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Sunday, April 11, 2021

चल मां के दरबार में (कविता)

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राजेश वर्मा, चल रे साथी..हाथ जोड़ ले मां के दर्शन कर ले धुल जाएंगे पाप तेरे क्यूं मोह-माया में भटके चल रे साथी...ओ साथी...... जय जगदम्बे... जय मां जय जगदम्बे... जीवन...