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Monday, April 22, 2024
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सदियों से इंसान बेहतरी की तलाश में आगे बढ़ता जा रहा है, तमाम तंत्रों का निर्माण इस बेहतरी के लिए किया गया है। लेकिन कभी-कभी इंसान के हाथों में केंद्रित तंत्र या तो साध्य बन जाता है या व्यक्तिगत मनोइच्छा की पूर्ति का साधन। आकाशीय लोक और इसके इर्द गिर्द बुनी गई अवधाराणाओं का क्रमश: विकास का उदेश्य इंसान के कारवां को आगे बढ़ाना है। हम ज्ञान और विज्ञान की सभी शाखाओं का इस्तेमाल करते हुये उन कांटों को देखने और चुनने का प्रयास करने जा रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में इंसानियत के पग में चुभती रही है...यकीनन कुछ कांटे तो हम निकाल ही लेंगे।

निष्कर्ष (कहानी)

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परिचय: पल्लवी वर्मा ग्रास रुट के कंटेट को उठाकर मनोवैज्ञानिक तरीके से कथाएं बुनती चली जाती हैं। फैंटेसी के साथ रियलिज्म का अदभुत रोमांटिक...

सौर शक्ति से चलने वाली लैपटाप मात्र 500 रुपये में

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विश्व पटल पर भारत की एक और उपलब्धि अश्निनी कुमार, नई दिल्ली अब लैपटाप एरा गांवों की ओर भागने के लिए तैयार है। छोटे-छोटे कस्बे और...

“भारतीय तेलचट्टे, जानवर और अशिक्षित हैं”

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तेवरआनलान, न्यूजर्सी अमेरिका के न्यूजर्सी राज्य में यहूदीवादी सरकार द्वारा लगातार भारत और भारतीयों का अपमान किया जा रहा है, और अमेरिका में रहने वाले यहूदी...