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बांग्लादेश में पत्रकार की हत्या,प्रेस की स्वतंत्रता और सुरक्षा पर संकट– ए आई जे

लालमोहन महाराज, मुंगेर

बीते दिनों बांग्‍लादेश में अज्ञात हमलावरों द्वारा एक स्थानीय अखबार के कार्यकारी संपादक पत्रकार राणा प्रताप बैरागी की गोली मार कर हत्‍या किए जाने की घटना की पत्रकार संगठन ने कड़ी निंदा की है।भारतीय पत्रकार संघ के बिहार प्रदेश अध्यक्ष लालमोहन महाराज और मुंगेर जिलाध्यक्ष पत्रकार योग चैतन्य ने घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि बांग्लादेश में हाल की हिंसक और अराजक घटनाओं पर नजर डालें तो हिंसक और उन्मादी भीड़ द्वारा लगातार पत्रकारों और मीडिया संस्थानों का दमन और उत्पीड़न किया जा रहा है।निष्पक्ष खबर लिखने और दिखाने वाले अखबार और टीवी चैनलों के कार्यालय में आगजनी तोड़ फोड़ की जा रही साथ ही पत्रकारों पर जबरन फर्जी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।इतना ही नहीं वहां सरे आम पत्रकारों की हत्या की जा रही है।बांग्लादेश के ऐसे अराजक हालत किसी भी लोकतांत्रिक पड़ोसी मुल्क के लिए भी चिंताजनक है।वहीं विश्व पत्रकार समुदाय के लिए पीड़ादाई है।बांग्लादेश में उपद्रवी भीड़ द्वारा पत्रकारों की निर्मम हत्या वहां प्रेस मीडिया की स्वतंत्रता और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।यूनुस सरकार में लगातार अभिव्यक्ति,प्रेस की स्वतंत्रता,मानवाधिकार, लोकतंत्र,मानव के मौलिक अधिकारों को कट्टरपंथी उपद्रवी और अराजकतावादी भीड़ के द्वारा कुचला जा रहा है।जिस देश में प्रेस,मीडिया की सुरक्षा और स्वतंत्रता अनिश्चित है वहां लोकतांत्र पर बात करना एक भद्दे मजाक जैसा है।बांग्लादेश सरकार पत्रकार हत्याकांड की निष्पक्ष जांच करे और मानवाधिकार आयोग और अंतरास्ट्रीय समुदाय संज्ञान लेकर न्यायिक कार्यवाई सुनिश्चित करवाएं।
विदित हो कि ढाका में अज्ञात हमलावरों ने 5 जनवरी को बाजार में पत्रकार राणा प्रताप बैरागी की गोली मार कर हत्या कर दी थी।वे एक अखबार के कार्यकारी संपादक थे।

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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

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