैं कि उनका संगठन एक अतिवादी नारीवादी आंदोलन का संचानल कर रहा है। सेक्स उद्योग, गर्भपात, पितृ प्रधान समाज की कुरीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करने में यह संगठन अहम भूमिका निभा रहा है। फेमेन के विरोध के तरीकों को देखकर दुनिया भौंचक है। सबसे अधिक खलबली धार्मिक संगठनों में मची हुई है। इस संगठन पर नजर रखने वाले जानकारों का कहना है कि हाल ही में ट्यूनीशिया में फेमेन की तीन महिलाओं द्वारा किया गया ‘टॉपलेस प्रदर्शन’ अंतिम प्रदर्शन नहीं है। मुख्तलफ मुल्कों में लोगों को आगे भी इस तरह के प्रदर्शन के लिए तैयार रहना चाहिए।

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